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बिहार में 34 साल बाद मिला इंसाफ! बहन को पेड़ से बांधकर पीटा, भाई को तड़पाकर मार डाला; अब 5 दोषियों को मिली उम्रकैद

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बिहार के मुजफ्फरपुर जिले की एक अदालत ने 34 साल पुराने हत्या के मामले में फैसला सुनाया है. अहियापुर थाना क्षेत्र के सिवराहां चतुर्भूज गांव में 1991 में हुई कुंवर राय की हत्या के मामले में एडीजे-5 की अदालत ने पांच आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. साथ ही अदालत ने सभी दोषियों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है. जुर्माना नहीं चुकाने की स्थिति में उन्हें दो वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा.

यह फैसला एडीजे-5 के न्यायाधीश आलोक कुमार पाण्डेय की अदालत ने सुनाया. सजा पाने वालों में बैधनाथ राय, रामबलम राय, महंथ राय, रामचंद्र पासवान और सहदेव राय शामिल हैं. मामले की सुनवाई के दौरान अपर लोक अभियोजक सुनील कुमार पाण्डेय ने अदालत में गवाहों और साक्ष्यों को पेश किया, जिसके आधार पर अदालत ने आरोपियों को दोषी पाया.

13 लोग नामजद आरोपी

9 अगस्त 1991 को सिवराहां चतुर्भूज गांव के रहने वाले मोहन राय के बयान के आधार पर अहियापुर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी. एफआईआर में कुल 13 लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया था. प्राथमिकी के अनुसार, 9 अगस्त 1991 की सुबह करीब आठ बजे बैधनाथ राय अपनी लाइसेंसी बंदूक के साथ अन्य आरोपियों के साथ मोहन राय के खेत पर पहुंचा था. आरोप है कि उनके साथ मौजूद अन्य लोगों के हाथों में भी बंदूक के अलावा लाठी, फरसा और बम थे.

बताया गया कि सभी आरोपी ट्रैक्टर लेकर खेत जोतने लगे. जब इसका विरोध किया गया तो आरोपियों ने मोहन राय की मां बसंती देवी की बेरहमी से पिटाई कर दी और उन्हें पेड़ से बांध दिया. इस दौरान गांव में हंगामा मच गया. शोर सुनकर बसंती देवी के भाई और मोहन राय के मामा कुंवर राय मौके पर पहुंचे और बसंती देवी को बचाने की कोशिश करने लगे.

इसी दौरान आरोप है कि बैधनाथ राय ने कुंवर राय पर ताबड़तोड़ तीन गोलियां चला दीं. गोली लगते ही कुंवर राय मौके पर ही गिर पड़े. इसके बाद भी आरोपियों का गुस्सा शांत नहीं हुआ और उन्होंने कुंवर राय को घेरकर उनकी दाहिनी बांह तोड़ दी. गंभीर रूप से घायल कुंवर राय की मौके पर ही मौत हो गई. इस घटना से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई थी.

मामा की गोली मारकर हत्या

मोहन राय ने बताया कि उनकी मां बसंती देवी के सामने ही उनके मामा की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. उन्होंने कहा कि इस फैसले का उनके परिवार को लंबे समय से इंतजार था. करीब तीन दशक से ज्यादा समय तक चली कानूनी लड़ाई के बाद आखिरकार अदालत ने दोषियों को सजा सुनाई है. अदालत का फैसला सुनते ही पीड़ित परिवार ने राहत की सांस ली और इसे न्याय की जीत बताया. वहीं सजा सुनाए जाने के बाद अदालत परिसर में मौजूद दोषियों के चेहरे लटक गए.

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