Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Iran-Israel War Impact: ईरान युद्ध के कारण बढ़ सकते हैं पानी और कोल्ड ड्रिंक की बोतलों के दाम; भारतीय... मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का बड़ा फरमान: "मुसलमानों के लिए इस्लामी उत्तराधिकार कानून अनिवार्य"; संपत्ति... विकसित भारत 2047: हरियाणा बनेगा देश का 'ग्रोथ इंजन'! उद्योग और युवाओं के कौशल पर सरकार का बड़ा दांव;... दिल्ली-देहरादून हाईवे पर 'आपत्तिजनक नारा' लिखना पड़ा भारी! दो युवतियों समेत 3 गिरफ्तार; माहौल बिगाड़ने... सावधान! दिल्ली में 48 घंटे बाद बरसेगा पानी, यूपी-राजस्थान में 'तूफान' जैसी हवाओं का अलर्ट; IMD ने पह... आगरा में 'जहरीली गैस' का तांडव! कोल्ड स्टोरेज से रिसाव के बाद मची भगदड़, जान बचाने के लिए खेतों की त... Bus Fire News: जैसलमेर से अहमदाबाद जा रही स्लीपर बस में लगी भीषण आग, एक यात्री झुलसा; खिड़कियों से क... कश्मीर में VIP सुरक्षा पर 'सर्जिकल स्ट्राइक'! फारूक अब्दुल्ला पर हमले के बाद हिला प्रशासन; अब बुलेटप... ईरान की 'हिट लिस्ट' में Google, Apple और Microsoft? अब टेक कंपनियों को तबाह करेगा तेहरान; पूरी दुनिय... दिल्ली में 'Zero' बिजली बिल वालों की शामत! खाली पड़े घरों की सब्सिडी छीनने की तैयारी; क्या आपका भी बं...

Meghnath Mela: 60 फीट ऊंचे स्तंभ पर हैरतअंगेज कारनामे, उल्टा लटककर झूला झूलने की अनोखी परंपरा

13

सिवनी : होली के अगले दिन सिवनी के पांजरा में एशिया का सबसे बड़ा ‘मेघनाथ मेला’ लगता है. होलिका दहन के अगले दिन धुरेड़ी के अवसर पर आस्था, परंपरा और हैरतअंगेज रोमांच का अद्भुत नजारा देखने को मिलता है. मेघनाथ मेला आदिवासी संस्कृति का जीवंत केंद्र है. साथ ही परंपराओं को सहेजने का एक सशक्त माध्यम भी. इसलिए इस मौके पर दूर-दूर से आदिवासी आते हैं.

‘हाकड़े बिर्रे’ के जयघोष से गूंजा पांजरा

होली के अगले दिन जिसे स्थानीय भाषा में धुरेड़ी कहा जाता है, यहां मेघनाथ स्तंभ की विशेष पूजा की परंपरा निभाई गई. आदिवासी समुदाय (विशेषकर गोंड जनजाति) रावण के पुत्र मेघनाथ को अपना आराध्य देव मानकर उपासना करते हैं. मेले के दौरान पूरा परिसर ‘हाकड़े बिर्रे’ के पारंपरिक जयघोष से गुंजायमान रहा, जो इस उत्सव की धार्मिक और सांस्कृतिक ऊर्जा को प्रदर्शित करता है. मेले का मुख्य आकर्षण लगभग 60 फीट ऊंचा लकड़ी का ‘मेघनाथ स्तंभ’ है, जिसे पूरे एशिया में अपनी तरह का सबसे ऊंचा स्तंभ माना जाता है.

आस्था और रोमांच की पराकाष्ठा

मन्नत पूरी होने पर श्रद्धालु, जिन्हें ‘वीर’ कहा जाता है, इस ऊंचे खंभे के मचान पर चढ़ते हैं. सुरक्षा के लिए वे केवल रस्सियों के सहारे बंधे होते हैं और हवा में लटककर स्तंभ के चारों ओर चक्कर लगाते हैं. इस दौरान जमीन पर नीचे मौजूद भीड़ द्वारा श्रद्धालुओं के ऊपर नारियल फेंके जाने की भी अनूठी परंपरा है.

दिनेश पूसराम, नरपत यादव, कमलसिंह परते, जयदीप दुबे, सुरेन्द्र ठाकुर के अनुसार “लोगों में यह दृढ़ विश्वास है कि मेघनाथ स्तंभ पर उल्टा झूलने और मन्नत मांगने से गंभीर बीमारियों, संतान प्राप्ति और विवाह संबंधी जैसी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.”

होली के दिन भी रंग या गुलाल से परहेज

मेघनथ मेले में केवलारी सहित आसपास के 20-25 गांवों के हजारों आदिवासी और अन्य समाज के लोग इस भव्य आयोजन में शामिल हुए. पांजरा गांव की इस परंपरा की एक खास बात यह भी है कि धुरेड़ी के दिन, जहां देशभर में होली खेली जाती है, यहां के ग्रामीण न तो रंग उड़ाते हैं और न ही गुलाल लगाते हैं. पूरा गांव इस दिन को पूरी तरह से मेघनाथ की उपासना और सेवा के लिए समर्पित रखता है. गांव का कोई भी व्यक्ति इस दिन टीका तक नहीं लगाता, जो उनकी अपने आराध्य के प्रति गहरी निष्ठा को दर्शाता है.

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.