भारतीय महिला क्रिकेट खिलाड़ी ऋचा घोष ने वर्ल्ड कप जीतकर देश का नाम रोशन किया, बंगाल का नाम रोशन किया. लेकिन वो ऋचा घोष SIR एग्जाम पास नहीं कर पाईं? ऋचा घोष का नाम फाइनल लिस्ट में अप्रूव्ड लिस्ट में नहीं है. उनका नाम अंडर एडजुडिकेशन (संदिग्ध) लिस्ट में रखा गया है. इससे यह सवाल उठने लगा है कि देश के लिए खेलने वाली, इंडिया के लिए वर्ल्ड कप खेलने वाली, देश के लिए कप जीतने वाली क्रिकेटर ऋचा घोष का नाम अनसेटल्ड लिस्ट में कैसे हो सकता है?
ऋचा घोष सिलीगुड़ी के कॉलेजपाड़ा के वार्ड नंबर 30 की रहने वाली हैं. वो हमेशा से उसी वार्ड में रहती रही हैं. ऋचा घोष इस समय घर पर नहीं हैं. वो गेम में बिजी हैं. भारत ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ दूसरा ODI मैच खेला. ऋचा ने मैच में अहम रोल निभाया था.
लेकिन, जैसे ही फाइनल SIR लिस्ट पब्लिक हुई, देखा गया कि ऋचा का नाम अनसेटल्ड लिस्ट में था. सिर्फ ऋचा ही नहीं, बल्कि उनकी बहन सोमश्री का नाम भी अप्रूव्ड लिस्ट में नहीं है.
ऋचा घोष का नाम संदिग्ध केस की लिस्ट में
ऋचा घोष का नाम संदिग्ध केस की लिस्ट में क्यों है? क्या ऋचा को सुनवाई का नोटिस भेजा गया था? ऋचा के पिता ने कहा कि कोई नोटिस नहीं भेजा गया था. हालांकि, उनके पिता से एक डॉक्यूमेंट मांगा गया था.
ऋचा के पिता ने कहा, “इलेक्शन कमीशन ने पहले कुछ जानकारी मांगी थी. मैंने उसे जमा कर दिया था. मैंने बर्थ सर्टिफिकेट दिया था. उसे अपलोड भी कर दिया गया था.” इस बीच, ऋचा के माता-पिता दोनों के नाम 2002 की लिस्ट में हैं. इसलिए ऋचा के माता-पिता को समझ नहीं आ रहा है कि ऋचा का नाम संदिग्ध केस की लिस्ट में कैसे आया है?
SIR पर टीएमसी ने उठाए सवाल
इस बीच, लोकल वार्ड नंबर 19 की काउंसलर मौसमी हाजरा आज ऋचा घोष के घर पहुंचीं. उन्होंने कहा, “एक लड़की जो देश के लिए खेलती है और जिसके पास पासपोर्ट है, उसका नाम पेंडिंग क्यों होना चाहिए? अगर उसके जैसी सेलिब्रिटी के साथ ऐसा हो सकता है, तो यह समझा जा सकता है कि एक आम आदमी के साथ क्या हो सकता है.”
इस बारे में, राज्य बीजेपी अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने कहा कि यह चुनाव आयोग का मामला है. आयोग इस मामले को देखेगा. वैसे, यहां यह बताना जरूरी है कि सिर्फ इसलिए कि किसी का नाम संदिग्ध लिस्ट में है, ऐसा बिल्कुल नहीं है कि उसका नाम हटा दिया जाएगा. जिनके नाम संदिग्ध लिस्ट में हैं, वे अभी भी पेंडिंग प्रोसेस में हैं. न्यायिक अधिकारी उनके डॉक्यूमेंट्स की जांच कर रहे हैं.
फ़ाइनल लिस्ट के प्रकाशन के बाद, यह देखा गया कि 60 लाख से ज्यादा वोटर संदिग्ध लिस्ट में हैं. डॉक्यूमेंट्स के वेरिफ़िकेशन के बाद सप्लीमेंट्री लिस्ट प्रकाशित की जाएगी. उसके बाद ही पता चलेगा कि संदिग्ध लिस्ट से और कितने नाम हटाए जा रहे हैं.
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