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सतना में ‘पिज्जा’ खाते ही होने लगी उल्टी! वेज मंगाया था और मिला नॉनवेज, आउटलेट को भरना होगा 8 लाख का जुर्माना

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मध्य प्रदेश के सतना जिले में एक नामी पिज्जा आउटलेट के खिलाफ जिला उपभोक्ता फोरम ने बड़ा फैसला सुनाया है. वेज पिज्जा की जगह नॉन वेज पिज्जा परोसने शिकायत पर उपभोक्ता फॉर्म ने इस पिज्जा कंपनी पर 8 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है. मामला सिविल लाइन क्षेत्र के पतेरी-पन्नानाका मार्ग स्थित एक फूड ब्रांच से जुड़ा है. यहां वेज बर्गर में कथित रूप से सूअर का मांस परोसने की शिकायत सामने आई थी. करीब डेढ़ साल तक चली सुनवाई के बाद फोरम ने कंपनी पर 8 लाख रुपये का मुआवजा, 10 हजार रुपये वाद व्यय और 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का आदेश दिया है.

दरअसल, यह घटना 31 अक्टूबर 2024, दीपावली के दिन की बताई गई है. श्रीधाम आश्रम में रहने बाली शिकायतकर्ता 42 वर्षीय नैंसी तिवारी अपने पति सूरज तिवारी और बच्चों के साथ पन्ना नाका स्थित एक फेमस पिज्जा आउटलेट पर पहुंची थीं. यहां उन्होंने 595 रुपए के बेज दो चाइनीज डिश के साथ पिज्जा और बर्गर समेत कुल चार आइटम का ऑर्डर दिया. दंपति ने पहले पिज्जा और अन्य सामग्री खाई, लेकिन जैसे ही कोरियन पनीर टिक्का गार्लिक ब्रेड पिज्जा खाना शुरू किया उन्हें असहजता महसूस होने लगी. आरोप है कि स्वाद और बनावट अलग थी जिसके बाद दोनों को उल्टी जैसा महसूस हुआ.

हंगामा हुआ, मामला उपभोक्ता फोरम तक पहुंचा

दंपति ने तुरंत इसकी शिकायत दुकान संचालक से की, लेकिन उनकी बात को गंभीरता से नहीं लिया गया. मौके पर बहस और हंगामा भी हुआ परंतु समाधान नहीं निकला. इसके बाद पीड़ित पक्ष ने सिविल लाइन थाने में शिकायत दर्ज कराई और साथ ही जिला उपभोक्ता फोरम का दरवाजा खटखटाया. मामले में 5 सितंबर 2025 को एफआईआर दर्ज की गई और दस्तावेजों सहित जांच रिपोर्ट फोरम के समक्ष प्रस्तुत की गई.

फैसले में क्या उपभोक्ता फोरम ने क्या कहा?

शिकायतकर्ता की ओर से अधिवक्ता करुणेश अरोरा ने पैरवी की. सुनवाई के दौरान फोरम ने खाद्य सामग्री से संबंधित रिपोर्ट, बिल, चिकित्सकीय दस्तावेज और अन्य साक्ष्यों का परीक्षण किया. सभी तथ्यों पर विचार करने के बाद अब यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया गया. आदेश में कहा गया कि उपभोक्ता को गलत और भ्रामक तरीके से खाद्य सामग्री परोसी गई, जिससे मानसिक और शारीरिक कष्ट हुआ.

8 लाख का मुआवजा देने का फैसला

फोरम ने पिज्जा शॉप संचालक को निर्देश दिया कि एक माह के भीतर 8 लाख रुपये का मुआवजा अदा किया जाए. साथ ही 10 हजार रुपये वाद व्यय के रूप में और पूरी राशि पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा. तय समय सीमा में भुगतान न करने पर उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धारा 72 के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है. यह फैसला शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है और खाद्य प्रतिष्ठानों की गुणवत्ता व पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े कर रहा है.

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