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Anil Saumitra News: SC/ST एक्ट मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट से अनिल सौमित्र को राहत, केस रद्द

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भोपाल : बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने डॉ. अनिल कुमार सौमित्र के बहुचर्चित मामले में बड़ा फैसला सुनाया है. इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन अमरावती के पूर्व क्षेत्रीय निदेशक डॉ. अनिल कुमार सौमित्र के खिलाफ दर्ज एससी/एसटी अत्याचार अधिनियम का मामला निरस्त कर दिया गया है. न्यायमूर्ति प्रवीन एस. पाटिल ने 24 फरवरी 2026 को पारित आदेश में स्पष्ट कहा है कि उपलब्ध साक्ष्यों में जाति आधारित सार्वजनिक अपमान की पुष्टि नहीं होती. ऐसे में प्रकरण को जारी रखना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग माना जाएगा. डॉ. अनिल कुमार मध्य प्रदेश भाजपा आईटी सेल के प्रमुख भी रह चुके हैं.

साल 2022 में असिस्टेंट प्रोफेसर ने लगाया था आरोप

साल 2022 में डॉ. अनिल सौमित्र के खिलाफ संस्थान के एक संविदा सहायक प्राध्यापक ने फ्रेजरपुरा थाने में शिकायत दर्ज कराई थी. अनिल सौमित्र पर आरोप था कि 7 और 8 दिसंबर 2021 को कक्षा रोकने और स्टाफ मीटिंग के दौरान सार्वजनिक रूप से अपमानित किया गया, जो जाति आधारित था. इस शिकायत के आधार पर अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 की धाराओं में मामला दर्ज कर आरोपपत्र पेश किया गया था.

व्यक्तिगत द्वेष से प्रेरित थे आरोप

इस मामले में डॉ. सौमित्र ने कहा, ” विवाद पूरी तरह प्रशासनिक और कार्य निष्पादन से जुड़ा था. संबंधित प्राध्यापक को 13 जनवरी 2022 को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था. जबकि किसी भी स्तर पर जातिसूचक टिप्पणी नहीं की गई.” सौमित्र का कहना है कि यह आरोप व्यक्तिगत द्वेष से प्रेरित थे.

न्यायालय ने बताया एट्रोसिटी एक्ट का मतलब

न्यायालय ने जांच के दौरान दर्ज गवाहों के बयान और संस्थान की दो सदस्यीय आंतरिक जांच समिति की रिपोर्ट का अवलोकन किया. रिपोर्ट में प्रत्यक्ष जाति आधारित टिप्पणी की पुष्टि नहीं हुई. अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले केशव महतो विपक्ष बिहार सरकार का हवाला देते हुए कहा कि एट्रोसिटी एक्ट के तहत अपराध तभी बनता है जब अपमान स्पष्ट रूप से जाति के आधार पर और सार्वजनिक दृष्टि में किया गया हो.

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