Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
West Bengal Politics: टीएमसी छोड़ने के बाद कोयल मल्लिक को मिला बड़ा राजनीतिक तोहफा, बीजेपी ने दिया राज... दिल्ली में वायु प्रदूषण के खिलाफ सख्ती: ‘ऑपरेशन क्लीन एयर’ के तहत CAQM ने रिंग रोड पर चलाया विशेष नि... मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग पर दिल्ली में घमासान: इंडिया गेट पर AAP का विरोध मार्च, सौरभ भ... Amritsar Border Security: अमृतसर में पाकिस्तान के आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़, एके-47 और हैंड ग्रेनेड ... Delhi VIP Theft News: राज्यसभा सांसद डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल के सरकारी आवास में चोरी, गटर का ढक्कन... मुजफ्फरपुर में पुलिस की शर्मनाक करतूत: अंतरजातीय विवाह से जुड़ी समस्या को लेकर पहुंची महिला को बाल प... Delhi High Court Notice: करोल बाग में मेट्रो निर्माण के लिए पेड़ काटने पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, DDA ... पश्चिम बंगाल में समान नागरिक संहिता (UCC) का ऐलान: सीएम शुभेंदु अधिकारी ने मांगे 6 महीने, 'लव जिहाद'... Seoni Murder Case: मध्य प्रदेश के सिवनी में सनसनीखेज हत्याकांड, मां और मामा ने मिलकर की 22 वर्षीय यु... विपक्ष की रैली पर आशीष शेलार का तीखा हमला: मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन को बताया ‘लोमड़ियों ...

पंजाब की सियासत में नया मोड़! फाइनांस कमीशन की ग्रांट को लेकर आमने-सामने केंद्र और राज्य; खैहरा के पत्र से मची खलबली

32

पंजाब की राजनीति में 15वें वित्त आयोग की ग्रामीण स्थानीय निकाय (RLB) ग्रांट को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। भुलत्थ से विधायक Sukhpal Singh Khaira ने केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर पंजाब में जारी की गई ग्रांट के कथित दुरुपयोग की जांच की मांग की है। अपने पत्र में खैहरा ने आरोप लगाया है कि 15वें वित्त आयोग के तहत पंजाब को ग्रामीण स्थानीय निकायों- ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद को सशक्त बनाने के लिए दी गई राशि में से लगभग 750 करोड़ रुपये राज्य सरकार द्वारा विभागीय देनदारियों और जल आपूर्ति जैसी सेवाओं के संचालन खर्चों में उपयोग किए जाने की सूचना है।

सुखपाल खैहरा ने कहा कि यदि ऐसा हुआ है तो यह वित्त आयोग की शर्तों और दिशा-निर्देशों का उल्लंघन होगा। साथ ही, यह 73वें संविधान संशोधन की भावना के विपरीत है, जिसका उद्देश्य स्थानीय निकायों को वित्तीय रूप से मजबूत बनाना है। खैहरा ने आशंका जताई कि इससे पंचायतों को मिलने वाले वैध संसाधनों में कटौती हुई हो सकती है और व्यय का वर्गीकरण भी गलत तरीके से दिखाया गया हो।

इन फंडों को सीधे पंचायती राज संस्थाओं को ट्रांसफर किया जाना चाहिए और तय गाइडलाइंस के अनुसार सख्ती से इस्तेमाल किया जाना चाहिए, जिसका मकसद फिस्कल डीसेंट्रलाइज़ेशन और लोकल डेवलपमेंट को बढ़ावा देना है। लेकिन, मुझे फील्ड सोर्स से पक्के इनपुट मिले हैं, जिनसे पता चलता है कि इन फंड का एक बड़ा हिस्सा, जो कथित तौर पर लगभग 750 करोड़ रुपए है, शायद राज्य सरकार ने डिपार्टमेंट की देनदारियों को पूरा करने के लिए डायवर्ट किया या इस्तेमाल किया, जिसमें पानी की सप्लाई और उससे जुड़ी सर्विसेज से जुड़े ऑपरेशनल खर्च शामिल हैं, बजाय इसके कि इसे पंचायती राज संस्थाओं को मंज़ूर लोकल डेवलपमेंट के कामों के लिए भेजा और इस्तेमाल किया जाए।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.