Share Market Tips: AI के बूम में IT कंपनियां रह जाएंगी पीछे! इन सेक्टर्स में छिपा है मुनाफे का खजाना
दुनिया भर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर निवेश की होड़ मची है. आम धारणा है कि इस तकनीक के विस्तार का सबसे बड़ा सीधा लाभ सॉफ्टवेयर और आईटी सर्विस कंपनियों को मिलेगा. हालांकि, बाजार विशेषज्ञों का नजरिया इससे काफी अलग है. ‘मैन्युलाइफ इन्वेस्टमेंट मैनेजमेंट’ के सीनियर पोर्टफोलियो मैनेजर राणा गुप्ता के अनुसार, निवेशकों को आईटी सेक्टर से परे देखने की जरूरत है. एआई की इस दौड़ में असली वित्तीय लाभ उन कंपनियों को होने वाला है, जो इस भारी-भरकम तकनीक को सुचारू रूप से चलाने के लिए बुनियादी ढांचा तैयार कर रही हैं
सॉफ्टवेयर से पहले भारी उपकरणों की जरूरत
दिग्गज ग्लोबल टेक कंपनियां एआई की रेस में आगे रहने के लिए अरबों डॉलर का निवेश कर रही हैं. यह भारी भरकम पूंजी सीधे तौर पर सिर्फ सॉफ्टवेयर बनाने वाली कंपनियों के खातों में नहीं जा रही है. एआई सिस्टम और डेटा सेंटर्स को चलाने के लिए सबसे पहली जरूरत बिजली की होती है. इस कारण निवेश का एक बड़ा हिस्सा पावर सिस्टम, उपकरण निर्माण और मेटल सेक्टर में जा रहा है. एआई का पूरा वजूद लगातार और निर्बाध बिजली आपूर्ति पर टिका है. ऐसे में पावर जनरेशन और हेवी इक्विपमेंट बनाने वाली कंपनियों के लिए यह एक बहुत बड़ा और लंबा अवसर साबित होने वाला है.
इन उद्योगों की चमकेगी किस्मत
हाइपरस्केलर्स जैसे-जैसे अपनी क्षमता बढ़ा रहे हैं, दुनिया भर में नए और विशाल डेटा सेंटर्स का निर्माण तेज हो गया है. इन सेंटर्स को चलाने के लिए सिर्फ कंप्यूटर नहीं, बल्कि हाई-टेक स्विचगियर, विशाल बैकअप जनरेटर, हजारों किलोमीटर लंबी केबल और सबसे महत्वपूर्ण, उन्नत कूलिंग सिस्टम की आवश्यकता होती है. एआई से जुड़े काम बहुत अधिक ऊर्जा की खपत करते हैं, जिससे भयंकर गर्मी पैदा होती है. तापमान को नियंत्रित रखना इन सेंटर्स के लिए सबसे बड़ी चुनौती है. इसलिए, इन सहायक उपकरणों का निर्माण करने वाले उद्योगों को आने वाले कई वर्षों तक लगातार ऑर्डर मिलते रहने की उम्मीद है क्योंकि ये 24 घंटे काम करते हैं.
भारत के लिए यहां है असली मौका
यह सच है कि भारत अभी बड़े पैमाने पर सेमीकंडक्टर या मेमोरी चिप का उत्पादन नहीं कर रहा है. लेकिन वैश्विक इंजीनियरिंग सप्लाई चेन और इलेक्ट्रिकल उपकरणों के निर्माण में भारत की स्थिति बेहद मजबूत है. घरेलू कंपनियों के पास पावर इक्विपमेंट और हीटिंग, वेंटिलेशन और एयर कंडीशनिंग (HVAC) सिस्टम में महारत हासिल है. जैसे-जैसे वैश्विक स्तर पर डेटा सेंटर्स का जाल बिछेगा, भारतीय कंपनियों के इन उत्पादों की मांग में भारी उछाल आना तय है.
निजी निवेश में शानदार वापसी
एआई बूम के इतर, भारतीय अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर भी काफी सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं. कॉरपोरेट सेक्टर की कमाई में लगातार सुधार दर्ज किया जा रहा है और क्रेडिट ग्रोथ भी बढ़ रही है. बीएसई-500 कंपनियों के मुनाफे में मजबूत बढ़ोतरी देखी गई है. इसके साथ ही, लंबे समय से सुस्त पड़ा निजी निवेश अब वापस पटरी पर लौट रहा है. कंपनियां रियल एस्टेट, मेटल और नए डेटा सेंटर्स में खुलकर निवेश करने की योजनाएं बना रही हैं. निर्माण और बुनियादी ढांचे में आ रही इस तेजी का सीधा फायदा ट्रांसपोर्ट और कमर्शियल व्हीकल सेक्टर को भी मिल रहा है.
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