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Share Market Crash: शेयर बाजार में हाहाकार, निवेशकों के डूबे 6 लाख करोड़; जानें गिरावट के 5 बड़े कारण

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भारतीय शेयर बाजार अभी कब ऊपर जाएगा और कब एक दम से धड़ाम हो जाएगा कुछ कहा नहीं जा सकता है. सेंसेक्स और निफ्टी की चाल बहुत ही तेजी से बदल रही है. गुरुवार 19 फरवरी के दिन भी कुछ यूं ही हुआ मार्केट का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स कारोबार के समय करीब 1100 अंक नीचे गिर गया. वहीं, निफ्टी 50 भी ट्रेड के समय अपने डे लो 25,567.75 पर पहुंच गया. मार्केट की इस बिकवाली में मिड-कैप और स्मॉल-कैप कंपनियों को ज्यादा नुकसान हुआ. निवेशकों के करीब-करीब 4 लाख करोड़ रुपये डूब गए. अब यह सवाल आता है कि बाजार आज इतना क्यों गिर गया. क्या ऐसे निगेटिव ट्रिगर रहे, जिन्होंने निवेशकों के पैसे डुबा दिए?

शेयर बाजार की इस गिरावट में बीएसई की बड़ी लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप काफी कम हो गया. बीते कारोबारी दिन में BSE का मार्केट कैप जो पिछले सेशन में 472 लाख करोड़ रुपये था. वह घटकर 466 लाख करोड़ रुपये हो गया. यानी निवेशकों को भारी नुकसान हो गया.

क्यों गिर रहा है बाजार

    1. मुनाफावसूली का दिखा असर- हालिया बढ़त के बाद घरेलू बाजार में मुनाफावसूली देखने को मिल रही है. बुधवार को सेंसेक्स और निफ्टी 50 ने लगातार तीसरे सत्र में बढ़त जारी रखी. बजट, भारत-अमेरिका समझौता और आरबीआई की नीति जैसे बड़े आर्थिक कारणों के खत्म होने और तीसरी तिमाही के नतीजों का दौर पूरा होने के बाद, नए घरेलू कारणों की कमी की वजह से बाजार में शेयरों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है.
    2. फेड मीटिंग का असर- अमेरिकी फेडरल रिजर्व की जनवरी में हुई बैठक से पता चलता है कि अधिकारी आगे की रणनीति को लेकर बंटे हुए हैं. कुछ लोग मानते हैं कि अगर महंगाई कम होती है तो राहत मिल सकती है, जबकि दूसरे मानते हैं कि अगर कीमतों का दबाव बना रहा तो सख्ती जारी रखनी पड़ेगी. ब्याज दरों में कटौती पर लंबे समय तक रोक या अमेरिकी फेड द्वारा फिर से दरें बढ़ाने से डॉलर मजबूत हो सकता है. इससे भारतीय बाजारों में विदेशी निवेश पर असर पड़ सकता है. नकदी बाजार में लगातार सात महीनों की बिकवाली के बाद फरवरी में विदेशी निवेशकों की खरीदारी फिर से शुरू हुई है.

  1. अमेरिका-ईरान तनाव पर बाजार की नजर- बुधवार को सीएनएन की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि अमेरिकी सेना इस सप्ताहांत तक ईरान पर हमला करने की तैयारी में है. एक्सियोस ने बताया कि यह हमला छोटा नहीं बल्कि कई हफ्तों तक चलने वाला बड़ा अभियान हो सकता है, जो लगभग युद्ध जैसी स्थिति पैदा कर सकता है. बाजार अमेरिका-ईरान संबंधों से जुड़े घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है. विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशक हफ्ते के आखिरी में तनाव बढ़ने की आशंका से अपनी पोजीशन घटा रहे हैं.
  2. कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी- कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने भी बाजार पर असर डाला है. पिछले सत्र में डब्ल्यूटीआई क्रूड फ्यूचर्स 4.60% बढ़कर 65.19 डॉलर प्रति बैरल हो गया, जबकि ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 4.35% बढ़कर 70.35 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया. गुरुवार को भी ब्रेंट क्रूड 70.53 डॉलर और डब्ल्यूटीआई क्रूड 65.4 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया. ऊंची तेल कीमतें भारतीय अर्थव्यवस्था और रुपये के लिए सही नहीं मानी जातीं, क्योंकि भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में से एक है.
  3. तुरंत पॉजिटिव ट्रिगर की कमी- विशेषज्ञों का मानना है कि उम्मीद के मुताबिक आय और मजबूत आर्थिक हालात के चलते कैलेंडर वर्ष 2026 में घरेलू बाजार में अच्छी तेजी आ सकती है, लेकिन नए ट्रिगर की कमी के कारण बाजार को आगे बढ़ने में दिक्कत हो रही है. लार्ज कैप कंपनियों के शेयर अब ठीक वैल्यूएशन पर हैं, लेकिन मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों के शेयर अभी भी महंगे हैं. इसी वजह से बाजार एक सीमित दायरे में घूम रहा है. जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार ने मिंट की रिपोर्ट में कहा कि निफ्टी इंडेक्स वित्त वर्ष 2027 के अनुमानित मुनाफे के लगभग 20 गुना पर ट्रेड कर रहा है, जबकि एनएसई मिडकैप और एनएसई स्मॉलकैप इंडेक्स 28 और 24 गुना पर कारोबार कर रहे हैं. ऐसे में यह बाजार समझदार और चुस्त निवेशकों के लिए अच्छा मौका बन गया है.

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