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Mahashivratri Holiday Controversy: महाशिवरात्रि की छुट्टी पर नया विवाद, पूर्व मंत्री की पत्नी ने सरकारी सर्कुलर को घेरा

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लुधियाना: महाशिवरात्रि की छुट्टी और सरकारी सर्कुलर को लेकर पूर्व मंत्री भारत भूषण आशू की पत्नी ममता आशू ने सरकार के फैसले पर सवाल उठाए हैं।

ममता आशू ने कहा कि उनके संज्ञान में आया है कि महाशिवरात्रि के अवसर पर गजटेड छुट्टी घोषित होने के बावजूद सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों और शिक्षकों को सुबह सरकारी कार्यक्रमों में उपस्थित होने के निर्देश दिए जा रहे हैं। इससे प्रशासनिक एकरूपता और धार्मिक संवेदनशीलता को लेकर गंभीर चिंता पैदा होती है।उन्होंने कहा कि जब सरकार महाशिवरात्रि जैसे पवित्र पर्व पर छुट्टी घोषित करती है, तो उसका अर्थ केवल अवकाश देना नहीं होता, बल्कि इस दिन के आध्यात्मिक महत्व और नागरिकों के धार्मिक कर्तव्यों को निभाने के अधिकार की मान्यता भी होती है। शिवरात्रि व्रत, मंदिर दर्शन, रात्रि जागरण और पारिवारिक धार्मिक अनुष्ठानों का पर्व है, जिसे कई बच्चे और शिक्षक पूरी श्रद्धा से मनाते हैं।

उनका कहना है कि यदि उसी दिन स्कूलों को विद्यार्थियों और स्टाफ को सरकारी कार्यक्रमों में बुलाने के निर्देश दिए जाते हैं, तो छुट्टी घोषित करने का उद्देश्य ही खत्म हो जाता है। कागजों में छुट्टी और व्यवहार में उपस्थिति की उम्मीद रखना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि आस्था के लिए समय जरूरी होता है और धार्मिक आचरण को प्रशासनिक सुविधा के अनुसार नहीं बदला जा सकता। सामाजिक बुराइयों के खिलाफ अभियान जरूरी हैं, लेकिन वे घोषित धार्मिक छुट्टियों की पवित्रता पर भारी नहीं पड़ने चाहिए। शासन व्यवस्था को स्पष्ट, एकरूप और लोगों की भावनाओं के प्रति संवेदनशील होना चाहिए। वहीं सरकार से अपील की कि नागरिकों को ऐसी स्थिति में न डाला जाए जहां उन्हें सरकारी आदेशों और धार्मिक कर्तव्यों में से किसी एक को चुनना पड़े।

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