Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
BSF Attari Border News: अटारी सीमा पर रिट्रीट सेरेमनी का नया शेड्यूल जारी; शाम 5:30 बजे शुरू होगी पर... Batala Viral Video: गुरु नानक देव जी के विवाह पर्व में ट्रैक्टर स्टंट पड़ा भारी; तेज रफ्तार में पलटा... Dubai Visa Fraud: 90 हजार में दुबई भेजा, छीना पासपोर्ट और मुर्गीखाने में रखा! जालंधर के पीड़ित ने सु... Amritsar Flooding Alert: तरनतारन रोड के पास नहर टूटने से मचा हड़कंप; मिट्टी की बोरियों से दरार भरने ... Punjab Gold Silver Price Today: पंजाब में उछले सोना-चांदी के दाम; जालंधर में 24 कैरेट सोना ₹1.58 लाख... Ferozepur Central Jail: केंद्रीय जेल फिरोजपुर में फिर चला तलाशी अभियान; 10 और मोबाइल फोन बरामद, कैदि... Etah Fake University Scam: एटा में चायवाले के नाम पर चल रही थी फर्जी यूनिवर्सिटी; भेद खुला तो प्रिंस... Bihar Flood Relief: सीएम सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री राहत कोष में दान दी एक महीने की सैलरी; नितिन नब... Durg News Today: फेसबुक पोस्ट पर बवाल; भिलाई-3 थाने पहुंचे कांग्रेसी, भाजयुमो नेता पर FIR और गिरफ्ता... Agra Mahakumbh Ambikapur: सीएम विष्णु देव साय ने किया 'अग्र महाकुंभ 2026' का शुभारंभ; अग्रवाल समाज क...

Mahabharata Mystery: शकुनि नहीं, बल्कि ये पात्र था महाभारत का असली खलनायक! भगवान कृष्ण ने भी किया था इशारा

34

महाभारत सिर्फ एक युद्ध की कहानी नहीं है, बल्कि यह धर्म और अधर्म के संघर्ष की गाथा भी है. इस महाग्रंथ में जहां भगवान श्रीकृष्ण को धर्म और नीति का प्रतीक माना जाता है, वहीं अक्सर शकुनि को सबसे बड़ा खलनायक बताया जाता है. लेकिन पौराणिक मान्यताओं और घटनाओं को ध्यान से देखें तो कई विद्वान मानते हैं कि महाभारत में भीष्म पितामह की भूमिका भी बेहद जटिल रही है. वे अधर्म के सीधे कर्ता तो नहीं थे, लेकिन कई मौकों पर उनकी चुप्पी ने अधर्म को बढ़ावा दिया.

क्यों माना जाता है भीष्म पितामह को दोषी?

प्रतिज्ञा का घातक बंधन भीष्म ने आजीवन हस्तिनापुर के सिंहासन की रक्षा की शपथ ली थी. इसी प्रतिज्ञा के कारण वे दुर्योधन की गलतियों पर पर्दा डालते रहे. उन्होंने राष्ट्रहित से ऊपर अपनी निजी प्रतिज्ञा को रखा, जिसने आखिर में पूरे वंश का विनाश कर दिया.

द्रौपदी चीरहरण पर शर्मनाक चुप्पी यह महाभारत का वो काला अध्याय है जिसने भीष्म के चरित्र पर सबसे गहरा दाग लगाया. भरी सभा में जब द्रौपदी का अपमान हो रहा था, तब भीष्म जैसा प्रतापी योद्धा सिर झुकाए बैठे रहे. उनकी इस कार्य ने दुर्योधन के दुस्साहस को बढ़ाया था, जो महाभारत के विनाशकारी युद्ध का सबसे बड़ा कारण बना था.

मन पांडवों के साथ, शस्त्र कौरवों के लिए भीष्म जानते थे कि पांडव सत्य के मार्ग पर हैं और कृष्ण उनके साथ हैं. इसके बावजूद उन्होंने कौरवों की सेना का नेतृत्व किया. उनकी यह दोहरी भूमिका ही उन्हें शकुनि और दुर्योधन के समकक्ष खड़ा करती है.

बाणों की शैया: कर्मों का फल पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भीष्म को युद्ध के आखिर में बाणों की शैया पर लेटना पड़ा. यह केवल एक योद्धा की मृत्यु नहीं थी, बल्कि उनके द्वारा किए गए मौन पाप की सजा थी. बाणों की चुभन उस दर्द का प्रतीक थी जो उन्होंने अधर्म का साथ देकर समाज को दिया था.

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.