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हरियाणा के सरकारी स्कूलों में बच्चों की सेहत पर बड़ा खुलासा! हेल्थ रिपोर्ट में सामने आई डराने वाली सच्चाई, सरकार की बढ़ी चिंता

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हिसार: हरियाणा के 10 जिलों में हुए सर्वे में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। सरकारी स्कूलों की तुलना में निजी स्कूलों के विद्यार्थियों का स्वास्थ्य अधिक असुरक्षित पाया गया है, खासकर हीमोग्लोबिन की कमी के मामले में। 10 से 19 वर्ष के 10.08 हजार छात्रों पर हुए परीक्षण में निजी स्कूलों में एनीमिया का प्रतिशत सरकारी स्कूलों से अधिक मिला।

स्वास्थ्य निदेशालय अब निजी स्कूल के छात्रों को भी आयरन की खुराक देगा। प्रदेश के 10 जिलों में सरकारी स्कूलों की तुलना में निजी स्कूल में पढ़ रहे विद्यार्थियों का स्वास्थ्य असुरक्षित हैं। सुनने में अजीब है लेकिन यह सच है। स्कूल हेल्थ की ओर से ग्रुप ए में अंबाला, करनाल, पानीपत, पंचकूला, यमुनानगर और ग्रुप बी में फरीदाबाद, गुरुग्राम, झज्जर, रोहतक व सोनीपत जिलों के सरकारी व निजी स्कूलों में पढ़ रहे कुल 10.08 हजार विद्यार्थियों में हीमोग्लोबिन की जांच की, जिनमें विद्यार्थियों की उम्र 10 से 19 साल तक रही।

हैरान कर देने वाली थी रिपोर्ट

जब रिपोर्ट उजागर हुई तो हैरान कर देने वाली थी। उपरोक्त ग्रुप-ए के तहत जिलों के सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे 46 प्रतिशत व निजी स्कूलों में पढ़ रहे 49 प्रतिशत विद्यार्थियों में खून की कमी मिली। ग्रुप-बी के तहत जिलों के सरकारी स्कूलों में 50 व निजी स्कूलों में 53.6 प्रतिशत विद्यार्थियों में खून की कमी मिली।

स्कूल हेल्थ की टीम को एक्टिव होने की जरूरत 

स्वास्थ्य निदेशालय के डायरेक्टर वीरेंद्र यादव ने कहा कि स्कूल हेल्थ की टीम को एक्टिव होने की जरूरत है। क्योंकि सरकारी की तुलना में निजी स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों में खून की कमी अधिक मिली है। इसलिए हमने इस बार निजी स्कूलों में पढ़ रहे विद्यार्थियों को भी आयरन की डोज देने का फैसला लिया है। पहले चरण में हमने 10 जिलों के विद्यार्थियों के खून के सैंपल लिए थे।

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