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सावधान! जिसे समझकर रखा था ‘मसीहा’ वही निकली हैवान; 2 साल के मासूम को प्रताड़ित करने वाली केयर टेकर को कोर्ट ने सुनाई 3 साल की सजा

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जबलपुर : शहर में एक 2 साल के मासूम से मारपीट और प्रताड़ना के आरोप में एक केयर टेकर महिला को 3 साल की सजा सुनाई गई है. ये उन पेरेंट्स को सतर्क करने वाली खबर है, जो बिना जानकारी लोगों को घर पर हेल्पर या केयर टेकर रख लेते हैं. इस मामले में जिस महिला को बच्चे की देखरेख के लिए केयर टेकर रखा गया था, उसकी हैवानियत सीसीटवी फुटेज से सामने आई. इसके बाद बच्चे के माता-पिता ने पुलिस में शिकायत दर्ज की, जिसके बाद महिला को कोर्ट ने 3 साल सजा सुनाई गई है.

सीसीटीवी फुटेज से सामने आई हैवानियत

दरअसल, जबलपुर के एक वर्किंग कपल ने अपने बच्चे की देखरेख के लिए एक महिला को केयर टेकर रखा था. जब बच्चे के स्वास्थ्य में अचानक गिरावट आने लगी तो माता-पिता ने घर में सीक्रेट सीसीटीवी कैमरे लगा दिए. इसके बाद जो घटना रिकॉर्ड हुई वो देख माता-पिता के पैरों तले जमीन खिसक गई. फुटेज के आधार पर काम पर रखी गई महिला के खिलाफ थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई गई. इसके बाद कोर्ट ने सुनवाई करते हुए आरोपी महिला को विभिन्न धाराओं के तहत अधिकतम तीन साल की सजा से दंडित किया है.

अचानक बदल गया था मासूम का व्यवहार, बार-बार पड़ रहा था बीमार

अभियोजन के अनुसार मुकेश विश्वकर्मा विद्युत मंडल में जूनियर इंजीनियर व उनकी पत्नी सोनाली शर्मा जिला न्यायालय में पदस्थ हैं. दोनों सुबह करीब 10 बजे घर से निकलते थे, और अपने 2 साल के बेटे को घरेलू हेल्पर रजनी चौधरी अहिरवार के पास छोड़ जाते थे. बच्चे की देखरेख के लिए उनके द्वारा रजनी चौधरी को प्रतिमाह पांच हजार रु दिए जाते थे. हेल्पर रखने के कुछ महीनों बाद ही, बच्चा बहुत ज्यादा शांत हो गया, उसने हंसना, खेलना और खाना बंद कर दिया, और बार-बार बीमार पड़ने लगा. मेडिकल जांच में आंतों में इन्फेक्शन का पता चला, जिसके बाद माता-पिता ने बच्चे की देखरेख के लिए घर में चुपचाप सीसीटीवी कैमरे लगाए.

मासूम को बाल पकड़कर घसीटती थी रजनी

कैमरे लगवाने के बाद बच्चे के माता-पिता ने जब फुटेज देखे, तो दोनों सहम उठे. फुटेज में घरेलू हेल्पर रजनी चौधरी बच्चे के साथ बेरहमी से मारपीट करती दिखी. वह उस 2 साल के मासूम के बाल पकड़कर घसीटती थी, उसके पेट में घूंसा मारती और गला घोंटती थी. उसने कई बार बच्चे को नुकीली कंघी मारी, उसके रोने पर भी उसे भूखा रखा. हद तो तब हो गई जब वह बच्चे का खाना खुद खा लेती थी. इस घटना से आहत माता-पिता ने तुरंत रजनी चौधरी के खिलाफ थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई थी.

जज बोलीं- ये अपराध सहानुभूति लायक नहीं

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अर्चना नायडू ने अपने आदेश में कहा, ” आज के समय में, सभी तबकों की कामकाजी महिलाएं अपने बच्चों की देखभाल के लिए केयर टेकर्स पर निर्भर हैं. यह रिश्ता भरोसे पर बना है और इस तरह की क्रूरता न केवल एक परिवार के लिए बल्कि पूरे समाज के उस भरोसे को तोड़ती है. एक लाचार बच्चे को दिया गया शारीरिक और मानसिक दर्द एक डरावना अनुभव है, जो उसके दिमाग पर जिंदगी भर के लिए छाप छोड़ सकता है. यह अपराध किसी भी सहानुभूति के लायक नहीं है.” इस टिप्पणी के बाद कोर्ट ने घरेलू हेल्पर को तीन साल की सज़ा सुनाई.

न्यायालय ने प्रकरण की सुनवाई के दौरान पेश किए गए साक्ष्य व गवाहों के आधार पर आरोपी महिला को धारा 323 और जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के सेक्शन 75 के तहत दोषी ठहराते हुए तीन-तीन साल की सजा से दंडित किया.

ये वारदात एक मिडिल-क्लास घर में बंद दरवाजों के पीछे हो रही क्रूरता की उस तस्वीर को दिखाता है, जहां माता-पिता नौकरी में होकर अपने बच्चों को देखभाल के लिए उन लोगों के भरोसे छोड़ देते हैं, जो बाद में हैवानिय पर उतर जाते हैं.

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