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देवघर में मकर संक्रांति पर उमड़ी भक्तों की भीड़, बाबा बैद्यनाथ धाम में विशेष भोग और पूजा का आयोजन

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देवघर: मकर संक्रांति का पावन पर्व पूरे देशभर में हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है. सूर्यदेव के धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते ही सनातन परंपरा में शुभ कार्यों की शुरुआत मानी जाती है. इसी शुभ घड़ी के साक्षी बनने के लिए शिवनगरी देवघर में श्रद्धालुओं की आवाजाही तेज हो गई है.

बाबा धाम में उमड़ी भक्तों की भीड़

धार्मिक नगरी देवघर में मकर संक्रांति का विशेष महत्व है. ज्योतिर्लिंग बाबा बैद्यनाथ धाम में इस पर्व को लेकर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है. मान्यता है कि सूर्य के उत्तरायण होने के साथ ही विवाह, जनेऊ, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्यों के लिए श्रेष्ठ मुहूर्त शुरू हो जाता है.

धनु राशि से मकर राशि में सूर्य का प्रवेश

धार्मिक जानकारों के अनुसार, 14 जनवरी की रात 9 बजे के बाद सूर्य का प्रवेश धनु राशि से मकर राशि में होगा, जिसके साथ ही मकर संक्रांति का पुण्यकाल शुरू हो जाएगा. बैद्यनाथ धाम के वरिष्ठ पंडा बताते हैं कि हिंदू पंचांग के अनुसार, 14 जनवरी की रात 9: 35 के बाद सूर्य उत्तरायण की दिशा में अग्रसर होंगे, जिसे अत्यंत शुभ माना जाता है.

सूर्य आराधना एवं प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का उत्सव

मंदिर के वरिष्ठ पंडा दुर्लभ मिश्रा के अनुसार, मकर संक्रांति केवल पर्व नहीं बल्कि सूर्य आराधना और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का उत्सव है. देश के विभिन्न हिस्सों में इसे अलग-अलग रूपों में मनाया जाता है. दक्षिण भारत में यही पर्व ‘पोंगल’ के रूप में मनाया जाता है जबकि हिंदी भाषी क्षेत्रों में मकर संक्रांति पर दही-चूड़ा, तिल और खिचड़ी की विशेष परंपरा है.

बाबा बैद्यनाथ को खिचड़ी और तिल के लड्डू का विशेष भोग

उन्होंने बताया कि मकर संक्रांति के दिन बाबा बैद्यनाथ पर खिचड़ी और तिल के लड्डू का विशेष भोग अर्पित किया जाएगा, जो पूरे एक महीने तक जारी रहेगा. इसके साथ ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के बीच खिचड़ी और तिल का प्रसाद भी वितरित किया जाएगा.

मकर संक्रांति का उत्साह

पंडा समाज की ओर से बताया गया है कि वाराणसी पंचांग के अनुसार, देश के अधिकांश हिस्सों में 15 जनवरी को मकर संक्रांति मनाई जाएगी जबकि बंगाली पंचांग के अनुसार, कुछ स्थानों पर यह पर्व 14 जनवरी को भी मनाया जा रहा है. देवघर और आसपास के क्षेत्रों में 15 जनवरी को गंगा स्नान, दान-दक्षिणा और ब्राह्मण भोज के साथ मकर संक्रांति का विधिवत आयोजन किया जाएगा.

उल्लास में डूबे शिव भक्त

वहीं दही चूड़ा खाने की तिथि 14 जनवरी से ही शुरू हो जाएगी क्योंकि रात्रि में शुभ मुहूर्त आने के कारण पंचांग के अनुसार, छह घंटे पहले और रात्रि के बाद दोनों को ही अच्छा मुहूर्त माना जाएगा. इस प्रकार उत्तरायण की पुण्य बेला में बाबा बैद्यनाथ की नगरी देवघर एक बार फिर शिवभक्ति, सूर्य उपासना और सनातन संस्कृति की दिव्य छटा से सराबोर नजर आ रहा है.

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