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स्कूल जाने वाली बेटियों के लिए पीरियड्स अब पढ़ाई में नहीं बनेंगे बाधा, झारखंड में शुरू हुई बड़ी पहल

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धनबाद / रांची (झारखंड): स्कूल जाने वाली किशोरियों के लिए माहवारी (पीरियड्स) अब उनकी नियमित पढ़ाई और सपनों में बाधा नहीं बनेगी। माहवारी के दौरान छात्राओं को सैनिटरी पैड के लिए परेशान न होना पड़े, विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं के अभाव में घंटों झिझक व संकोच का सामना न करना पड़े तथा उपयोग किए गए नैपकिन के सुरक्षित निपटान की आधुनिक व्यवस्था हो—इन तमाम बुनियादी आवश्यकताओं को लेकर झारखंड के सभी सरकारी व सहायता प्राप्त विद्यालयों में व्यवस्था को सुदृढ़ करने की व्यापक कवायद शुरू हो गई है।

⚖️ सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के अनुपालन में झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद ने जारी किए सख्त निर्देश

सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) द्वारा डॉ. जया ठाकुर बनाम भारत सरकार एवं अन्य मामले में दिए गए ऐतिहासिक दिशा-निर्देशों के अनुपालन में झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद (JEPC) ने राज्य के सभी जिलों के शिक्षा पदाधिकारियों को विस्तृत गाइडलाइन जारी कर दी है।

जारी निर्देश में केवल सैनिटरी पैड उपलब्ध कराने तक ही बात सीमित नहीं है, बल्कि छात्राओं के लिए पूरी तरह क्रियाशील व सुरक्षित पृथक शौचालय, नियमित पानी, साबुन व हाथ धोने की सुविधा, डस्टबिन, MHM Lab या MHM Corner, पैड के वैज्ञानिक निपटान हेतु इंसीनरेटर मशीन (Incinerator), सीलबंद शिकायत पेटी और बाल सुरक्षा तंत्र को अनिवार्य रूप से स्थापित करने का आदेश दिया गया है।

💬 समाज में संकोच और जमीनी चुनौतियां: बुनियादी सुविधाओं के अभाव से छूटती थी पढ़ाई

माहवारी एक स्वाभाविक और सामान्य जैविक प्रक्रिया है, किंतु आज भी समाज के एक बड़े वर्ग में इसे लेकर झिझक, वर्जना और संकोच का माहौल बना हुआ है।

स्कूल जाने वाली छात्राओं के लिए कई बार यह स्थिति अत्यधिक कष्टकारी बन जाती है, जब आपात स्थिति में स्कूल में पैड नहीं मिलता, शौचालयों में गंदगी या ताले लगे होते हैं, पानी की आपूर्ति ठप रहती है और उपयोग किए गए पैड को फेंकने का कोई सुरक्षित प्रबंध नहीं होता। इन गंभीर अभावों के चलते कई छात्राएं हर माह कई दिनों तक स्कूल से अनुपस्थित रहने को विवश हो जाती थीं, जिसका सीधा प्रतिकूल प्रभाव उनकी शिक्षा पर पड़ता था।

📜 संविधान के अनुच्छेद 21 और 21A से जुड़ा फैसला, गरिमा व समानता का माना हिस्सा

सर्वोच्च न्यायालय ने अपने ऐतिहासिक फैसले में माहवारी स्वास्थ्य प्रबंधन (Menstrual Health) को संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत गरिमा का अधिकार) और अनुच्छेद 21A (शिक्षा का अधिकार) का अभिन्न हिस्सा माना है।

अदालत ने इसे लैंगिक समानता और मूल अधिकारों से जोड़ते हुए सभी राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों को निर्देशित किया कि कक्षा 6 से 12 तक की सभी छात्राओं के लिए विद्यालयों में कार्यशील पृथक शौचालय, स्वच्छ जल और सैनिटरी पैड्स की सतत उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, ताकि किसी भी बालिका को केवल जैविक कारणों से शिक्षा से वंचित न होना पड़े।

🚪 कागजी नहीं, वास्तव में उपयोगी और सुरक्षित होने चाहिए छात्राओं के शौचालय

शिक्षा परियोजना परिषद के निर्देशों के अनुसार, विद्यालयों में बालक और बालिकाओं के लिए पृथक-पृथक शौचालय केवल कागजों पर दर्ज नहीं होने चाहिए, बल्कि वे भौतिक रूप से पूरी तरह उपयोगी होने चाहिए।

शौचालयों के दरवाजे, कुंडी और वेंटिलेशन दुरुस्त होने चाहिए ताकि छात्राओं की व्यक्तिगत निजता (Privacy) पूरी तरह सुरक्षित रहे। इसके साथ ही रनिंग वाटर (नल से जल), हैंडवॉश सोप और बंद ढक्कन वाले डस्टबिन की उपलब्धता अनिवार्य की गई है। निरीक्षण टीमों को विशेष रूप से यह जांचने के निर्देश दिए गए हैं कि क्या शौचालय वास्तव में इस्तेमाल के योग्य हैं या केवल औपचारिक बने हुए हैं।

♿ विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (CWSN) के लिए सुगम पहुंच का विशेष प्रावधान

जारी दिशा-निर्देशों में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (CWSN – Children with Special Needs) का भी विशेष ध्यान रखा गया है।

दिव्यांग व विशेष आवश्यकता वाली बालिकाओं के लिए बनाए गए शौचालयों में व्हीलचेयर फ्रेंडली रैंप, सपोर्ट ग्रैब बार और उनकी आसान पहुंच सुनिश्चित करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं, जिससे समावेशी शिक्षा की अवधारणा को धरातल पर उतारा जा सके।

🧪 स्कूलों में विकसित होंगे MHM Lab और Corner, छात्राओं को दी जाएगी वैज्ञानिक जानकारी

शिक्षा विभाग ने स्कूलों में मेन्स्ट्रुअल हाइजीन मैनेजमेंट (MHM Lab / MHM Corner) स्थापित करने का निर्देश दिया है।

इस विशेष कॉर्नर में आपातकालीन उपयोग के लिए सैनिटरी नैपकिन का सुरक्षित स्टॉक रखा जाएगा। साथ ही, यहां प्रशिक्षित नोडल शिक्षिकाओं के माध्यम से छात्राओं को माहवारी स्वच्छता, पैड बदलने के सही समय अंतराल, व्यक्तिगत साफ-सफाई और स्वास्थ्य संबंधी किसी भी परेशानी की स्थिति में परामर्श लेने से जुड़ी वैज्ञानिक जानकारियां प्रदान की जाएंगी।

🔥 इस्तेमाल किए गए पैड के सुरक्षित निपटान के लिए लगाए जाएंगे मैनुअल इंसीनरेटर

माहवारी स्वच्छता का एक अत्यंत संवेदनशील पहलू इस्तेमाल किए गए पैड्स का सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल निपटान है।

पुराने पैड्स को खुले में फेंकने से संक्रमण, दुर्गंध और पर्यावरणीय प्रदूषण का खतरा रहता है। इससे निपटने के लिए शिक्षा परियोजना ने सभी माध्यमिक व उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में मैनुअल इंसीनरेटर (पैड भस्मीकरण मशीन) स्थापित करने का निर्देश दिया है, जिससे इस्तेमाल किए गए नैपकिन को धुएं और संक्रमण रहित तरीके से तुरंत नष्ट किया जा सके।

📮 शिकायत पेटी और चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 का अंकन अनिवार्य, बाल सुरक्षा पर कड़ा पहरा

छात्राओं की सुरक्षा और उनके संकोच को दूर करने के लिए प्रत्येक विद्यालय परिसर में एक सुरक्षित व सीलबंद ‘शिकायत पेटी’ (Complaint Box) लगाई जाएगी।

इसके माध्यम से छात्राएं बिना किसी डर या झिझक के स्वच्छता, सुरक्षा, पैड की अनुपलब्धता अथवा किसी भी प्रकार के उत्पीड़न से जुड़ी अपनी शिकायतें दर्ज करा सकेंगी। इसके अतिरिक्त, स्कूल की मुख्य दीवारों पर चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 (Child Helpline 1098) को बड़े व स्पष्ट अक्षरों में अनिवार्य रूप से पेंट कराने का निर्देश दिया गया है, ताकि आपात स्थिति में बच्चे तत्काल प्रशासनिक सहायता प्राप्त कर सकें।

📋 जिला और प्रखंड स्तर पर बनेगी अनुश्रवण समिति, कैलेंडर बनाकर होगी नियमित निगरानी

इन सभी कल्याणकारी व्यवस्थाओं के जमीनी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) और जिला शिक्षा अधीक्षक (DSE) के नेतृत्व में जिला व प्रखंड स्तरीय सघन अनुश्रवण समितियां (Monitoring Committees) गठित की जा रही हैं।

विद्यालय अनुश्रवण कैलेंडर तैयार कर अधिकारियों द्वारा औचक निरीक्षण किए जाएंगे और जो विद्यालय मानकों का उल्लंघन करेंगे या जहां व्यवस्थाएं ठप मिलेंगी, वहां ‘शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009’ के तहत संबंधित जिम्मेदार पदाधिकारियों पर जवाबदेही तय कर सुधारात्मक व वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

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