Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
बालाघाट में घर में घुसकर सो रही महिला को उठा ले गया बाघ: कान्हा बफर जोन में दिल नहला देने वाला हादसा... पन्ना में दर्दनाक हादसा: 9 माह की गर्भवती महिला और अजन्मे बच्चे की मौत, एनीमिया बनी वजह; पति पर लापर... इंदौर ने नम आंखों से दी वीर सपूत को अंतिम विदाई, मेजर हमजा आरिफ सैन्य सम्मान के साथ सुपुर्द-ए-खाक ग्वालियर में गुमशुदा तोते 'शकुंतला' के लिए 50 हजार का इनाम: ढोल-लाउडस्पीकर से तलाश में जुटा ओझा परिव... इंदौर में महज 7 दिन में टूटा शादी का बंधन, फैमिली कोर्ट ने तलाक की अर्जी को दी मंजूरी रतलाम में एग्रीमेंट वाली शादी का खौफनाक अंत: 3rd फ्लोर से रस्सी के सहारे भाग रही थी 23 साल की दुल्हन... छतरपुर में हॉस्टल की बड़ी लापरवाही! छत फांदकर एक साथ भागे 3 छात्र; मचा हड़कंप, परिजनों के उड़े होश गोरखपुर में दिल दहला देने वाली घटना, बहन से छेड़छाड़ का विरोध करने पर 9 वर्षीय मासूम की पीट-पीटकर हत... Vपप्पू यादव की प्रेस कॉन्फ्रेंस में हंगामा: चाकू लेकर पहुंचा युवक, समर्थकों ने दबोचा; सांसद बोले— 'म... Solar Eclipse 2027: 75 साल बाद सऊदी अरब में दिखेगा पूर्ण सूर्य ग्रहण, 21वीं सदी की सबसे बड़ी खगोलीय ...

कहीं खिचड़ी-पतंग, कहीं दूध का उफान: जानें उत्तर से दक्षिण तक कैसे अलग है संक्रांति और पोंगल

26

दक्षिण भारत में हर साल जनवरी के दूसरे सप्ताह में पोंगल का पर्व बहुत उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है. वर्ष 2026 में पोंगल 14 जनवरी से 17 जनवरी तक रहेगा. यह पर्व मुख्य रूप से तमिलनाडु में मनाया जाता है और इसका सीधा संबंध कृषि और सूर्य देव की उपासना से होता है.

पोंगल को फसल उत्सव भी कहा जाता है, जिसमें किसान अच्छी फसल के लिए ईश्वर और प्रकृति का धन्यवाद करते हैं. इस अवसर पर नई फसल की कटाई होती है और घरों में पारंपरिक व्यंजन बनाए जाते हैं. पोंगल मकर संक्रांति के आसपास आता है, लेकिन इसकी परंपराएं और आयोजन अलग होते हैं. स्थानीय रीति रिवाजों के अनुसार यह पर्व चार दिनों तक मनाया जाता है.

पोंगल का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व

पोंगल का मुख्य उद्देश्य सूर्य देव को धन्यवाद देना और कृषि में हुई सफलता का जश्न मनाना है. इस दौरान विशेष पकवान जैसे सक्कराई पोंगल और वेन पोंगल तैयार किए जाते हैं, जो चावल, दाल और गुड़ से बनाए जाते हैं. धर्मग्रंथों और स्थानीय परंपराओं में सूर्य देव को जीवनदायिनी ऊर्जा का प्रतीक माना गया है.

पोंगल केवल धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि सामूहिक जीवन और सामाजिक मेलजोल का भी पर्व है. परिवार, दोस्त और पड़ोसी एक साथ मिलकर भोग बनाते हैं और खेतों में फसल की सुरक्षा और समृद्धि के लिए प्रार्थना करते हैं. यही कारण है कि पोंगल का त्योहार न केवल आस्था, बल्कि सांस्कृतिक पहचान भी है.

पोंगल और मकर संक्रांति में अंतर

पोंगल और मकर संक्रांति दोनों पर्व जनवरी महीने में आते हैं और सूर्य देव की उपासना से जुड़े होते हैं, लेकिन दोनों का स्वरूप और महत्व अलग है. मकर संक्रांति सूर्य देव के मकर राशि में प्रवेश और उत्तरायण की शुरुआत का पर्व है, जिसे पूरे भारत में अलग अलग नामों और परंपराओं के साथ मनाया जाता है.

इस दिन तिल, गुड़ और खिचड़ी का दान विशेष माना जाता है. वहीं पोंगल मुख्य रूप से तमिलनाडु का कृषि पर्व है, जो चार दिनों तक मनाया जाता है. पोंगल में नई फसल, नए चावल, गाय और बैलों की पूजा का विशेष महत्व होता है. इस प्रकार मकर संक्रांति खगोलीय परिवर्तन का पर्व है, जबकि पोंगल कृषि और श्रम से जुड़ा उत्सव माना जाता है.

पोंगल के दिन की गतिविधियां और संदेश

पोंगल का पर्व कुल चार दिनों तक मनाया जाता है. पहले दिन भोग पोंगल होता है, जिसमें सूर्य देव को भोग अर्पित किया जाता है और पुराने सामान हटाकर घर की साफ सफाई की जाती है. दूसरे दिन मट्टू पोंगल मनाया जाता है, इस दिन गाय और बैलों को सजाया जाता है और उनका सम्मान किया जाता है, क्योंकि वे खेती में सहायक होते हैं.

तीसरे दिन कन्नी पोंगल होता है, जिसमें युवा और बच्चे खेल, नृत्य और सांस्कृतिक गतिविधियों में भाग लेते हैं. चौथे दिन थाई पोंगल मनाया जाता है, जब परिवार और रिश्तेदार एक साथ मिलते हैं. इस तरह पोंगल मेहनत, आदर भाव और आपसी प्रेम का संदेश देता है.

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.