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बाबर को ‘भारत की खोज’ वाला बताने पर घमासान, सवालों के घेरे में भोपाल लिटरेचर फेस्टिवल

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भोपाल: भोपाल के बहुकला केंद्र भारत भवन में चल रहे तीन दिवसीय भोपाल लिटरेचर फेस्टिवल (बीएलएफ) में मुगलों का महिलामंडन करने को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया. इस आयोजन में मुगल शासक बाबर को लेकर ‘भारत की खोज’ जैसे विमर्श को प्रमुखता दिए जाने पर सवाल उठ रहे हैं. श्रीराम जन्मभूमि को ध्वस्त कराने वाले बाबर की भूमिका पर मध्य प्रदेश सरकार के संस्कृति विभाग के अधीन भवन में चर्चा को लेकर न सिर्फ सांस्कृतिक मूल्यों, बल्कि भारत भवन के नियमों और सरकारी भूमिका पर भी गंभीर प्रश्न चिह्न लग गए हैं.

बाबर विमर्श पर सवाल, बाद में रद्द किया सत्र
भारत भवन में प्रस्तावित साहित्य उत्सव में बाबर को ‘भारत की खोज’ बताने वाला विमर्श सबसे बड़ा विवाद बन गया है. आरोप है कि जिस बाबर ने अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि को ध्वस्त कराया, उसकी भूमिका को नए नजरिये से प्रस्तुत करने की कोशिश पर सांस्कृतिक संगठनों ने आपत्ति जताई है. सवाल यह उठ रहा है कि क्या एक आक्रांता को बौद्धिक मंच देकर उसे महान सिद्ध करने का प्रयास भारतीय सांस्कृतिक चेतना के खिलाफ नहीं है. हालांकि सोशल मीडिया में लोगों के द्वारा इस मामले में सवाल उठाए जाने के बाद आयोजकों ने ‘बाबर द क्वेस्ट’ का सत्र रद्द कर दिया था.

भारत भवन के नियमों की अनदेखी
भारत भवन के लिखित संविधान के अनुसार, यह केंद्र किसी भी गैर-सरकारी संस्था या व्यक्ति को आयोजन के लिए नहीं दिया जा सकता. इसके बावजूद भोपाल लिटरेचर फेस्टिवल के लिए नियमों को दरकिनार किया गया. आरोप है कि, न्यास के कई सदस्यों को न तो आयोजन की शर्तों की जानकारी है और न ही विषय वस्तु पर कोई चर्चा हुई. यह स्थिति भारत भवन की स्वायत्तता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करती है.

पहले भी भोपाल लिटरेचर फेस्ट में हो चुका विवाद
भोपाल लिटरेचर फेस्टिवल पहले भी विवादों में रहा है. कुछ वर्ष पूर्व एलजीबीटीक्यू विषयक पुस्तक ‘आई एम गे, आई एम ओरिन’ पर चर्चा को लेकर तत्कालीन मंत्री उषा ठाकुर ने कड़ी आपत्ति जताई थी. उस यह मामला तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान तक भी पहुंचा था. अब एक बार फिर बाबर जैसे संवेदनशील विषय को मंच पर लाकर आयोजक विवादास्पद विमर्श को हवा देते नजर आ रहे हैं.

सरकारी सहयोग से बढ़ा विवाद
इस आयोजन में मध्य प्रदेश सरकार का आधिकारिक लोगो उपयोग में लिया जा रहा है, जिससे विवाद और गहरा गया है. मध्य प्रदेश टूरिज्म, साहित्य अकादमी, जनजातीय कार्य मंत्रालय सहित कई सार्वजनिक उपक्रम और निजी संस्थान सहयोगी हैं. आमंत्रण पत्र पर पूर्व आईएएस राघव चंद्रा के साथ एसीएस संस्कृति शिव शेखर शुक्ल का नाम होना भी सवालों के घेरे में है. वहीं, इस कार्यक्रम को लेकर न्यास की अनुमति को लेकर भी स्थिति अस्पष्ट बनी हुई है.

साहित्य अकादमी ने भी उठाए सवाल
मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी के डायरेक्टर डॉ. विकास दबे ने कहा कि, ”साहित्य के नाम पर इतिहास को विकृत करने की प्रवृत्ति चिंताजनक है.” उन्होंने स्पष्ट किया कि, ”भोपाल लिटरेचर फेस्टिवल से मध्य प्रदेश की साहित्य अकादमी का कोई संबंध नहीं है, बल्कि इसमें केंद्र की साहित्य अकादमी सह-आयोजक है.” डॉ. दबे ने सवाल उठाया कि, ”भारत की खोज जैसे विषयों को मुगलों से जोड़कर प्रस्तुत करने की जिद क्यों की जाती है. यदि आयोजन का उद्देश्य सार्थक विमर्श है, तो विवादरहित और सकारात्मक विषय चुने जाने चाहिए, ताकि अधिक साहित्यकार सहभागी बन सकें.”

‘बाबर द क्वेस्ट’ के लेखक ने स्पष्ट किया मत
भोपाल लिटरेचर फेस्टिवल में लेखक आभास मालधियार ने स्पष्ट किया कि उनकी पुस्तक ‘बाबर द क्वेस्ट’ को गलत अर्थों में लिया गया है. उन्होंने कहा कि ‘क्वेस्ट’ शब्द का मतलब ‘चाहत’ या ‘डिज़ायर’ है, न कि कोई महिमामंडन. पुस्तक में बाबर के ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर उसके भारत-विरोधी दृष्टिकोण, लगातार आक्रमण और भारत के इस्लामीकरण की मंशा को ही रेखांकित किया गया है. आभास के अनुसार, बिना पुस्तक पढ़े बनाई गई राय ही विवाद का कारण बनी. वे हर तथ्यात्मक आलोचना के लिए तैयार हैं, लेकिन मनगढ़ंत आरोपों से असहमति जताते हैं.”

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