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नोएडा से नेपाल तक ‘ऑपरेशन क्लीनअप’: 8 करोड़ के 821 मोबाइलों के साथ महाठग गैंग गिरफ्तार, बिहार-झारखंड में फैला था जाल

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नोएडा पुलिस ने मोबाइल चोरी के एक बड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए बड़ी कामयाबी हासिल की है. दिल्ली-NCR के भीड़भाड़ वाले इलाकों में मोबाइल चोरी कर बिहार, झारखंड और नेपाल तक बेचने वाले गिरोह के 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें दो नाबालिग भी शामिल हैं. पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से कुल 821 महंगे मोबाइल फोन बरामद किए हैं, जिनकी अनुमानित कीमत करीब 6 से 8 करोड़ रुपए बताई जा रही है.

पुलिस जांच में सामने आया कि यह गिरोह खासतौर पर मेट्रो स्टेशन, बस स्टैंड, साप्ताहिक बाजार, रेलवे स्टेशन और मेलों जैसे भीड़भाड़ वाले इलाकों को अपना टारगेट बनाता था. आरोपी बेहद शातिर तरीके से लोगों की जेब और बैग से मोबाइल निकाल लेते थे. चोरी के बाद कुछ ही घंटों में ये मोबाइल इधर से उधर कर देते थे. सबसे खास बात यह है कि यह हर तीन महीने में दिल्ली-NCR में अलग-अलग जगह पर अपना ठिकाना बनाकर वहा किराए के मकान में रहकर मोबाइलों को चोरी करके इकट्ठा करते थे और फिर तीन महीने के बाद वापस अपने घरों पर लौट जाते थे, ताकि पुलिस तक कोई सुराग न पहुंचे.

2-3 महीने NCR में सक्रिय, फिर बिहार-झारखंड वापसी

DCP सेंट्रल नोएडा शक्ति अवस्थी ने बताया कि यह गिरोह झारखंड और बिहार से 2 से 3 महीने के लिए दिल्ली-NCR आता था. इस दौरान बड़ी संख्या में मोबाइल चोरी कर एक साथ ट्रेन के जरिए बिहार और झारखंड ले जाया जाता था. वहां से चोरी के मोबाइल नेपाल भेजे जाते थे, जहां इन्हें बेहद सस्ते दामों पर खपाया जाता था. पुलिस के अनुसार, गिरोह में हर सदस्य की अलग-अलग भूमिका थी. कुछ आरोपी भीड़ में मोबाइल चोरी करते थे. कुछ चोरी के मोबाइल इकट्ठा करने और छिपाने का काम करते थे. वहीं इस गैंग में शामिल दो नाबालिग संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखते थे और पुलिस दिखने पर इशारा करते थे. गैंग के बड़े आरोपी चोरी के मोबाइल को ट्रेन के जरिए बाहर भेजने की जिम्मेदारी संभालते थे.

DCP ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों की पहचान बिहार और झारखंड के अलग-अलग जिलों के रहने वालों के रूप में हुई है. इनमें साहिबगंज झारखंड, भागलपुर और मधुबनी बिहार के निवासी शामिल हैं. नाबालिग आरोपी भी इन्हीं राज्यों से संबंध रखते हैं. पुलिस ने सभी आरोपियों का आपराधिक रिकॉर्ड खंगालना शुरू कर दिया है.

821 मोबाइल बरामद, असली मालिकों की तलाश

पुलिस के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती बरामद किए गए 821 मोबाइल फोन को उनके असली मालिकों तक पहुंचाना है. इसके लिए IMEI नंबर के जरिए डाटा खंगाला जा रहा है और अलग-अलग थानों में दर्ज मोबाइल चोरी की शिकायतों से मिलान किया जा रहा है. DCP शक्ति अवस्थी ने बताया कि पूछताछ में कई अहम जानकारियां सामने आई हैं और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश जारी है. पुलिस को आशंका है कि मोबाइल चोरी का यह नेटवर्क और भी बड़ा हो सकता है.

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