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बस्तर में घूम रहा विशाल जंगली जानवर, खेतों में मौजूदगी के निशान, मौके पर वन विभाग

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बस्तर: घने जंगलों से भरपूर छत्तीसगढ़ के बस्तर में अब बड़े जंगली जानवर जंगलों से निकलकर शहरी और ग्रामीण इलाकों का रुख कर रहे हैं. कहीं मवेशियों का शिकार कर रहे हैं तो कहीं जानवर के पैरों के चिन्ह बड़ी संख्या में नजर आ रहे हैं. जानवर के चिन्हों को देखकर वन विभाग की टीम जांच और तलाश में जुटी हुई है.

खेतों में मिले जंगली जानवर के पद चिन्ह

बस्तर के घने जंगल और जलवायु जंगली जानवर के सहवास के लिए काफी अनुकूल हैं. इस कारण बस्तर संभाग में 2 नेशनल पार्क बनाये गए हैं. जिनका नाम कांगेर वेल्ली नेशनल पार्क और इंद्रावती नेशनल पार्क है. यहां बाघ, तेंदुआ काफी संख्या में है. जिन इलाकों में बड़े जंगली जानवर के चिन्ह पाए गए हैं, उन इलाकों के ग्रामीणों में दहशत का माहौल बना हुआ है.

गन्ने के खेत के लिए तैयार गीली मिट्टी में मिले पदचिन्ह

बस्तर जिले के तोकापाल ब्लॉक के ग्राम पंचायत सोसनपाल( कानाकुरुषपाल) में जंगली जानवर के पैर के निशान देखें गए हैं. ईटीवी भारत की टीम मौके पर पहुंची. खेतों में बने जानवरों के पंजों के निशान देखे. वहां मौजूद ग्रामीणों से बात की. ग्रामीणों ने बताया कि साल के सबसे बड़े दियारी का त्यौहार 30 दिसंबर को मनाया गया. इसी दिन सुबह के समय गन्ने के खेतों में किसानों ने सिंचाई किया था. जिसके कारण खेत की मिट्टी गीली थी. इसी रात विशाल जंगली जानवर खेतों में घुसा, जिसके पैरों के निशान अगले दिन 31 दिसंबर को ग्रामीणों ने खेतों में देखा.

ग्रामीणों में दहशत

शुरुआत में ग्रामीणों को समझ नहीं आया कि यह निशान किसके हैं. लेकिन 2 दिन बाद इसकी जानकारी वन विभाग को दी गई. जानकारी मिलते ही टीम रातों रात मौके पर पहुंची. जानवर के पदचिन्ह की तस्वीरें ली और अगली सुबह से खेतों में तलाशी शुरू की गई. ग्रामीणों ने बताया कि वन विभाग की टीम ने पदचिन्ह देखकर बताया कि जंगली जानवर 7 साल का होगा और 6 से 7 फीट उसकी ऊंचाई हो सकती है.

वन विभाग ने की बाघ की पुष्टि

भानपुरी SDO इंद्रप्रसाद बंजारे ने पदचिन्ह देखने के बाद बाघ की पुष्टि की है. SDO ने बताया कि जामगांव इलाके में बीते दिनों 8 मवेशियों का शिकार हुआ था. लेकिन उस इलाके में ऐसी कोई घटना दोबारा नहीं हुई. फिलहाल जानवर के पद चिन्ह तोकापाल इलाके में देखें गए हैं. जानवर निश्चय आगे बढ़ गया होगा.

टाइगर के विचरण पर बस्तर सीसीएफ का बयान

बस्तर के जंगल में बाघ की मौजूदगी पर बस्तर सीसीएफ आलोक तिवारी ने अहम जानकारी दी है. उन्होंने कहा है कि यह टाइघर उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व इलाके से विचरण करते हुए कोंडागांव इलाके से बस्तर जिले में प्रवेश किया है. इसके फुट प्रिंट के अनुसार यह मेल टाइगर है. छत्तीसगढ़ में किये गए सर्वे के अनुसार छत्तीसगढ़ में टाइगर की संख्या 35 है. यह उनमें से ही एक है. जहां जहां इस टाइगर के निशान पाए जा रहे हैं. उन इलाकों में मुनादी कराई जा रही है. लोगों को अलर्ट किया जा रहा है कि वह जंगल की ओर न जाएं.

लोगों से अपील है कि अगर उन्हें बाघ दिखे तो उसे सीधे जाने का रास्ता दें. वह भटककर कभी भी भीड़ में नहीं जाएगा,क्योंकि बाघ स्वस्थ है.यदि कोई घायल बाघ होता तो ऐसी स्थिति निर्मित होती है और वह आबादी के नजदीक जाने की कोशिश करता है.वन विभाग की निगाह पूरी तरह से बाघ पर बनी हुई है- आलोक तिवारी, सीसीएफ, बस्तर

बस्तर सीसीएफ ने बताया कि लोगों को मुनादी के जरिए इस बाघ को लेकर अलर्ट किया जा रहा है. अगर यह बाघ किसी मवेशी को नुकसान पहुंचाता है तो शासन के नियमानुसार मुआवजा राशि तत्काल जारी किया जाएगा.

जामगांव में बाघ ने मवेशियों का किया शिकार

बता दें कि सप्ताहभर पूर्व भानपुरी इलाके में ग्राम पंचायत जामगांव में जंगली जानवर ने मवेशियों का शिकार किया था. जिसकी जानकारी वन विभाग को मिली थी. वन विभाग ने मौके पर जानवर के चिन्ह देखें थे, जहां ऐसे ही चिन्ह मिले थे. इस लिहाज से वन विभाग की टीम सर्च ऑपरेशन चला रही है.

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