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गिग वर्कर्स के लिए ‘अच्छे दिन’: नए लेबर कोड से मिलेगा न्यूनतम वेतन और ESIC का लाभ, बदलेगी करोड़ों की किस्मत

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नए लेबर कोड में पहली बार गिग वर्क, प्लेटफॉर्म वर्क और एग्रीगेटर को विस्तार से बताया गया है. इसमें कोई संदेह नहीं कि नए लेबर कोड देश के करोड़ों असंगठित कामगारों और गिग वर्कर्स को बेहतर सुविधाएं देने की दिशा में एक बड़ा कदम हैं, जो पहले के कानूनों में शामिल नहीं थीं.

इन कानूनों के तहत अब गिग वर्कर्स को भी मुख्यधारा की सामाजिक सुरक्षा से जोड़ने का प्रावधान किया गया है. उन्हें न केवल न्यूनतम वेतन सुनिश्चित करने की बात कही गई है, बल्कि दुर्घटना बीमा, स्वास्थ्य और अन्य सामाजिक सुरक्षा लाभ भी प्रदान किए जाएंगे. सरकार के इस कदम से गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स सहित लगभग 40 करोड़ असंगठित कामगारों का बड़ा लाभा मिलेगा. नए लेबर कानून में इन वर्कर्स के लिए एक सामाजिक सुरक्षा कोष बनाए जाने का भी प्रावधान है.

नए कानून में वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा लाभ

सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के तहत गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा लाभ मिलेगा. इसके लिए केंद्र सरकार समय-समय पर उपयुक्त सामाजिक सुरक्षा योजनाएं अधिसूचित करेगी, जिनमें शामिल हैं— जीवन और विकलांगता कवर, दुर्घटना बीमा, स्वास्थ्य और मातृत्व लाभ, वृद्धावस्था सुरक्षा, क्रेच की सुविधा और केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित अन्य लाभ के बारे में बताया गया है. नई तकनीक आधारित प्लेटफॉर्म और गिग वर्कर्स को कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) से जुड़ने का अवसर मिलेगा. ईएसआईसी, ईपीएफओ और असंगठित क्षेत्र के कामगारों के लिए आधार से जुड़ा एक यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) दिया जाएगा, जिससे सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ लेना आसान होगा. नए लेबर कोड में इस प्रक्रिया के शामिल होने से कामगारों को बहुत बड़ी राहत मिली है. दरअसल, इससे उनका कुछ पैसा जमा होना शुरू हो जाएगा, जो मुश्किल समय में उनके काम आएगा.

गिग वर्कर्स की प्रतिक्रिया

नए ड्राफ्ट पर गिग वर्कर्स की मिली-जुली प्रतिक्रिया सामने आई है. कुछ वर्कर्स ने सरकार का धन्यवाद किया, जबकि कुछ ने आशंका जताई कि कंपनियां इन प्रावधानों को लागू नहीं करेंगी. कुछ गिग वर्कर्स ने टीवी9 भारतवर्ष को भी धन्यवाद दिया. उनका कहना है कि चैनल ने शुरुआत से उनकी समस्याओं को प्रमुखता से उठाया, जिसका असर अब दिख रहा है. एक गिग वर्कर ने कहा, “हमें न्यूनतम भुगतान मिलना चाहिए. हम दिनभर सड़कों पर खड़े रहते हैं, लेकिन अगर एक भी ऑर्डर नहीं मिलता तो हमें कुछ नहीं मिलता. कम से कम मिनिमम पेमेंट तय होनी चाहिए.” वहीं एक अन्य वर्कर ने कहा, सरकार भले ही ये बातें कह दे, लेकिन हमारी कंपनियां हमें ये सुविधाएं देंगी या नहीं, यह बड़ा सवाल है.

क्या है ‘दस मिनट डिलीवरी’ विवाद

गिग वर्कर्स का कहना है कि ग्रोसरी डिलीवरी के लिए उन्हें केवल दस मिनट का समय दिया जाता है. यदि तय समय में डिलीवरी नहीं होती, तो उनका भुगतान काट लिया जाता है. एक गिग वर्कर ने बताया, “मैं नौ साल से स्विगी के साथ काम कर रहा हूं. कंपनी की इंस्टामार्ट सेवा से ग्रोसरी डिलीवरी होती है, लेकिन दस मिनट में डिलीवरी करना बेहद मुश्किल है. ट्रैफिक, दूरी और अन्य परिस्थितियों में यह समय सीमा कम है. इस पर भी सोचा जाना चाहिए.”

90 दिन काम करने का प्रस्ताव

श्रम मंत्रालय ने ऐप-बेस्ड डिलीवरी पार्टनर, कैब ड्राइवर और फ्रीलांसर जैसे अस्थायी वर्कर्स (गिग वर्कर) को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने के लिए साल भर में कम-से-कम 90 दिन काम करने का प्रस्ताव रखा है. सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के तहत बनाए गए नए मसौदा नियमों में यह प्रस्ताव रखा गया है. यह मसौदा 31 दिसंबर को जारी किया गया है और इस पर हितधारकों से सुझाव मांगे गए हैं. अभी इस मसौदे पर काम ही चल रहा है. सुझाव आने के बाद इसे फाइनल टच दिया जाएगा.

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