Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
बालाघाट में घर में घुसकर सो रही महिला को उठा ले गया बाघ: कान्हा बफर जोन में दिल नहला देने वाला हादसा... पन्ना में दर्दनाक हादसा: 9 माह की गर्भवती महिला और अजन्मे बच्चे की मौत, एनीमिया बनी वजह; पति पर लापर... इंदौर ने नम आंखों से दी वीर सपूत को अंतिम विदाई, मेजर हमजा आरिफ सैन्य सम्मान के साथ सुपुर्द-ए-खाक ग्वालियर में गुमशुदा तोते 'शकुंतला' के लिए 50 हजार का इनाम: ढोल-लाउडस्पीकर से तलाश में जुटा ओझा परिव... इंदौर में महज 7 दिन में टूटा शादी का बंधन, फैमिली कोर्ट ने तलाक की अर्जी को दी मंजूरी रतलाम में एग्रीमेंट वाली शादी का खौफनाक अंत: 3rd फ्लोर से रस्सी के सहारे भाग रही थी 23 साल की दुल्हन... छतरपुर में हॉस्टल की बड़ी लापरवाही! छत फांदकर एक साथ भागे 3 छात्र; मचा हड़कंप, परिजनों के उड़े होश गोरखपुर में दिल दहला देने वाली घटना, बहन से छेड़छाड़ का विरोध करने पर 9 वर्षीय मासूम की पीट-पीटकर हत... Vपप्पू यादव की प्रेस कॉन्फ्रेंस में हंगामा: चाकू लेकर पहुंचा युवक, समर्थकों ने दबोचा; सांसद बोले— 'म... Solar Eclipse 2027: 75 साल बाद सऊदी अरब में दिखेगा पूर्ण सूर्य ग्रहण, 21वीं सदी की सबसे बड़ी खगोलीय ...

DDA ने अरावली रोड प्रोजेक्ट को लेकर किया सुप्रीम कोर्ट का रुख, पेड़ों की कटाई की मांगी इजाजत

29

दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने अरावली रेंज क्षेत्र में सड़क निर्माण के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. DDA ने SC में याचिका दायर कर 473 पेड़ों को काटने या दूसरी जगह स्थानांतरित करने और 2,519 छोटे पौधों को हटाकर अन्य किसी दूसरे स्थान पर लगाने की अनुमति मांगी है.

यह सड़क CAPFIMS (केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल चिकित्सा विज्ञान संस्थान), केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के लिए बने अस्पताल तक पहुंच आसान बनाने के उद्देश्य से प्रस्तावित है. DDA के अनुसार, सड़क निर्माण के लिए मॉर्फोलॉजिकल रिज के 0.79 हेक्टेयर क्षेत्र में काम किया जाएगा, जबकि कुल 2.97 हेक्टेयर वन भूमि के उपयोग की अनुमति मांगी गई है. प्राधिकरण का कहना है कि पहले इस परियोजना के लिए 3.6 हेक्टेयर वन भूमि की जरूरत बताई गई थी, लेकिन पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने के प्रयासों के तहत अब इस आवश्यकता को घटाया गया है.

3.68 हेक्टेयर भूमि पर नए पेड़ लगाए जाएंगे

DDA ने बताया है कि पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति के तौर पर द्वारका के धूलसिरास इलाके में 3.68 हेक्टेयर भूमि पर नए पेड़ लगाए जाएंगे. प्राधिकरण का दावा है कि परियोजना को इस तरह डिजाइन किया गया है ताकि कम से कम वन क्षेत्र प्रभावित हो और हरित आवरण का संतुलन बना रहे.

पुराने निर्देशों को SC ने किया स्थगित

इससे पहले 29 दिसंबर को अरावली पहाड़ियों की परिभाषा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अपने पुराने निर्देशों को स्थगित कर दिया था. कोर्ट ने कहा था कि यह एक संवेदनशील मुद्दा है और इस पर और स्पष्टता की जरूरत है, क्योंकि विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट और कोर्ट की टिप्पणियों की अलग-अलग व्याख्याएं की जा रही हैं.

तीन जजों की बेंच कर रही सुनवाई

इस मामले की सुनवाई CJI सूर्यकांत की अगुवाई वाली तीन जजों की पीठ (जिसमें जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस एजी मसीह भी शामिल हैं) ने की. बेंच ने स्वप्रेरित याचिका ‘अरावली पहाड़ियों और श्रेणियों की परिभाषा एवं संबद्ध मुद्दे’ में नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई 21 जनवरी को तय की है.

सुप्रीम कोर्ट ने आदेश में स्पष्ट किया कि जब तक एक नई उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति का गठन नहीं हो जाता, तब तक पहले की समिति की सिफारिशें और कोर्ट के पुराने निर्देश लागू नहीं होंगे. कोर्ट का मानना है कि किसी भी अंतिम फैसले से पहले वैज्ञानिक, पर्यावरणीय और भू-वैज्ञानिक पहलुओं की समग्र समीक्षा आवश्यक है.

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.