Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Chhattisgarh Road Accident Update: भीषण सड़क हादसे के बाद एनएच पर लगे जाम के हालात, मृतकों की शिनाख्... Ramanujganj Idol Makers News: पुश्तैनी कारोबार से जुड़े मूर्तिकार रंजीत और दीपांकर बोले- लागत निकलना... Bhilai Steel Plant Iron Theft Case: बीएसपी लोहा चोरी मामले में सीबीआई की आधिकारिक एंट्री, दुर्ग-भिला... Korba Murder News: जमीन के बंटवारे के विवाद में भतीजे ने की 85 साल के चाचा की हत्या, मध्य प्रदेश के ... Solid Waste Rules Raipur News: अब चार श्रेणियों में अलग करना होगा कचरा, नियम तोड़ने पर लगेगा पर्यावर... CRPF 205 Cobra Battalion Jawan: बस्तर में नक्सल ऑपरेशन में दे चुके थे सेवाएं, इलाज के दौरान हुआ निधन... Pundag OP Incharge Bravery: पुंदाग थाना प्रभारी संजीव की सूझबूझ से बची युवक की जान, टावर पर चढ़ने से... Jharkhand Road Accident News: एफसीआई गोदाम के पास भारी वाहनों के आवागमन पर रोक की मांग, रातभर मचा रह... Jharkhand Education News: हिंदी साहित्य सम्मेलन मध्यमा प्रमाणपत्र विवाद पर हाईकोर्ट का निर्णय, 8 हफ्... Palamu Road Jam News: झारखंड आंदोलनकारियों ने सड़क पर लेटकर किया प्रदर्शन, पुलिस बल मौके पर मौजूद, ज...

छेरछेरा पर्व की पौराणिक मान्यता, अन्न दान की निभाई जाती है परंपरा, ग्रामीण इलाकों में लगता है बड़ा मेला

29

बेमेतरा : छत्तीसगढ़ में नए साल की शुरुआत के बाद छेरछेरा पर्व आता है.जिसे अलग-अलग जगहों पर कई नामों से जाना जाता है. कहीं ये छेरछेरा पुन्नी पर्व है तो कहीं पौष पूर्णिमा और शाकंभरी जयंती. छेरछेरा का छत्तीसगढ़ के लोकपर्वों में बड़ा स्थान है.लोग इस दिन अन्न दान करके पुण्य कमाते हैं.गांवों में इस त्यौहार की अलग ही रौनक देखने को मिलती है.ग्रामीण इलाकों में बच्चे घरों जा जाकर छेरछेरा मांगते हैं.

किसान अपनी नई उपज का देते है दान

अन्नदान और फसल उत्सव के रूप त्यौहार मनाया जाने वाला छेरछेरा तिहार छत्तीसगढ़ के सामाजिक समरसता, समृद्ध दानशीलता की गौरवशाली परम्परा का पर्व है. इस दिन ‘छेरछेरा, कोठी के धान ल हेरहेरा’ बोलते हुए गांव के बच्चे घरों में जाकर धान चावल भेंट स्वरूप प्राप्त करते है. उपज की बिक्री के प्राप्त पैसे को इकट्ठा करते हैं बेमेतरा जिला के गांवों में यह पर्व परंपरागत तरीके से मनाया जाता है, जहां बच्चों की टोली सुबह से ही झोला और बोरी लटकाए दान लेने पहुंचती है जहां लोग अन्न का दान शगुन स्वरूप करते है. छेरछेरा का दूसरा पहलू आध्यात्मिक भी है, यह बड़े-छोटे के भेदभाव और अहंकार की भावना को समाप्त करता है. फसल के घर आने की खुशी में पौष मास की पूर्णिमा को छेरछेरा पुन्नी तिहार मनाया जाता है.

क्या है छेरछेरा पर्व की पौराणिक मान्यता ?

छेरछेरा पर्व की पौराणिक मान्यता भी है.आज के दिन ही मां शाकंभरी जयंती भी मनाई जाती है. ऐसा माना जाता है कि आज के ही दिन भगवान शंकर ने माता अन्नपूर्णा से भिक्षा मांगी थी, जिसमें माता से अन्न का दान किया था. इसलिए लोग धान के साथ साग-भाजी, फल का दान भी करते हैं. पौष पूर्णिमा धान के लिए प्रसिद्ध है. छत्तीसगढ़ ही नहीं संपूर्ण भारतवर्ष में इस शुभदिन अन्न, दलहन-तिलहन का दान करना बेहद शुभ माना जाता है.

पौष पूर्णिमा को होता है मेला आयोजन
छत्तीसगढ़ प्रदेश लोक सांस्कृतिक परंपरा को मानने वाला प्रदेश है. जहां एक ओर आज अन्न वस्त्र रुपए दान की परम्परा है वहीं दूसरी तरफ आज के ही दिन बेमेतरा जिला के ग्राम ढनढनी में जूनी सरोवर मेला होता है. जहां लोग सुबह से ही जूनी सरोवर में स्नान करने पहुंचे है. माना जाता है कि यहां के सरोवर में स्नान करने से शारीरिक रोग से मुक्ति मिलती है. वहीं जिले के शिवनाथ नदी के तट पर चेटूवापूरी धाम में मेला का आयोजन किया जाता है, जो सतनामी समाज का बड़ा मेला है.

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.