Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Solar Eclipse 2027: 75 साल बाद सऊदी अरब में दिखेगा पूर्ण सूर्य ग्रहण, 21वीं सदी की सबसे बड़ी खगोलीय ... रांची के कांके रोड पर बेकाबू ट्रैक्टर का तांडव: आधा दर्जन बाइक-स्कूटी को रौंदा, एक गंभीर रूप से घायल जौनपुर की शाहजहां बानो बनीं 'प्रतीक्षा': सनातन धर्म अपनाकर बरेली के आश्रम में प्रेमी पवन संग रचाया व... गुरुग्राम के सूरत नगर में MNC कर्मचारी की संदिग्ध हालात में मौत, फंदे से लटकता मिला शव बरेली दहेज हत्या मामले में अदालत का बड़ा फैसला, 5 साल के मासूम की गवाही पर ससुर दोषमुक्त मंदसौर में घर की सीढ़ियों पर बैठा दिखा विशालकाय मगरमच्छ! चीख पड़ी महिला, वन विभाग ने रेस्क्यू कर चंब... बिहार में रेल नेटवर्क का बड़ा विस्तार: 976 करोड़ की लागत से दानापुर-फतुहा के बीच बिछेगी नई रेल लाइन,... देश में मंदिर चढ़ावा चोरी पर सियासत तेज, राज ठाकरे का दावा— "सिद्धिविनायक मंदिर में हर साल 18 करोड़ ... मानसून का रौद्र रूप! यूपी, बिहार समेत 15 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट; दिल्ली में तूफानी हवाओं की... जबलपुर में महिला आरक्षक से पहचान छिपाकर दुष्कर्म और धर्मांतरण का दबाव, एसपी दफ्तर पहुंची पीड़िता

खजुराहो में विदेशियों ने सजाई कछियाई घोड़ी, पैठाई और मुखौटा नृत्य के साथ नए साल के स्वागत में डूबे, देखें तस्वीरें

18

छतरपुर: मध्य प्रदेश का खजुराहो ऐतिहासिक शहर है, जो अपने खास मंदिरों और अनेक पर्यटन स्थल के लिए जाना जाता है. इस ऐतिहासिक शहर में नए साल का जश्न भी जोर-शोर से मनाया जाता है. यहां बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक पहुंचते हैं. वहीं इस बार भी नए साल के जश्न में चार चांद लगाने के लिए पर्यटक तैयार हैं. पर्यटकों को लुभाने के लिए आदिवर्त जनजातीय लोककला एवं राज्य संग्रहालय, कला, संस्कृति और परंपरा का आयोजन किया जा रहा है.

जिसमें मध्य प्रदेश की विभिन्न जनजातियों की लोककला, पारंपरिक वेशभूषा, शिल्पकला व जीवनशैली को दर्शाया जा रहा है, जो पर्यटकों और कला प्रेमियों को विशेष रूप से आकर्षित कर रही है.

जनजातीय कलाकारों ने निकाली रैली

चंदेल नगरी खजुराहो में आदिवर्त जनजातीय लोककला एवं राज्य संग्रहालय में आयोजित तीसरी स्थापना वर्षगांठ समारोह के चौथे दिन सांस्कृतिक उल्लास से सराबोर दिखाई दिया. मंगलवार सुबह से लेकर देर रात तक लोक कला, संगीत, नृत्य और परंपराओं का संगम देखने को मिला. खजुराहो में लोक,कला संस्कृति को जन-जन तक बिखरने के लिए जनजतीय कलाकरों द्वारा कला यात्रा निकाली गई, जो नगर के प्रमुख मार्गों से निकली.

कछियाई नृत्य की हुई शानदार प्रस्तुति

इस यात्रा ने लोगों को लोक संस्कृति से जोड़ने का काम किया. वहीं लोगों ने यात्रा पर फूलों की बारिश की और कलाकारों का उत्साहवर्धन किया. देश के विभिन्न अंचलों से आए कलाकारों ने अपनी अद्भुत प्रस्तुति दी. इस दौरान एक कछियाई नृत्य देखने मिला, जो कुशवाहा समाज ही करता है. इसमें 12-15 पुरुष होते हैं, वे गाना गाते हैं और महिलाएं डांस करती हैं.

पैठाई घोड़ी ने बांध समा

इसके बाद डिंडोरी से आई अंजलि बैगा ने बैगा जनजाति का कृत्य घोड़ी पैठाई किया. बैगा समुदाय दशहरा के दिन से इस घोड़ी पैठाई की शुरुआत करते हैं, जो दिसंबर माह के अंत तक करते हैं. इस नृत्य में एक गांव के पुरुष दूसरे गांव की महिलाओं के साथ डांस करते हैं.

संगी मुखौटा नृत्य रहा आकर्षित का केंद्र

वही खजुराहो आए महाराष्ट्र के छबीलदास ने अपने सजीव संगी मुखौटा नृत्य से दर्शकों को रोमांचित कर दिया. लोकराग की आखिरी प्रस्तुति राजस्थान के सुरम नाच ने कालबेलिया व भवाई नृत्य से दी. इस प्रस्तुति ने दर्शकों का दिल लूट लिया ओर परिसर को झूमने पर मजबूर कर दिया. राजस्थान की समृद्ध लोक परंपरा का प्रतीक कालबेलिया नृत्य आज भी अपनी विशिष्ट पहचान के साथ दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर रहा है.

भारतीय संस्कृति से रूबरू हो रहे पर्यटक

वहीं महाराष्ट से आए कलाकार छबीलदास ने बताया “खजुराहो मंदिरों की नगरी है. यहां देश-विदेश से लोग आते हैं. ऐसे में यहां पर प्रस्तुति देना मेरे लिए शोभाग्य की बात है.”वहीं आदिवर्त जनजातीय संग्रहालय खजुराहो के प्रभारी अशोक मिश्रा ने बताया “3 साल पूरे होने पर 5 दिवसीय आयोजन चल रहा है. आज अंतिम दिन है, नए साल का उत्साह भी पर्यटक में देखा जा रहा है. जनजतीय कला, संस्क्रति को देखने देशी विदेशी पर्यटक रोजाना आते हैं, आज ज्यादा भीड़ होने की संभावना है.”

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.