Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Namo Bharat Train: अब दिल्ली से मेरठ सिर्फ 55 मिनट में, सराय काले खां से मोदीपुरम तक दौड़ने को तैयार... Anant Bhaskar Murder Case: आंध्र प्रदेश के पूर्व MLC अनंत भास्कर पर हत्या का मामला: सुप्रीम कोर्ट ने... सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख: बंगाल में न्यायिक नियुक्तियों पर जारी खींचतान पर SC का बड़ा फैसला, अधिकारिय... बड़ी खबर: क्या बाबरी के नाम पर बन सकती है नई मस्जिद? सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को दिया झटका, सुनव... Greater Noida News: रयान इंटरनेशनल स्कूल में एक घंटे तक बाथरूम में बंद रही मासूम छात्रा, परिजनों ने ... भगवान को लिखा 'जॉब लेटर': छात्र ने मांगी 20 लाख के पैकेज वाली नौकरी, बदले में भगवान को दिया ये अनोखा... चुगली की तो कटेगी जेब! अब इधर-उधर की बातें की तो देना होगा भारी जुर्माना, जानें इस अनोखे फैसले के पी... Bihar Assembly News: 'ब्राह्मण' शब्द पर बिहार विधानसभा में हंगामा, डिप्टी सीएम विजय सिन्हा बोले- "मै... Rahul Gandhi Sultanpur Visit: सुल्तानपुर में फिर मोची रामचेत की दुकान पर रुके राहुल गांधी, बेटी के इ... AAP Attacks Opponents: महिलाओं को 2500 रुपये, प्रदूषण और युवा; आप ने 15 सवालों के जरिए सरकार को घेरा

मां के अंधविश्वास ने बेटे को बना डाला ‘कंकाल’, शरीर से खून पी गए कीड़े, तड़पकर तोड़ा दम

2

अंबाला: वार्ड नंबर 10 के नदी मुहल्ला में पिछले चार साल से कमरे में बंद प्रिंस ने गुरुवार के देर रात दम तोड़ दिया। 22 वर्षीय प्रिंस अंधविश्वास की बेड़ियों में जकड़ा हुआ था। वह चार साल से एक कमरे में जीवित कंकाल बनकर बंद था। हालत ऐसी थी कि उसकी एक-एक हड्डी गिनी जा सकती थी। शरीर में खून खत्म हो चुका था शरीर पर मांस नाममात्र ही बचा था, वह सिर्फ हड्डियों का ढांचा था, बस सांसें ही किसी तरह चल रही थीं।

 मां ने अपने जिगर के टुकड़े को तिल-तिल मरने के लिए छोड़ दिया था। प्रिंस के शरीर पर कोई नया जख्म नहीं था, बल्कि जख्मों ने उसके शरीर को ढांप लिया है। स्वजन जख्मों पर दवा की जगह काला तेल डाल देते थे। चार वर्षों से पड़े शरीर में कीड़े चल रहे थे। बालों में सफेद जूओं का घर था। वह नग्न अवस्था में पड़ा रहता, और शरीर पर सिर्फ एक गंदी रजाई रहती थी।

प्रिंस चार साल पहले बीमार हुआ था। मां-बाप ने डॉक्टर के पास ले जाने के बजाय अंधविश्वास को चुन लिया। मां शोभा ने बेटे को एक कमरे में डाल उसकी दुनिया वहीं खत्म कर दी। पिता सतीश कुमार कपड़ा मार्केट में काम करते है। घर में छह साल की उसकी छोटी बहन है, जबकि बड़ी बहन की शादी हो चुकी है। प्रिंस आवाज सुनता था, लेकिन प्रतिक्रिया देने में असक्षम। शरीर अकड़ चुका था। यह भी सामने आया है कि प्राइवेट नर्स की मदद से प्रिंस के रक्त का सैंपल लेने का प्रयास किया, लेकिन इसके लिए सिरिंज में खून नहीं आया। शुक्रवार को प्रिंस को रेस्क्यू किए जाना था।

वंदे मातरम टीम को जब इसका पता चला तो वह 23 दिसंबर को उसे देखने पहुंची, लेकिन मां ने अंदर जाने से रोक दिया। काफी समझाने के बाद मोबाइल बाहर रखवाकर अंदर जाने दिया। उसके बाद जो मंजर सामने आया, उसने सभी को हिला दिया। टीम ने उसे मनुख्ता की सेवा सबतो बड़ी सोसाइटी के अस्पताल लुधियाना में भर्ती कराने की कोशिश की, लेकिन मां ने इलाज से मना कर दिया। बाद में हामी भरी और 24 दिसंबर को दोपहर दो बजे आने को कहा। टीम एंबुलेंस लेकर पहुंची तो स्वजन घर पर ताला लगाकर चले गए। संपर्क करने पर शोभा ने कहा कि उसका दिल नहीं मानता प्रिंस को अपने से दूर भेजने को। वंदेमातरम् दल की टीम ने पड़ोसियों की छत से प्रिंस की वीडियो क्लिप बनाई और पुलिस व प्रशासन के पास भेजी। 25 दिसंबर को टीम ने दोपहर बाद पड़ोसियों की मदद से घर में दस्तक दी, लेकिन सफलता नहीं मिल पाई।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.