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आस्था का केंद्र सिद्ध बाबा धाम, पहुंच मार्ग जर्जर होने से हादसे का खतरा, मकर संक्रांति पर जुटते हैं लाखों श्रद्धालु

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मनेन्द्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर : सिद्ध बाबा धाम सिर्फ मनेंद्रगढ़ शहर ही नहीं बल्कि पूरे जिले की पहचान है.भगवान भोलेनाथ ऊंचे पहाड़ पर विराजमान है.इस धाम को हाल ही में केदारनाथ मंदिर के तर्ज पर बनाया गया है. इस मंदिर की मान्यता है कि यहां पर जिस किसी ने मनोकामना मांगी वो पूरी हुई है. हर साल मकर संक्रांति के अवसर पर यहां विशाल मेला लगता है.इस मेले में छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि मध्यप्रदेश से भी लोग आते हैं.

क्या है मंदिर का इतिहास ?

ये मंदिर सिद्ध बाबा के नाम से प्रसिद्ध है.जो एक तपस्वी के नाम पर है. सिद्धबाबा एक तपस्वी थे, जिन्होंने इसी पहाड़ी पर कठोर तप कर सिद्धि प्राप्त की थी. कहा जाता है कि बाबा ने अपने तपोबल से इस क्षेत्र को भय, रोग और विपत्ति से मुक्त किया. ग्रामीणों का विश्वास है कि बाबा आज भी पहाड़ी पर विराजमान हैं और अपने भक्तों की रक्षा करते हैं. यही कारण है कि सिद्धबाबा को ग्राम देवता के रूप में पूजा जाता है. यहां आने वाला हर श्रद्धालु अद्भुत शांति और ऊर्जा का अनुभव करता है.

सिद्धबाबा धाम की बनावट और वातावरण केदारनाथ धाम की याद दिलाता है. पहाड़ी पर स्थित मंदिर, चारों ओर फैली हरियाली और ऊपर से दिखता विस्तृत प्राकृतिक दृश्य भक्तों को गहरे ध्यान और भक्ति में डुबो देता है. जो लोग दूरस्थ तीर्थों तक नहीं जा पाते, उनके लिए सिद्धबाबा धाम किसी बड़े तीर्थ से कम नहीं है-चंद्रमणि वर्मा, श्रद्धालु

हर साल लाखों लोग जुटते हैं
हर वर्ष 14 जनवरी को मकर संक्रांति के दिन यहां विशाल मेला आयोजित होता है. मेले में मनेन्द्रगढ़, झगराखाण्ड, खोंगापानी, चिरमिरी सहित आसपास के ग्रामीण अंचलों से लोग परिवार सहित पहुंचते हैं. इसके अलावा अनूपपुर, बिजुरी, कोतमा, राजनगर, शहडोल, मरवाही, पेंड्रा-गौरेला और बैकुंठपुर जैसे क्षेत्रों से भी श्रद्धालुओं का भारी जमावड़ा होता है. अनुमान है कि मेले के दिन करीब 5 लाख श्रद्धालु सिद्धबाबा के दर्शन करते हैं.

मंदिर तक जाने का रास्ता बदहाल
इतनी बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं के बावजूद एनएच-43 से सिद्धबाबा पहाड़ी तक का पहुंच मार्ग वर्षों से उपेक्षा का शिकार है. यह मार्ग अत्यंत उबड़-खाबड़ और जीर्ण-शीर्ण अवस्था में है.भरतपुर-सोनहत विधानसभा के आदिवासी बहुल इस वन क्षेत्र में खराब सड़क के कारण बाइक और चारपहिया वाहनों से पहुंचना मुश्किल हो जाता है. कई बार श्रद्धालु गिरकर घायल भी हो चुके हैं.

मरवाही से दर्शन के लिए आई एक युवती संजना ने बताया कि सड़क बन जाने से बुजुर्ग श्रद्धालुओं को भी बड़ी राहत मिलेगी. वहीं पेंड्रा-गौरेला निवासी श्रद्धालुओं का कहना है कि सिद्धबाबा धाम की ख्याति दूर-दूर तक है, लेकिन खराब रास्ता श्रद्धा की राह में बड़ी बाधा बन रहा है.खोंगापानी नगर पंचायत के पार्षद पी. मनी ने बताया कि कलेक्टर एमसीबी से मांग की है कि मकर संक्रांति मेले से पहले एनएच-43 से सिद्धबाबा पहाड़ी तक के मार्ग का मरम्मत कराया जाए.

Siddh Baba Dham road dilapidated

यह मार्ग छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश की सीमा को जोड़ता है.मेले के दौरान लाखों श्रद्धालु इसी रास्ते से आते-जाते हैं. सड़क दुरुस्त होने से दुर्घटनाओं पर रोक लगेगी और श्रद्धालुओं को सुगम आवागमन मिलेगा- पी. मनी,पार्षद

आपको बता दें कि श्रद्धालुओं और जनप्रतिनिधियों को उम्मीद है कि जिला प्रशासन सिद्धबाबा धाम की धार्मिक और सांस्कृतिक महत्ता को समझते हुए शीघ्र ही पहुंच मार्ग का मरम्मत कराएगा. इससे न केवल मकर संक्रांति मेले का आयोजन सुचारु रूप से हो सकेगा, बल्कि आस्था के इस पवित्र स्थल तक पहुंचना हर भक्त के लिए सुरक्षित और सहज होगा.

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