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टैक्स कलेक्शन में बंपर उछाल! 17.04 लाख करोड़ रुपये पहुंचा सरकारी रेवेन्यू, कॉर्पोरेट और पर्सनल इनकम टैक्स का दिखा जलवा

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देश की अर्थव्यवस्था से जुड़ी एक अहम खबर सामने आई है. मौजूदा वित्त वर्ष में 17 दिसंबर तक भारत का नेट डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन 8 फीसदी बढ़कर 17.05 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया है. यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है, जब सरकार ने टैक्स स्लैब में राहत दी है और रिफंड की प्रक्रिया को भी तेज किया है. आंकड़े यह संकेत देते हैं कि कंपनियों और टैक्स सिस्टम से सरकार को लगातार बेहतर रेवेन्यू मिल रहा है.

कॉर्पोरेट टैक्स बना सबसे बड़ा सहारा

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के आंकड़ों के मुताबिक, इस वित्त वर्ष की शुरुआत 1 अप्रैल से लेकर 17 दिसंबर 2025 तक कुल नेट डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन 17,04,725 करोड़ रुपये रहा. पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 15,78,433 करोड़ रुपये था. यानी साल-दर-साल आधार पर अच्छी बढ़त देखने को मिली है. इस बढ़ोतरी में सबसे बड़ा योगदान कॉर्पोरेट टैक्स का रहा है, जो साफ दिखाता है कि कंपनियों की कमाई और टैक्स भुगतान दोनों मजबूत हुए हैं.

कंपनियों से आया ज्यादा टैक्स

कॉर्पोरेट टैक्स कलेक्शन बढ़कर 8,17,310 करोड़ रुपये हो गया है, जबकि पिछले साल यह 7,39,353 करोड़ रुपये था. इसका मतलब है कि कंपनियों की ओर से टैक्स भुगतान में अच्छा सुधार हुआ है. इससे सरकार को विकास योजनाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च करने के लिए ज्यादा संसाधन मिलते हैं.

आम टैक्सपेयर्स से भी बढ़ा योगदान

नॉन-कॉर्पोरेट टैक्स, जिसमें सैलरी क्लास, प्रोफेशनल्स और छोटे कारोबारियों का टैक्स शामिल होता है, वह भी बढ़ा है. यह कलेक्शन 7,96,181 करोड़ रुपये से बढ़कर 8,46,905 करोड़ रुपये पहुंच गया है. इससे साफ है कि पर्सनल इनकम टैक्स से भी सरकार को लगातार सपोर्ट मिल रहा है.

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