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कुंभ 2026: क्या पेड़ों की बलि देकर बनेगी ‘साधु ग्राम’? 1800 पेड़ों की कटाई पर बॉम्बे हाईकोर्ट सख्त, अधर में लटकीं करोड़ों की योजनाएं

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दो साल बाद 2027 में महाराष्ट्र के नासिक और त्र्यंबकेश्वर में ‘सिंहस्थ कुंभ मेला’ आयोजित किया जाएगा. देवेंद्र फडणवीस की सरकार नासिक कुंभ की तैयारी में जोर-शोर से जुटी है. पिछले साल उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में महाकुंभ की सफलता के मद्देनजर महाराष्ट्र सरकार का लक्ष्य नासिक कुंभ मेला को पूरी तरह से सफल बनाना है, लेकिन कुंभ मेले से पहले 1800 पेड़ की कटाई को लेकर विवाद पैदा हो गया है.

नासिक के तपोवन में साधुग्राम के निर्माण हेतु 1800 वृक्षों की कटाई के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई. कोर्ट ने राज्य सरकार, नासिक नगर निगम और वृक्ष प्राधिकरण को नोटिस जारी कर मौखिक रूप से निर्देश दिया है कि वे पेड़ों की कटाई शुरू न करें. इससे देवेंद्र फडणवीस सरकार को झटका लगा है. पर्यावरणविदों और स्थानीय निवासियों के कड़े विरोध के बीच यह कानूनी लड़ाई अब एक महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच गई है.

अक्टूबर 2014 में देवेंद्र फडणवीस सरकार के समय पिछला नासिक कुंभ मेला आयोजन किया गया था. इस बार जब सिहस्थ कुंभ का आयोजन होगा तो देवेंद्र फडणवीस फिर से राज्य के मुख्यमंत्री हैं और वो पिछले कुंभ से अच्छी तैयारी करना चाहते हैं, क्योंकि कुंभ का आयोजन 12 साल के पास होता है. सरकार की पूरी कोशिश है कि नासिक और पास के त्र्यंबकेश्वर में एक साल चलने वाले कुंभ में पिछले साल की तुलना में पांच गुना ज्यादा लोग आएं.

कुंभ में इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट और लॉजिस्टिक इंतजाम के लिए 25,055 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया गया है. हालांकि कुंभ के एक प्रोजेक्ट में रुकावट आ रही है और तपोवन में 1800 पेड़ की कटाई का मामला तूल पकड़ लिया है.

जानें क्या है मामला

तपोवन, रामकुंड से लगभग 3 किलोमीटर दूर है, जहां मेले के दौरान भक्त गोदावरी में डुबकी लगाते हैं. आम मान्यता के अनुसार, भगवान राम ने अपने वनवास का कुछ हिस्सा नासिक, खासकर तपोवन में बिताया था.

पिछले मेलों में भी तपोवन का इस्तेमाल साधुओं के रहने की जगह बनाने के लिए किया गया था और शहर के डेवलपमेंट प्लान में इसे आधिकारिक तौर पर साधुग्राम के नाम से जाना जाता है. मेलों के बीच तपोवन अब तक खाली पड़ा है. ये पेड़ करीब दस साल पहले उगे थे, जब शहर प्लॉट के किनारों तक फैल गया था और नासिक म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (NMC) ने कब्जा रोकने के लिए पेड़ लगाए थे. समय के साथ, तपोवन नासिक के लिए एक जरूरी शहरी इलाका बन गया.

नवंबर की शुरुआत में, सुबह की सैर पर निकले कुछ लोगों ने तपोवन में कई पेड़ों पर पेड़ काटने के नोटिस लगे देखे. तब से इस पर लोगों में हंगामा हो रहा है, एक्टिविस्ट सवाल उठा रहे हैं कि जब आस-पास कई दूसरी जगहें मौजूद हैं तो तपोवन को खाली करने की क्या जरूरत है?

नासिक निगम ने पेड़ काटने के प्रस्ताव को दी मंजूरी

2027 में होने वाले सिंहस्थ कुंभ मेले के लिए देशभर से लाखों साधु-संतों और संतों के लिए नासिक में निवास के लिए तपोवन में एक विशाल साधु ग्राम (साधुओं का गांव) का निर्माण किया जा रहा है. नासिक म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (NMC) ने मेले के लिए मुख्य साधुग्राम (तपस्वी लोगों के रहने की जगह) बनाने के लिए तपोवन नाम की लगभग 54 एकड़ जमीन को खाली करने का प्रस्ताव रखा है, जिसमें 1,800 पेड़ हैं और इन पेड़ों को काटने की मंजूरी दी गई है.

हालांकि, स्थानीय लोगों के साथ-साथ कई पर्यावरण संतों द्वारा इसका कड़ा विरोध किया जा रहा है. सोशल एक्टिविस्ट, एक्टर, जिनमें मराठी नाम सयाजी शिंदे भी शामिल हैं और स्टूडेंट्स रोजाना तपोवन में आ रहे हैं और नासिक म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के प्लान का विरोध करते हुए वहां पेड़ों को गले लगा रहे हैं और प्लेकार्ड पकड़े हुए हैं.

पेड़ काटने के आदेश के खिलाफ आंदोलन

पेड़ काटने के प्रस्ताव के खिलाफ 11 दिसंबर को पुणे के एक्टिविस्ट श्रीराम प्रल्हादराव पिंगले ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) में याचिका दायर की, जिसमें कहा गया कि हजारों देसी पेड़, जिनमें से कुछ दशकों पुराने हैं, बिना सही एनवायर्नमेंटल इम्पैक्ट असेसमेंट के काटे जा रहे हैं. पिंगले ने कहा कि सही विकल्प नहीं खोजे गए और अधिकारियों ने कानूनी जरूरतों को खुलेआम नजरअंदाज किया है. अगले दिन, NGT ने अगली सुनवाई की तारीख तक पेड़ काटने पर रोक लगा दी, जो अगले साल 16 जनवरी है.

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) ने तपोवन में साधु ग्राम और प्रदर्शनी केंद्र के निर्माण के लिए साधु की कटाई और निर्देश के प्रस्ताव के खिलाफ बॉम्बे उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है. याचिका में मुख्य मांग यह है कि नासिक नगर निगम को तपोवन में पेड़ों की कटाई रोकने के लिए कहा जाए. कोर्ट ने राज्य सरकार, नासिक नगर निगम और वृक्ष प्राधिकरण को नोटिस जारी कर मौखिक रूप से निर्देश दिया है कि वे पेड़ों की कटाई शुरू न करें.

सरकार की पहल, बदले में लगाए जाएंगे 15000 पेड़

दूसरी ओर, मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा है कि विरोध प्रदर्शनों का राजनीतिकरण किया गया है. कुछ लोगों को लगता है कि वे कुंभ मेले के रास्ते में रुकावटें डाल सकते हैं. उन्हें हमें रोकने की इजाजत नहीं दी जाएगी. फडणवीस ने कुछ प्रदर्शनकारियों के इरादों पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्होंने इस बारे में एक्टिविज्म शुरू किया था और अचानक एनवायरनमेंटलिस्ट बन गए. उन्होंने कहा, मैं असली एनवायरनमेंटलिस्ट की इज्जत करता हूं, लेकिन कुछ लोग पॉलिटिकल वजहों से एनवायरनमेंटलिस्ट बन गए हैं. अब, एक्टिविस्ट्स का मुकाबला करने के लिए, सरकार ने ग्रीन नासिक शुरू किया है, जिसके तहत 15,000 पेड़ लगाए जाएंगे.

नासिक नगर निगम के कमिश्नर मनीषा खत्री ने पिछले महीने रिपोर्टर्स से कहा, अमृत स्नान (पवित्र डुबकी में से एक) का जुलूस भी वहीं से शुरू होता है. इसकी जगह बदलने से ट्रैफिक में गंभीर रुकावटें आएंगी, साथ ही लोगों की जान को भी खतरा होगा.

खत्री ने बड़े पैमाने पर पेड़ काटने के दावों को भी अफवाहें बताया और कहा कि जिन पेड़ों को मार्क किया गया है, उनमें से सभी नहीं काटे जाएंगे. उन्होंने कहा, जिन 1,800 पेड़ों का जिक्र किया गया है, उन्हें ही गिना गया है. सिर्फ बाहरी पेड़ हटाए जाएंगे जो बायोडायवर्सिटी को नुकसान पहुंचाते हैं, झाड़ियों और छोटे पेड़ों को थोड़ी-बहुत साफ करने के अलावा. हम बड़े, देसी पेड़ों को नहीं छुएंगे.

महाराष्ट्र में पेड़ काटने के क्या हैं नियम

महाराष्ट्र फेलिंग ऑफ ट्रीज (रेगुलेशन) एक्ट, 1964 के तहत यह नियम बनाए गए हैं कि राज्य में पेड़ कैसे और कब काटे (काटे) जा सकते हैं. इसमें कहा गया है कि आप अधिकारियों की इजाजत के बिना कुछ पेड़ों को नहीं काट सकते. इजाजत के बिना पेड़ काटना गैर-कानूनी है और इसके लिए सजा हो सकती है. यह एक्ट के तहत लोकल ट्री ऑफिसर और अधिकारियों से इसकी इजाजत लेनी होती है.

नियम के अनुसार पानी की जगहों (जैसे नदियां, झरने, टैंक) के 30 मीटर के अंदर, आप आम तौर पर कलेक्टर की मंजूरी के बिना पेड़ नहीं काट सकते. इसी तरह से कुछ ऐसी जमीनों पर जहां खेती नहीं हो सकती और पेड़ कम हैं, वहाँ भी काटने से पहले आपको इजाजत लेनी होगी.

अगर बिना इजाजत के कोई पेड़ काटा जाता है, तो कॉर्पोरेशन लगभग 1 लाख रुपए तक जुर्माना लगा सकता है और क्रिमिनल केस सहित कानूनी कार्रवाई कर सकता है.

कुंभ से जुड़े डेवलपमेंट के लिए तपोवन में पेड़ों की कटाई का प्रस्ताव पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा कि नासिक इलाके में कोई भी पेड़ उसकी पहले से इजाजत के बिना नहीं काटा जाना चाहिए. इसके साथ ही नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने नासिक के कुछ हिस्सों में पेड़ काटने पर तब तक रोक लगाने का आदेश दिया जब तक कि सही कानूनी प्रोसेस का पालन नहीं किया जाता.

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