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साहिबगंज के उधवा पक्षी अभयारण्य रामसर साइट घोषित, प्रवासियों पक्षियों का बना सुरक्षित जोन

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साहिबगंज: उधवा पक्षी अभयारण्य झील इस साल रामसर साइट घोषित किया गया है. झारखंड की यह पहली झील है, जिसे रामसर साइट घोषित किया गया है. केंद्र सरकार की घोषणा के बाद आधुनिक तकनीक से शिकार करने वाले लोगों पर निगरानी रखी जा रही है. पूरे क्षेत्र में 10 सीसीटीवी कैमरे और दो पीटीजेड कैमरों से निगरानी रखी जा रही है.

सैलानियों के लिए की गई कई व्यवस्थाएं

पक्षियों का नवंबर माह से यहां आना शुरू हो जाता है, जो फरवरी माह के अंत तक रहता है. उसके बाद पक्षी अपने स्थान पर वापस चली जाती हैं. इसे देखने के लिए पर्यटक अभी से ही यहां पहुंचने लगे हैं. पर्यटकों को घुमाने के लिए चार शिकारा बोट (जम्मू और कश्मीर, खासकर डल झील की एक पारंपरिक लकड़ी की नाव होती है) और एक 15 सीटर वाली बड़ी नाव की व्यवस्था वन विभाग की तरफ से की गई है. जिस पर सैलानियों को न्यूनतम शुल्क लेकर घुमाया जाता है.

565 हेक्टेयर में फैला है उधवा पक्षी अभ्यारण्य

उधवा पक्षी अभयारण्य 565 हेक्टेयर में फैला है. पहले इसका नियंत्रण हजारीबाग के अधीन था लेकिन अब साहिबगंज वन प्रमंडल के अधीन आने से इसका विकास हुआ है. हर साल यहां विदेशी पक्षियों की संख्या बढ़ रही है. 2009 में जहां मात्र 2815 विदेशी पक्षी यहां पाए गए थे वहीं अब उनकी संख्या बढ़कर करीब 25 हजार हो गयी है. कई लुप्तप्राय विदेशी पक्षी यहां देखे गए. जिसे देखते हुए इसे इस साल रामसर साइट घोषित किया गया.

यह झारखंड का इकलौता रामसर साइट है. अब इसे पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने की तैयारी चल रही है. इस क्रम में यहां पर्यटकों के लिए शिकारा नौका का परिचालन भी शुरू किया गया है. निगरानी के लिए लगाए गए कैमरे कभी बंद न हों, इसके लिए उन्हें सोलर प्लेट से जोड़ा गया है. दूसरी ओर ये कैमरे क्लाउड स्टोरेज से जुड़े हुए हैं, जिसमें किसी प्रकार की केबल नहीं है.

पक्षियों का खजाना है- उधवा बर्ड सैंक्चुअरी

अगर आपको प्रकृति का मनमोहक नजारा देखना है तो उधवा ब्लॉक में बर्ड सैंक्चुअरी झील पर जाएं. जहां आपको इस समय प्रवासी पक्षी देखने को मिलेंगे. रामसर साइट घोषित होने के बाद यहां पहले से बहुत कुछ बदल चुका है. पहले लोग अगल बगल शिकार कर लेते थे. लेकिन अब ऐसा नहीं है. आधुनिक तकनीक से निगरानी रखी जा रही है. इसी कारण पहले के अपेक्षा पक्षियों की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई है. नवंबर माह से ही पक्षियों का यहां आना जारी है. यह पक्षी दूर-दूराज से उड़कर शांति, भोजन और सुरक्षित आवास की तलाश में पहुंच रहे हैं. जलीय जीव इनके भोजन का मुख्य आहार है.

उधवा पक्षी अभयारण्य को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं. अभयारण्य पर नजर रखने के लिए तकनीक का सहारा लिया जा रहा है. पर्यटकों के लिए भी कई सुविधाएं शुरू की गई हैं. धीरे-धीरे पर्यटकों का यहां आना शुरू हो गया है. शिकार करते पकड़े जाने पर सात साल की सजा और एक लाख तक का जुर्माने का प्रावधान है- प्रबल गर्ग, डीएफओ, साहिबगंज

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