उज्जैन : मध्य प्रदेश के डीजीपी कैलाश मकवाना का 11 दिसंबर को जन्मदिन, ये दिन उज्जैन में तैनात हेड कांस्टेबल के लिए कुछ खास मायने रखता है. हालांकि मूल रूप से उज्जैन के रहने वाले डीजीपी कैलाश मकवाना के जन्मदिवस पर पुलिस विभाग में खासा उत्साह है, लेकिन एक खास तस्वीर बहुत कुछ बयां कर रही है. हेड कांस्टेबल सुबोध सिंह पंवार ने डीजीपी की तस्वीर कार में लगाकर दिनभर शहर की सड़कों की सैर की. इस दौरान गरीबों को आवश्यक सामग्री बांटी.
डीजीपी की तस्वीर कार के फ्रंट ग्लास पर
हेड कांस्टेबल सुबोध सिंह पंवार ने डीजीपी कैलाश मकवाना की तस्वीर कार के फ्रंट ग्लास पर लगाई और शहर को संदेश दिया. ETV भारत से बात करते हुए सुबोध सिंह पंवार ने कहा “उनके लिए 1997 से प्रेरणास्रोत हैं डीजीपी मकवाना. उन्हें स्थाई सेवक के नाम से लोग जानते हैं.” सुबोध उज्जैन पुलिस लाइन में पदस्थ हैं. सुबोध बताते हैं “सन् 1997 में उनकी पुलिस विभाग में भर्ती हुई. डीजीपी कैलाश मकवाना की वजह से ही उनकी नौकरी लगी.”
जरूरतमंदों की सेवा कर मनाते हैं जन्मदिन
हेड कॉन्स्टेबल सुबोध बताते हैं “उस वक़्त डीजीपी कैलाश मकवाना मंदसौर एसपी थे. आज जो हूं, डीजीपी की वजह से ही हूं. बीते कई वर्षों से वह जन्मदिवस मना रहे हैं. मैं उज्जैन में 2011 से पदस्थ हूं. हर प्रमोशन पर पुलिस मुख्यालय पर जाकर डीजीपी को बधाई देता हूं. डीजीपी का जन्मदिवस सबसे पहले उज्जैन के नरवर क्षेत्र स्थित अति प्राचीन हटीला हनुमान मंदिर में पूजन कर मनाते हैं. नरवर में ही डीजीपी के भाई नरेंद्र मकवाना के साथ केक काटा व उज्जैन और नरवर व अलग-अलग क्षेत्र में जाकर गरीबों व मजदूरों को स्वाल्पाहार कराया. हर साल यही अंदाज में जन्म दिवस मनाते हैं.”
डीजीपी मकवाना मेरे प्रेरणास्रोत हैं
हेड कांस्टेबल सुबोध का कहना है “अगर डीजीपी कैलाश मकवाना मुझे उनके प्रेरणा स्रोत होने पर जरा भी शक करते हैं और मेरी परीक्षा लेते हैं तो मैं आपसे यकीन के साथ कह सकता हूं कि जिस दिन उनका रिटायरमेंट रहेगा तो मैं उस दिन अपना इस्तीफा देने तक के लिए तैयार हूं. उनकी ईमानदारी ही मेरा सबसे बड़ा एनर्जी बूस्टर है. तस्वीर लेकर घूमने का एक ही उद्देश्य है कि अधिक से अधिक लोगों को पता चल सके कि हमारे डीजीपी कितने ईमानदार हैं.”
Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.