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माओवादी हिंसा छोड़ थामी कलम! गरियाबंद में 22 आत्मसमर्पित माओवादियों ने दी महापरीक्षा, सरकारी योजना का दिखा असर

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गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में 22 आत्मसमर्पित माओवादियों ने राष्ट्रव्यापी महापरीक्षा अभियान उल्लास नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत आयोजित परीक्षा में भाग लिया। हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटे पूर्व माओवादियों में परीक्षा को लेकर उत्साह दिखाया।

परीक्षा का है खास उद्देश्य

​यह परीक्षा सात दिसंबर को आयोजित की गई, जिसका उद्देश्य आत्मसमर्पित व्यक्तियों को साक्षर बनाकर उनके लिए नए अवसरों के द्वार खोलना है। ​इन व्यक्तियों ने राज्य सरकार की पुनर्वास नीतियों के विभिन्न आकर्षक प्रविधानों से प्रभावित होकर माओवादी संगठन को छोड़ा और एक खुशहाल जीवन जीने का फैसला किया। परीक्षा में उनकी भागीदारी यह सुनिश्चित करती है कि वे बुनियादी शिक्षा प्राप्त कर सकें और समाज में सम्मानजनक स्थान बना सकें।

विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा

​साक्षरता के साथ-साथ आत्मसमर्पित व्यक्तियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रशासन द्वारा कौशल विकास योजना के तहत विशेष प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य उन्हें स्थायी रोजगार और आय के साधन से जोड़ना है। ​वर्तमान में लाइवलीहुड कॉलेज गरियाबंद में तीन प्रमुख ट्रेडों में प्रशिक्षण कार्यक्रम चल रहे हैं।

सिलाई मशीन प्रशिक्षण जिससे महिलाएं और पुरुष छोटे स्तर पर अपना व्यवसाय शुरू कर सकें। साथ ही वाहन चालक प्रशिक्षण परिवहन क्षेत्र में रोजगार के लिए तैयार करना, प्लंबर प्रशिक्षण निर्माण और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में तकनीकी कौशल प्रदान करना। ​

समाज में स्थापित करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध

यह प्रशिक्षण इन पूर्व माओवादियों को सम्मानपूर्वक कमाने और समाज में रचनात्मक योगदान देने में सक्षम बना रहा है। ​जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आत्मसमर्पित माओवादियों को समाज में पूरी तरह से स्थापित करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। उन्हें न केवल तत्काल लाभ प्रदान किए जा रहे हैं बल्कि भविष्य में भी शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिया जाएगा।छत्तीसगढ़ की साय सरकार माओवादियों का आतंक खत्म करने के साथ-साथ विकास को लेकर भी प्रतिबद्ध है। खासकर जो माओवादी आत्मसमर्पण कर चुके हैं, उनके पुनर्वास और रोजगार को लेकर राज्य सरकार विशेष कदम उठा रही है।

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