Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
नारायणपुर में बवाल: रावघाट अंजरेल माइंस की DMF राशि पर क्यों भड़के लोग? प्रशासन के खिलाफ खोला मोर्चा सावधान! सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट करना पड़ा भारी, बजरंग दल ने की शिकायत और पुलिस ने कर लिया अरेस्ट रंगारंग समापन: लोक कला से लेकर बॉलीवुड तक का तड़का! कोरिया महोत्सव के आखिरी दिन कलाकारों ने बांधा सम... खाकी की संवेदनशीलता: अपनों से बिछड़ी मानसिक रूप से अस्वस्थ युवती के लिए फरिश्ता बनी दंतेवाड़ा पुलिस,... बदल रहा है बस्तर! इंद्रावती नदी पर शुरू हुआ 'रिवर एडवेंचर फेस्ट', गोलियों की गूंज के बीच अब दिखेगा र... सावधान सरगुजा! डॉग बाइट के आंकड़ों ने उड़ाए होश, पागल कुत्ते के काटने पर तुरंत करें ये काम, बच जाएगी ज... खौफनाक वारदात: 'तू मेरी नहीं तो किसी की नहीं...' एकतरफा प्यार में सिरफिरे आशिक ने सरेराह चलाई गोली! AI समिट में बवाल: बीच कार्यक्रम में यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उतारी टी-शर्ट! ट्रेड डील के खिलाफ प... झीरम घाटी पर विजय शर्मा: "शहीद कांग्रेस नेताओं को जवान दे रहे सच्ची श्रद्धांजलि", डिप्टी सीएम के बया... बड़ी पहल: सरकारी योजनाओं को जनता तक पहुंचाने के लिए लगी प्रदर्शनी, 'उन्नति की ओर एक पहल' में उमड़ी भ...

हिसार में हत्या प्रयास में मां-बेटी को 3 साल कैद, 500 रुपए जुर्माना भी लगाया

3

हिसार : हिसार जिले के गांव संडोल की रहने वाली मां-बेटी को हत्या प्रयास के मामले में 3 साल की कैद हो गई है। यह फैसला हिसार की एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज अनुदीप कौर भट्‌टी की अदालत ने सुनाया। कोर्ट ने मां-बेटी पर 500 रुपए का अतिरिक्त जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना नहीं भरने पर एक महीने की अतिरिक्त कैद काटनी पड़ेगी।

दरअसल बता दें कि 2020 में अग्रोहा में लड़ाई झगड़े के दौरान गांव संडोल के जसवंत की मौत हो गई थी। इस मामले में पुलिस ने सुनील, प्रदीप, मोनी देवी, सुनीता और निर्मला पर बीएनएस की धारा 147, 149 और 302 के तहत केस दर्ज किया था। मगर बाद में कोर्ट में 302 का मामला 307 में कंवर्ट हो गया। कोर्ट ने माना यह हत्या जानबूझकर नहीं की गई। लड़ाई झगड़े के दौरान जसवंत की मौत हुई थी। इस मामले की सुनवाई 4 साल, 9 महीने और 14 दिन चली।

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि किसी भी अपराधी को पूरी तरह से समाप्त करने वाला या पूरी तरह से सुधारने वाला नहीं मानना चाहिए। सजा सुनाते समय अपराधी की उम्र, पिछला रिकॉर्ड, सुधार की संभावना अपराध की परिस्थितियां माऔर यने रखती हैं। अदालत ने माना कि दोषियों ने अपने कार्य के परिणामों का पूरा ज्ञान होने के बावजूद अपराध किया, लेकिन उनकी जीवन की कठिनाइयों और उम्र को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.