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टेम्पररी डिसेबिलिटी सर्टिफिकेट वैलिड है तो देना होगा रिजर्वेशन का लाभ : हाईकोर्ट

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जबलपुर : मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अपने अहम फैसले में कहा है कि टेम्पररी डिसेबिलिटी सर्टिफिकेट वैलिड है तो रिजर्वेशन का लाभ प्रदान किया जाना चाहिए. ये फैसला कोर्ट ने एक याचिका पर दिया, जिसमें मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी के पद के लिए याचिकाकर्ता का कैंडिडेचर स्वीकार नहीं किया गया था. इस मामले में हाईकोर्ट जस्टिस एमएस भट्टी की एकलपीठ ने कहा कि 30 दिनों के अंदर याचिकाकर्ता का अपॉइंटमेंट ऑर्डर जारी किए जाएं.

क्या है पूरा मामला?

बालाघाट निवासी पुरवेष ढांडे की ओर से दायर की गई याचिका में कहा गया था कि उसने मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड में जूनियर इंजीनियर (ट्रेनी) के पद के लिए रिज़र्व कैटेगरी में आवेदन किया था. उसने कंपनी द्वारा दिए गए विज्ञापन के अनुसार अपना कैंडिडेचर जमा किया है. विज्ञापन में दिव्यांग व्यक्ति के लिए आरक्षण का प्रावधान था. याचिकाकर्ता 60 प्रतिशत दिव्यांग है लेकिन डॉक्यूमेंट्स वेरिफिकेशन में परमानेंट डिसेबिलिटी सर्टिफिकेट नहीं होने के कारण उसके कैंडिडेचर पर विचार नहीं किया गया.

परमानेंट डिसेबिलिटी सर्टिफिकेट पर दिया गया ये तर्क

याचिका में कहा गया था कि सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा दिसम्बर 2024 में जारी किए गए सर्कुलर के अनुसार परमानेंट डिसेबिलिटी सर्टिफिकेट के आधार पर नियुक्ति प्रदान की जाएगी. याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि उसका डिसेबिलिटी सर्टिफिकेट जून 2020 तक मान्य है. यह अवधि अवधि पूरी होने के बाद एक्सपर्ट्स याचिकाकर्ता की डिसेबिलिटी की डिग्री की जांच करते हैं. ऐसा डिसेबिलिटी सर्टिफिकेट मध्य प्रदेश राइट्स ऑफ पर्सन्स विद डिसेबिलिटी रूल्स, 2017 के रूल 28 के अनुसार जारी किया गया है.

सर्टिफिकेट जारी करना डिसेबिलिटी के नेचर पर निर्भर करता है. अगर भविष्य में डिसेबिलिटी में बदलाव की संभावना है, तो टेम्पररी सर्टिफिकेट जारी किया जाता है, नहीं तो परमानेंट सर्टिफिकेट जारी किया जाता है.

डिसेबिलिटी के तहत रियायतें लेने से नहीं रोक सकते

एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि जारी किए गए डिसेबिलिटी सर्टिफिकेट के अनुसार याकिचाकर्ता सरकार और सरकार द्वारा फंडेड नॉन-गवर्नमेंट ऑर्गनाइजेशन की स्कीमों के तहत डिसेबिलिटी सुविधाओं, रियायतों और फायदों का हकदार है. एक्ट के सेक्शन 34 और 2017 के रूल्स के रूल-29 को देखने से पता चलता है कि बताए गए प्रोविजन परमानेंट या टेम्पररी डिसेबिलिटी सर्टिफिकेट के बीच कोई फर्क नहीं करते हैं.

कोर्ट ने आगे कहा कि अनावेदक राज्य सरकार द्वारा सर्कुलर की आड़ में याचिकाकर्ता को रिजर्वेशन का फायदा उठाने से नहीं रोक सकते. एकलपीठ ने इस आदेश के साथ याचिकाकर्ता के पक्ष में राहतकारी आदेश जारी किए हैं. एकलपीठ ने यह भी कहा है कि वैलिडिटी पीरियड खत्म होने पर याचिकाकर्ता की डिसेबिलिटी की हद का आंकलन कर फैसला लेने स्वतंत्र है.

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