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मर्डर के आरोप में 2 बार जेल, झूठे केस से बचने छोड़ा घर, डीएसपी बना किसान का बेटा

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भिंड: चंबल आज भी पिछड़े क्षेत्रों में गिना जाता है, यह इलाका डकैतों से मुक्त हो गया है, लेकिन अपराध यहां आज भी बेलगाम हैं. लेकिन इसकी पहचान बदलने का जिम्मा भी क्षेत्र के युवा उठा रहे हैं. अपनी मेहनत और पढ़ाई के दम पर सरकारी अफसर बन रहे हैं. हाल ही में मध्य प्रदेश में एमपी पीएससी 2023 (मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग) के परिणाम घोषित हुए जिनमें भिंड के छोटे से गांव से निकले जैनेंद्र कुमार निगम का चयन हुआ है. जिनेंद्र के लिए यह आसान नहीं था, क्योंकि इसके लिए काफी संघर्ष किया है. उन्होंने जेल में रहने से लेकर डीएसपी बनने तक का सफर तय किया है.

दबंगों ने दर्ज कराया मुकदमा, पुलिस ने जेल पहुंचाया
कुछ साल पहले मेहगांव के डोंगरपुरा गांव में रहने वाले केशव जाटव और उनके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूटा. खेती किसानी कर परिवार पाल रहे केशव और उनके परिवार पर दबंगों ने कहर ढाया, जमीन को लेकर विवाद किया, गांव से बेदखल कर दिया. केशव और उनके परिजन महीनों भिंड कलेक्ट्रेट के बाहर धरने पर रहे, उनके और उनके दो बेटों पर केस दर्ज करा दिया गया. छोटा बेटा जैनेन्द्र तब 23 साल का था. पुलिस आई और विवाद के बाद तीनों को गिरफ्तार कर गांव से थाने ले गई. कोर्ट में पेश करने के बाद आठ दिन जेल में रहना पड़ा. लेकिन शायद ही कोई जानता होगा कि कैदियों के बीच जेल में आया यह नौजवान जल्द ही पुलिस में डीएसपी बनेगा.

पढ़ाई में होशियार जैनेन्द्र ने पास की थी आरक्षक की परीक्षा
“जैनेन्द्र को शुरू से ही पढ़ाई में रुचि थी. उसने चार सब्जेक्ट में एमए किया है. अपने जीवन का पहला प्रयास जिनेंद्र ने आरक्षक पद के लिए किया और लिखित परीक्षा में पास हो गया. लेकिन उसे आरक्षक नहीं बनना था इसलिए शारीरिक परीक्षा नहीं दी. इसके बाद सब इंस्पेक्टर पद के लिए लिखित परीक्षा पास की इस बार भी फिजिकल परीक्षा देने नहीं गए.”

जेल से छूटे तो पढ़ाई के लिए इंदौर हुए शिफ्ट
2020 में एमपीपीएससी की परीक्षा में भाग लिया. इसी बीच डोंगरपुरा गांव में जमीन को लेकर विवाद होने लगा जिसमें उन्हें और उनके बेटों व रिश्तेदारों तक को फंसा दिया, जिसमें हत्या के प्रयास समेत अन्य धाराओं में मामले दर्ज कराए. उसके ऊपर तीन बार झूठे मुकदमें दर्ज कराए गए. इसके बाद दो बार जैनेन्द्र को जेल जाना पड़ा. 2019 से 2020 तक दो बार वह भिंड की जिला जेल में रहा. जब जमानत पर बाहर आया तो भिंड छोड़ने का फैसला किया, क्योंकि उसे पता था कि गांव के झगड़ों में उसकी पढ़ाई नहीं हो पाएगी. इसलिए वह इंदौर शिफ्ट हो गया और वहां अपनी सेल्फ स्टडी में पीएससी की तैयारी जारी रखी.

2023 में बने नायब तहसीलदार
2023 में जब एमपीपीएससी 2020 का रिजल्ट आया तो जैनेन्द्र के लिए दोहरी खुशी का मौका था. क्योंकि इधर कुछ महीने पहले ही उनके खिलाफ चल रहे मुकदमों में न्यायालय ने उन्हें दोषमुक्त कर दिया था और इधर एमपीपीएससी रिजल्ट के अनुसार वे नायब तहसीलदार बन गए थे. उन्हें नियुक्ति भी मिल गई थी.

सहायक संचालक की नियुक्ति छोड़ी, डीएसपी के लिए चयन
इसके बाद भी जैनेन्द्र ने अपना लक्ष्य नहीं छोड़ा उन्हें और आगे जाना था. उन्होंने 2022 में भी एमपीपीएससी अटेम्प्ट की और उनका चयन स्कूल शिक्षा विभाग के सहायक संचालक के पद पर हुआ लेकिन उन्होंने जॉइन ना करने का फैसला लिया. 2023 में एक बार फिर एमपीपीएससी की परीक्षा दी और इस बार जब हाल ही रिजल्ट आया तो उनका चयन डीएसपी के पद पर हुआ है.

मंदसौर में पदस्थ है जैनेंद्र, यूपीएससी की भी है तैयारी
वर्तमान में जैनेन्द्र निगम मंदसौर जिले की गरोठ तहसील में बतौर नायब तहसीलदार पदस्थ हैं और जल्द ही डीएसपी पद के लिए जॉइनिंग लेंगे. जैनेंद्र निगम के पिता केशव जाटव ने बताया, ”उनके बेटे का ये आखिरी पड़ाव नहीं है, वह यूपीएससी की तैयारी में जुटे हैं. ये उनकी मेहनत ही है जो एक गांव से निकले, जेल गए पढ़ाई के लिए घर छोड़ा और लौटे तो पुलिस विभाग के अफसर बनकर.” जैनेंद्र का संघर्ष उन तमाम युवाओं के लिए प्रेरणा है जो जीवन में कुछ कर दिखाना चाहते हैं.

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