कोरबा: जिले में छत्तीसगढ़ का पहला ऐसा आयुर्वेद विभाग का अस्पताल स्थापित किया गया है जहां ऑपरेशन थिएटर की शुरुआत की गई है. आयुर्वेद पद्धति से बवासीर जैसी समस्या की सफल सर्जरी की जा रही है. अब तक 12 से 13 सफल शल्यक्रिया की जा चुकी है. आयुष विभाग के पॉली क्लिनिक में आयुर्वेदिक सुविधाओं का विस्तार किया गया है. जहां पंचकर्म की भी व्यवस्था है. 10 बेड का अस्पताल भी बनाया गया है. जहां अब तीन शिफ्ट में चिकित्सक और अन्य स्वास्थ्य कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है. इस व्यवस्था के बाद आयुर्वेद की तरफ लोगों का रुझान भी बढ़ रहा है.
डीएमएफ फंड से हुआ निर्माण: वैसे तो डीएमएफ फंड सदैव सुर्खियों में रहा है. इस फंड के दुरुपयोग और नियम विरुद्ध खर्चे को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं. लेकिन कुछ कार्य ऐसे हैं, जो लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं. सुविधाओं का विस्तार भी हो रहा है. शहर के पास डिंगापुर में डीएमएफ फंड से ही पॉली क्लिनिक का निर्माण हुआ है.
- यह एक तरह का आयुर्वेदिक अस्पताल है.
- 10 बेड मौजूद हैं. एक साथ 10 मरीजों को यहां भर्ती किया जा सकता है.
- आयुर्वेद के साथ यूनानी और होम्योपैथी पद्धति से भी यहां इलाज किया जाता है.
- तीनों पैथी के चिकित्सा यहां एक साथ उपलब्ध रहते हैं.
- मरीज जिसे चाहे उससे ओपीडी में सलाह ले सकते हैं.
- पॉली क्लिनिक के जरिए आयुर्वेदिक उपचार में विस्तार के बाद मरीज का रुझान बढ़ा है.
- औषधीय तेल से मालिश और स्टीम बाथ भी मरीज को दिया जाता है.
नि:शुल्क दवा और सर्जरी भी: पॉली क्लिनिक में आने वाले मरीजों को निशुल्क दवाएं देने का प्रावधान है. इसके अलावा पंचकर्म में वमन, विवेचन बस्ती और नस्य जैसी क्रियाओं से मरीजों को लाभ पहुंचाया जाता है. खास तौर पर वात रोग से ग्रस्त मरीजों को काफी आराम मिलता है. जरूरत के अनुसार प्रतिदिन यहां पंचकर्म की क्रिया भी अपनाई जाती है. इसके लिए पॉली क्लीनिक में आयुर्वेद में एमडी मेडिसिन चिकित्सक मौजूद हैं. सर्जरी और पंचकर्म क्रियाओं के लिए यहां एमडी मेडिसिन डॉक्टर मौजूद हैं.
70 से 80 ओपीडी प्रतिदिन: पॉली क्लिनिक के जरिए आयुर्वेदिक उपचार में विस्तार के बाद मरीज का रुझान बढ़ा है, हालांकि डिंगापुर शहर से कुछ दूर है, पहुंचमार्ग भी नहीं बन सका है. इसके बाद भी यहां 70 मरीज तक ओपीडी में पहुंचते हैं. औसत संख्या 40 से 50 रहती है. पहले जितने मरीज आते थे उससे अब संख्या लगभग दोगुनी हो चुकी है.
और स्टाफ की है जरूरत: पॉली क्लिनिक में पंचकर्म और शल्य क्रिया शुरू होने के बाद अधिक स्टाफ की जरूरत है. हालांकि डीएमएफ फंड से स्टाफ तैनात किए गए हैं, लेकिन जिस तरह की सुविधा यहां दी जा रही है उसके हिसाब से और स्टाफ की जरूरत है. साफ सफाई पर विशेष फोकस करने के साथ ही पंचकर्म की क्रिया के दौरान बेड और अन्य उपकरणों को ठीक करना, आईपीडी वार्ड में स्टाफ नर्स और अन्य टेक्निकल स्टाफ की भी जरूरत बनी हुई है.
अभी हमें और भी स्टाफ डीएमएफ फंड से मिलने वाले हैं. व्यवस्था और भी दुरुस्त की जाएगी. जल्द ही आयुर्वेद अधिकारी का कार्यालय भी यहां शिफ्ट होगा.- डॉ उदय शर्मा, जिला आयुर्वेद अधिकारी
छत्तीसगढ़ का पहला ऑपरेशन थिएटर वाला पॉली क्लिनिक: इस विषय में जिला आयुर्वेद अधिकारी डॉ उदय शर्मा ने बताया कि कोरबा में छत्तीसगढ़ का पहला आयुर्वेद विभाग का अस्पताल है, जहां ऑपरेशन थिएटर की शुरुआत हुई है. यहां सफल 12 सर्जरी की जा चुकी है. तीन शिफ्ट में चिकित्सक और अन्य स्टाफ की ड्यूटी लगाई गई है.
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