दिल्ली ब्लास्ट में बड़ा खुलासा! शाहीन-परवेज ने बनाए थे भेड़ियों के नाम पर टीम, ‘Wolf Hour’ में होती थी बातचीत, डिकोड हुआ आतंकी कोड
दिल्ली ब्लास्ट की जांच आगे बढ़ती जा रही है और हर दिन नए खुलासे हो रहे हैं. जांच एजेंसियों ने दिल्ली ब्लास्ट से जुड़े शाहीन परवेज और अन्य आरोपियों के खिलाफ एक बड़ा खुलासा किया है. पता चला है कि आरोपी अपनी आतंकी गतिविधियों का प्लान बनाने और आपस में संपर्क के लिए रात के एक खास समय का इस्तेमाल करते थे, जिसे वे ‘वुल्फ आवर’ (भेड़िये का समय) कहते थे.
जांच के मुताबिक आरोपी रात 11 बजे से 2 बजे के बीच सबसे ज्यादा सक्रिय होते थे. इस दौरान ही उनकी ज्यादातर बातचीत और गतिविधियां होती थीं. चैटबॉक्स के मैसेज से लेकर आपसी बातचीत का पूरा ब्यौरा इसी समय के दैरान का मिला है. बताया जा रहा है कि शाहीन ‘हाउल’ (Howl) कोड के जरिए ही बातचीत की शुरुआत करती थी.
वाट्सएप ग्रुप ‘वुल्फ पैक’ से जुड़ाव
जांच में ‘वुल्फ पैक’ नाम के एक वाट्सएप ग्रुप का भी पता चला है, जिससे कई लोग जुड़े हुए थे. इस ग्रुप की एडमिन शाहीन ही बताई जा रही है. मुख्य आरोपी परवेज और आरिफ भी इसी ग्रुप से जुड़े थे, आरिफ के नंबर के आगे ‘स्पाइरो’ नाम लिखा हुआ पाया गया. ग्रुप में ग्रिफ़िथ और कुरनेलियुस जैसे कोड नामों का भी इस्तेमाल किया जाता था.
महिला आतंकियों की टीम ‘ऑरोरा’ और ‘लूना’
जांच एजेंसियों ने बताया कि ग्रुप से पता चला है कि शाहीन महिला आतंकियों की दो अलग-अलग टीमें बना रही थी. उसने इन टीमों के नाम मादा भेड़ियों के नाम पर ‘ऑरोरा’ और ‘लूना’ रखे थे. शाहीन जिसे ग्रुप में मैडम सर्जन या अल्फा कहा जाता था, वुल्फ आवर में ही सभी जरूरी संदेश कोड वर्ड में देती थी.
भेड़ियों की तरह घात लगाकर हमले की साजिश
बताया जा रहा है कि शाहीन आरोपियों को भेड़ियों के पैटर्न पर ही घात लगाकर हमला करने की सलाह देती थी. ग्रुप में परवेज की तरफ से ‘लोन वुल्फ अटैक’ के बारे में भी जानकारी पूछी गई थी. इसके अलावा, परवेज के घर से छापेमारी के दौरान चापड़ (एक तरह की विस्फोटक सामग्री) भी बरामद हुई है. अब देखना होगा इस जांच में आगे क्या-क्या भेद खुलते हैं.
Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.