Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Dr. Harisingh Gour University: स्टैनफोर्ड और एल्सेवियर की सूची में सागर यूनिवर्सिटी के 12 प्रोफेसर श... Ramanujganj Van Vatika: तीन महीने में पूरी होगी रामानुजगंज वन वाटिका की तस्वीर, ओपेन जिम और चिल्ड्रे... Raipur Health News: नवरात्रि उपवास में गरबा के साथ कैसे रखें सेहत का ख्याल? जानिए एनर्जी बढ़ाने के आ... Bhilai News: सीएम के कार्यक्रम में बच्चों को घंटों बैठाए रखने पर विवाद, कांग्रेस ने की कार्रवाई की म... Raipur Crime News: आमानाका थाना क्षेत्र में 3 साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म, AIIMS का सिक्योरिटी गार्... Bastar Local Products: दंतेवाड़ा के जैविक चावल और वनोपज को मिली नई पहचान, महिला FPO ने शुरू किया ब्र... Kavirdha News: कवर्धा में किसानों का बड़ा आंदोलन खत्म, गन्ने का भाव बढ़कर हुआ 425 रुपये, सरकार ने मा... Kanker News: कांकेर के सीएएफ कैंप में अनोखी पहल, जवान रूपधर चौहान अपने हाथों से बना रहे हैं मां दुर्... Jagdalpur News: बस्तर बाढ़ पीड़ितों के लिए प्रशासन का बड़ा कदम, 25 करोड़ से अधिक की राहत राशि सीधे ख... Navratri 2026 Date & Muhurat: नवरात्रि पर बन रहे हैं बेहद दुर्लभ योग, जानिए नौ दिनों के स्वरूपों की ...

रेलवे स्टेशन पर लूट! GST घटने के बाद भी भोपाल में ₹14 की पानी की बोतल ₹15 में बिक रही, 44 दिन से नहीं आया नया स्टॉक

24

भोपाल। क्या आप मानने को तैयार हैं कि जिन रेलवे स्टेशनों पर प्रतिदिन 7500 पानी की बोतलें बिक जाती हों, वहां पिछले डेढ़ महीने से पानी का नया स्टाक ही नहीं आया! भोपाल के रेलवे स्टेशनों पर ऐसा ही होता दिख रहा है। जीएसटी सुधार के बाद रेलवे ने बोतलबंद पानी की दरों में एक रुपये की कटौती की थी। अब बोतल 15 रुपये की जगह 14 रुपये लीटर बिकनी थी, लेकिन भोपाल और रानी कमलापति रेलवे स्टेशन पर यह दर लागू नहीं हुआ। दुकानदार कहते हैं कि बोतल पर प्रिंट रेट 15 रुपया लिखकर आया है तो यही देना होगा।

रेलवे बोर्ड में उप निदेशक कैटरिंग रंगराजन अनंतरत्नम के हस्ताक्षर से 20 सितंबर को सभी महाप्रबंधकों और आईआरसीटीसी के प्रबंध संचालक आदि के लिए एक आदेश जारी किया। इसमें बताया गया कि जीएसटी सुधार के बाद जो स्थिति बनी है उसके तहत बोतलबंद पानी का अधिकतम खुदरा मूल्य एक लीटर वाली बोतल पर 15 रुपये से घटाकर 14 रुपये और आधा लीटर बोतल के लिए 10 रुपये से घटाकर नौ रुपये करना है। नई दरों को 22 सितंबर से लागू किया जाना था। पांच अक्टूबर की रात यानी 44 दिन बीत जाने के बाद भी यह आदेश भोपाल में लागू नहीं हो पाया।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.