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MP की पहली महिला नक्सली का सरेंडर: तीन राज्यों की मोस्ट वांटेड को क्यों मिले ₹4 लाख?

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मध्य प्रदेश के नक्सल प्रभावित जिला बालाघाट में राज्य की पहली 14 लाख की इनामी महिला नक्सली जिसने हथियारों के साथ आत्मसमर्पण किया है. महिला नक्सली ने सुरक्षा बलों के सामने अपने आप को समर्पित कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला लिया. इस आत्मसमर्पण के बदले उसे कुल 4 लाख 10 हजार रुपये का इनाम दिया गया है.

इससे पहले बालाघाट की पांच महिला नक्सलियों ने आत्मसमर्पण तो किया था, लेकिन उनमें से किसी ने भी हथियार नहीं सौंपे थे. इस बड़ी कामयाबी को हॉक फोर्स की बड़ी सफलता माना जा रहा है. वहीं, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी X पर पोस्ट कर जानकारी दी है कि आत्मसमर्पण नीति के तहत यह पहला नक्सली सरेंडर है.

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, बालाघाट के ग्राम चोरिया में स्थापित हो रहे नए हॉक फोर्स कैंप में 22 वर्षीय महिला नक्सली सनीला उर्फ सुनीता आयाम ने आत्मसमर्पण किया. सनीला वर्ष 2024 से नक्सल संगठन के एमएमसी जोन प्रभारी और सीसी मेंबर रामदेर की हथियारबंद गार्ड के रूप में सक्रिय थी.

वह मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ की मोस्ट वांटेड सूची में शामिल थी. बताया जा रहा है कि सीसी मेंबर रामदेर पर तीनों राज्यों की ओर से मिलाकर लगभग 3 करोड़ रुपये का इनाम घोषित है. ऐसे में उसकी गार्ड रही सनीला का आत्मसमर्पण नक्सल संगठन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. उसने आत्मसमर्पण के समय इंसास राइफल, तीन मैगजीन में 30 जिंदा कारतूस, एक बीजीएल और अन्य सामग्री पुलिस को सौंपी.

कुल मिलाकर मिला 4 लाख का इनाम

आत्मसमर्पण नीति के तहत, सुनीता को तुरंत 50 हजार रुपये की आर्थिक मदद दी गई. इसके अलावा, इंसास राइफल के लिए साढ़े तीन लाख रुपये और तीन मैगजीन के लिए दस हजार रुपये का इनाम दिया गया है. इस तरह कुल मिलाकर उसे 4 लाख 10 हजार रुपये का इनाम मिला है.

समाज के विकास में योगदान देना चाहती है

पुलिस ने बताया कि सुनीता के पिता भी पहले छत्तीसगढ़ में नक्सल संगठन से जुड़े थे, जिन्होंने हाल ही में सितंबर 2025 में आत्मसमर्पण किया था. पूछताछ के दौरान सुनीता ने बताया कि वह राज्य सरकार की आत्मसमर्पण नीति से प्रभावित होकर समाज की मुख्यधारा में लौटना चाहती थी. उसने यह भी कहा कि जंगलों में हिंसा और भय का जीवन छोड़कर अब वह समाज के विकास में योगदान देना चाहती है. इसके साथ ही सुनीता का कहना है कि वह अपने पिछले कल में लौटना नहीं चाहती न हीं उसे दोहराना.

और भी नक्सली कर सकते हैं आत्मसमर्पण

हॉक फोर्स के डीएसपी अखिलेश गौर ने महिला नक्सली से पूछताछ की जिसमें उसने बताया कि उसने कुछ हथियार जंगल में छिपा रखे हैं. इसके बाद सेनानी शियाज के नेतृत्व में सहायक सेनानी अखिलेश गौर और रूपेंद्र धुर्वे की टीम ने गोपनीय सर्च ऑपरेशन चलाकर जंगल से छिपाए गए हथियार बरामद कर लिए. इस प्रकार यह आत्मसमर्पण अभियान पूर्णतः सफल रहा. विशेषज्ञों का मानना है कि सुनीता के सरेंडर के बाद बालाघाट क्षेत्र में सक्रिय अन्य नक्सली भी आने वाले दिनों में आत्मसमर्पण कर सकते हैं. इस सफलता के बाद पुलिस महानिरीक्षक संजय सिंह और पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा ने हॉक फोर्स की सराहना की और टीम को इनाम देने की घोषणा की.

सीएम मोहन यादव ने किया एक्स पर पोस्ट

इस बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी अपने एक्स पर पोस्ट करते हुए इस आत्मसमर्पण की प्रशंसा की. उन्होंने लिखा- प्रभावी आत्मसमर्पण नीति के तहत पहला नक्सली सरेंडर है. यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में राज्य नक्सल नियंत्रण के लक्ष्य की ओर अग्रसर है. मध्य प्रदेश पुलिस को नक्सली गतिविधियों पर नियंत्रण में लगातार सफलता मिल रही है. 1 नवंबर को बालाघाट जिले के लांजी थाने अंतर्गत चोरिया कैंप में 14 लाख की इनामी महिला नक्सली सुनीता ने हथियारों सहित आत्मसमर्पण किया. यह प्रदेश की प्रभावी आत्मसमर्पण नीति के तहत पहला समर्पण है. पूर्व में भी नक्सलियों के समर्पण और मुठभेड़ों में पुलिस को सफलता मिलती रही है.

साल 2022 में जुड़ी थी माओवादी संगठनों से

हॉक फोर्स के डीएसपी अखिलेश गौर ने बताया कि सशस्त्र हार्डकोर की 22 वर्षीय महिला नक्सली छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के गोमवेटा भैरमगढ की रहने वाली है. उसका नाम सलीना उर्फ सुनीता पिता बिसरु ओयाम है. यह महिला नक्सली एसीएम के पद पर रहते हुए सेंट्रल कमेटी के प्रमुख सदस्य सीसीएम रामदेर नक्सली की सुरक्षा गार्ड रह चुकी है. जो वर्ष 2022 में माओवादी संगठनों से जुड़ी थी, जिसने माड़ क्षेत्र में 06 महीने का प्रशिक्षण लिया और फिर सेंट्रल कमेटी के सदस्य रामदेर के सुरक्षा गार्ड के रूप में माड़ क्षेत्र में काम करना शुरू किया.

ऐसे पहुंची आत्मसमर्पण के लिए सुनीता

सुनीता, रामदेर की 11 सदस्यी टीम के साथ एमएमसी जोन दर्रेकसा क्षेत्र पहुंची जहां जीआरबी डिवीजन में सक्रिय थी और मलाजखंड दर्रेकसा दल में एसीएम के पद पर थी, जिस पर कुल 14 लाख का ईनाम घोषित था. सुनीता इंसास राइफल, विंडोरी बैग, पिट्ठू बैग और वर्दी के साथ दलम से अलग होकर निकल गई. इसके बाद उसने जंगल में इंसास राइफल, विंडोरी बैग, पिट्ठू बैग और वर्दी को डंप में छिपाया, फिर आत्मसमर्पण करने के उद्देश्य से पुलिस कैंप चौरिया पहुंची.

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