Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
सीहोर में प्रशासनिक दावों की खुली पोल, उफनते नाले के बीच कमर तक पानी में जान जोखिम में डालकर निकली श... चिटफंड ठगी पर ED की बड़ी स्ट्राइक: विशाखापट्टनम और हैदराबाद में छापेमारी, ₹1.01 करोड़ कैश बरामद व 18... संसद में नीट पेपर लीक और पुलिस कार्रवाई पर हंगामा: गृह मंत्री अमित शाह के जवाब की मांग पर अड़ा विपक्... पूर्णिया सांसद पप्पू यादव की बढ़ीं कानूनी मुश्किलें, राम मंदिर चोरी पर नुक्कड़ नाटक करने के मामले मे... दलीप ट्रॉफी 2026: वेस्ट जोन टीम में बड़ा बदलाव, सरफराज खान की जगह 25 साल के जय गोहिल को मिला मौका फरहान अख्तर का रणवीर सिंह पर तीखा तंज: 'डॉन 3' की शूटिंग से 1 महीने पहले एक्टर के पीछे हटने पर बयां ... रूस की सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, यूक्रेन युद्ध का विरोध करने वाली एकमात्र पार्टी 'याब्लोको' चुनाव... प्राइमरी मार्केट में कमाई का महा-कुंभ: 30 सितंबर की SEBI डेडलाइन से पहले ₹45,000 करोड़ के IPO लाने क... होटल का Wi-Fi इस्तेमाल करते हैं तो हो जाएं सावधान! माइक्रोसॉफ्ट ने 'कैप्टिवक्रंच' साइबर अटैक को लेकर... नाग पंचमी 2026: सावन सोमवार और नाग पंचमी का दुर्लभ संयोग! जानें नाग देवता की पूजा की परंपरा और कथा

झूठ बोलने पर बड़ी कार्रवाई: शहडोल कलेक्टर केदार सिंह पर हाईकोर्ट ने लगाया ₹2 लाख का भारी जुर्माना

27

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने शहडोल के कलेक्टर डॉक्टर केदार सिंह पर गंभीर टिप्पणी करते हुए दो लाख रुपये का जुर्माना लगाया है. इसके साथ ही कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह राशि कलेक्टर केदार सिंह को अपने व्यक्तिगत खाते से चुकानी होगी. हाईकोर्ट के जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनीन्द्र कुमार सिंह की डिवीजन बेंच में हुई सुनवाई के बाद, अदालत ने झूठा हलफनामा देने पर शहडोल कलेक्टर केदार सिंह को अवमानना नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं. पूरा मामला एनएसए (राष्ट्रीय सुरक्षा कानून) के तहत की गई एक गलत कार्रवाई से जुड़ा है.

डिवीजन बेंच ने सुनवाई के बाद आदेश पारित करते हुए कहा कि कलेक्टर द्वारा कोर्ट में प्रस्तुत हलफनामे में झूठी जानकारी दी गई थी, जिससे न्यायालय को गुमराह किया गया. दरअसल, शहडोल जिले के ब्यौहारी तहसील के ग्राम समन निवासी हीरामणि बैस ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि उनके पुत्र सुशांत बैस को प्रशासन ने गलत तरीके से एनएसए के तहत हिरासत में ले लिया.

याचिकाकर्ता के अनुसार, पुलिस अधीक्षक ने एनएसए लगाने की सिफारिश नीरजकांत द्विवेदी नामक व्यक्ति पर की थी, लेकिन कलेक्टर ने गलती से सुशांत बैस के नाम पर आदेश जारी कर दिया, जिससे उसके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ.

24 सितंबर को अदालत के निर्देश पर कलेक्टर डॉ. केदार सिंह और एसपी रामजी श्रीवास्तव कोर्ट में उपस्थित हुए थे. उनकी दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) एस.एस. शुक्ला को भी शपथपत्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे. एसीएस ने कोर्ट में कहा कि कलेक्टर कार्यालय के बाबू से टाइपिंग में गलती हो गई थी, जिसके कारण यह त्रुटि हुई और संबंधित कर्मचारी को नोटिस दिया गया है. हालांकि अदालत इस स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं हुई.

कोर्ट ने पाया कि कलेक्टर द्वारा दिए गए हलफनामे में यह उल्लेख किया गया था कि कार्रवाई अपराध क्रमांक 44/22 के आधार पर की गई है, जबकि वह प्रकरण पहले ही समाप्त हो चुका था. साथ ही कलेक्टर ने जिन लोगों के बयान प्रस्तुत किए थे, वे वर्ष 2022 में दर्ज किए गए थे, जो संदर्भहीन थे.

याचिकाकर्ता के वकील ब्रह्मेन्द्र प्रसाद पाठक ने तर्क दिया कि सुशांत की फरवरी में शादी हुई थी और सितंबर में जब एनएसए लगाया गया, तब उसकी पत्नी गर्भवती थी. मार्च में बेटी के जन्म के बावजूद सुशांत उसे देख भी नहीं सका. इस कारण यह कार्रवाई न केवल अवैध थी बल्कि मानवीय दृष्टि से भी अन्यायपूर्ण थी.

अदालत ने इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही मानते हुए कहा कि किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ इस तरह का खिलवाड़ अस्वीकार्य है. झूठा हलफनामा देने पर कोर्ट ने डॉ. केदार सिंह को अवमानना नोटिस जारी करने के निर्देश दिए और दो लाख रुपये का जुर्माना व्यक्तिगत रूप से भरने का आदेश दिया.

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.