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मिडिल ईस्ट में मुकेश अंबानी का बड़ा दांव! 3 देशों के साथ की अरबों डॉलर की डील, बदलेंगे व्यापार के समीकरण

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वाशिंगटन की ओर से दो रूसी उत्पादकों पर प्रतिबंध लगाने के बाद, रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने मिडिल ईस्ट और अमेरिका से लाखों बैरल कच्चा तेल खरीदा है. ईटी की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि रिलायंस ने सऊदी अरब के खफजी, इराक के बसरा मीडियम और कतर के अल-शाहीन से कई ग्रेड के कच्चे तेल के साथ-साथ कुछ अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट कच्चे तेल की खरीदारी की है. उन्होंने कहा कि माल दिसंबर या जनवरी में पहुंचाए जाने की उम्मीद है.

रिलायंस इस साल मात्रा के हिसाब से भारत का सबसे बड़ा रूसी तेल आयातक रहा है, जो ब्लैक लिस्ट डाली गई कंपनियों में से एक, रोसनेफ्ट पीजेएससी के साथ लॉन्ग टर्म कांट्रैक्ट के माध्यम से कच्चा तेल ले रहा है. व्यापारियों ने कहा कि हालांकि यह कंपनी आमतौर पर मध्य पूर्वी ग्रेड के कच्चे तेल की खरीदारी करता है, लेकिन हाल की खरीदारी, जिसमें अमेरिकी प्रतिबंधों से पहले इस सप्ताह की शुरुआत में हुए कुछ लेनदेन भी ट्रांजेक्शन हैं, सामान्य से अधिक सक्रिय रही है.

बाकी खरीदार भी बाजार में मौजूद

कुल मिलाकर, रिलायंस ने इस महीने हाजिर बाज़ार से कम से कम 1 करोड़ बैरल तेल खरीदा है, जिसमें मिडिल ईस्ट का तेल सबसे ज़्यादा है, और ज़्यादातर कच्चा तेल अमेरिकी दंड के बाद खरीदा गया है. वैसे रिलायंस की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है. व्यापारियों ने बताया कि अन्य भारतीय रिफाइनर भी हाजिर बाजार में हैं, खासकर मिडिल ईस्ट, अमेरिका और ब्राज़ील से खरीदारी कर रहे हैं. गुरुवार को ओमान जैसे ग्रेड के तेल की कीमतों में मज़बूती देखी गई

खास बात तो ये है कि इंटरनेशनल मार्केट में खाड़ी देशों का कच्चा तेल ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में 5 फीसदी से ज्यादा का इजाफा देखने को मिला. रोसनेफ्ट और लुकोइल पीजेएससी पर प्रतिबंध लगने के बाद, रोसनेफ्ट समर्थित नायरा एनर्जी लिमिटेड को छोड़कर, प्रमुख भारतीय रिफाइनर्स को रूसी तेल का प्रवाह तेजी से गिरने की उम्मीद है. कुछ चीनी कंपनियों ने भी अमेरिकी बैन के प्रभाव का आकलन करते हुए खरीदारी रोक दी है.

4 दिन में 8 फीसदी का इजाफा

वैसे 20 अक्टूबर के बाद से खाड़ी देशों के कच्चे तेल की कीमतों में करीब 8 फीसदी का इजाफा देखने को मिल चुका है. आंकड़ों पर बात करें तो 20 अक्टूबर को ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें 61.01 डॉलर प्रति बैरल पर थी. जो बढ़कर 66 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच की है. इसका मतलब है कि 4 दिनों में ब्रेंट ऑयल की कीमतों में करीब 6 डॉलर प्रति बैरल का इजाफा देखने को मिला है. जिसका प्रमुख कारण दुनिया की बड़े इंपोर्टर्स की ओर से खाड़ी देश कच्चे तेल की डिमांड बढ़ गई है. अब देखना दिलचस्प होगा कि रूसी तेल को छोड़कर भारत के रिफाइनर सिर्फ खाड़ी देशों पर

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