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ट्रंप का नया दाँव! नाटो के मंच से मोदी, पुतिन और शी का नाम क्यों लिया? एक बयान से साधे तीन बड़े निशाने

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नाटो के महासचिव के सामने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक तीन से तीन निशाने लगाने की कोशिश की. जहां उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रूसी तेल इंपोर्ट को कम करने की बातचीत को उजागर किया. उन्होंने यूक्रेन पर पुतिन की युद्ध नीति और इस युद्ध को रोकने में शी की भूमिका पर भी बात की. उन्होंने कहा कि भारत साल कं अंत तक रूसी कच्चे तेल के इंपोर्ट को पूरी तरह से खत्म करने जा रहा है. उनकी पीएम मोदी से बात हुई है. वहीं दूसरी ओर उन्होंने कहा कि चीन और रूस के संबंध काफी अच्छे हो चले हैं. उन्होंने कहा कि इन दोनों देशों के करीब आने की बड़ी वजह पिछली सरकारों की लापरवाही है. इसके लिए उन्होंने बराक और बाइडेन सरकार को भी निशाने पर लिया. साथ ही उन्होंने चीन को लेकर कहा कि वो शी जिनपिंग से मुलाकात करेंगे. रूस यूक्रेन वॉर को खत्म करने में शी की अहम भूमिका हो सकती है. इसके अलावा अमेरिकी राष्ट्रपति ने रूस की दो कंपनियों पर बैन लगा दिया है. उन्होंने मौजूदा कार्यकाल में पहली बार रूस पर कोई कार्रवाई की है. इस पर विस्तार से चर्चा करते हैं.

भारत खत्म करेगा रूसी ऑयल इंपोर्ट

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार (स्थानीय समय) को कहा कि भारत साल के अंत तक रूसी तेल आयात में लगभग 40 फीसदी की कटौती करेगा. ट्रंप ने कहा कि जैसा कि आप जानते हैं, भारत ने मुझसे कहा था कि वे इसे बंद कर देंगे… यह एक प्रोसेस है. आप रूस से तेल खरीदना यूं ही बंद नहीं कर सकते. ट्रंप ने कहा कि रूसी तेल इंपोर्ट को फेजवाइज तरीके से समाप्त करने का प्रोसेस धीरे-धीरे होगा, और दावा किया कि भारत साल के अंत तक इसे “लगभग शून्य” कर देगा. उन्होंने व्हाइट हाउस में नाटो महासचिव मार्क रूट की मेज़बानी के दौरान पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा लेकिन साल के अंत तक, यह लगभग शून्य हो जाएगा. यह एक बड़ी बात है, यह लगभग 40 फीसदी तेल है. भारत बहुत अच्छा रहा है.

ट्रंप ने आगे कहा कि उन्होंने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात की और कहा कि वे बहुत अच्छे रहे हैं. इससे पहले मंगलवार को ट्रंप ने कहा था कि मैंने आज ही आपके प्रधानमंत्री से बात की. बहुत अच्छी बातचीत हुई. हमने व्यापार के बारे में बात की. वह इसमें बहुत रुचि रखते हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति ने आगे कहा ​कि हालांकि हमने कुछ समय पहले इस बारे में बात की थी कि पाकिस्तान के साथ युद्ध नहीं होना चाहिए. इसमें व्यापार का मुद्दा भी शामिल था, इसलिए मैं इस बारे में बात कर पाया.

भारत का रूसी तेल आयात

ट्रंप ने बार-बार कहा है कि मोदी ने उन्हें आश्वासन दिया है कि भारत रूस से तेल आयात कम करेगा, जो 2022 से यूक्रेन के साथ युद्ध में है. हालांकि, भारत ने किसी भी समझौते से इनकार किया है और उपभोक्ता हितों की रक्षा को अपनी प्राथमिकता बताया है. देश की ऊर्जा नीति स्थिर कीमतों और सुरक्षित आपूर्ति को प्राथमिकता देती है. ट्रंप ने भारतीय वस्तुओं पर 50 फीसदी टैरिफ लगाया था और नई दिल्ली से ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने का आग्रह किया था.

इससे पहले रविवार को, ट्रंप ने भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद की आलोचना जारी रखी और कहा कि नई दिल्ली तब तक टैरिफ का भुगतान करता रहेगा जब तक वह मास्को से अपने आयात को बंद नहीं कर देता. एयर फोर्स वन पर प्रेस के साथ बातचीत के दौरान, ट्रंप से पिछले हफ़्ते भारत द्वारा उनके और मोदी के बीच किसी भी बातचीत से इनकार करने के बारे में पूछा गया था.

उन्होंने कहा था, ठीक है, अगर उन्होंने ऐसा कहा है तो वे भारी टैरिफ चुकाते रहेंगे, लेकिन मुझे नहीं लगता कि उन्होंने ऐसा कहा है. नहीं, मैंने भारत के प्रधानमंत्री मोदी से बात की है, और उन्होंने कहा है कि वे रूसी तेल को कम करेंगे. ट्रंप ने आगे कहा ​कि लेकिन अगर वे रूसी तेल इंपोर्ट को जारी रखते हैं तो वे भारी टैरिफ चुकाते रहेंगे, और वे ऐसा नहीं करना चाहते.

इससे पहले, भारत ने ट्रंप की उस टिप्पणी पर प्रतिक्रिया व्यक्त की जिसमें मोदी ने उन्हें रूसी तेल खरीद रोकने का आश्वासन दिया था. भारत ने कहा कि देश की ऊर्जा आपूर्ति उसके राष्ट्रीय हितों और भारतीय उपभोक्ताओं की सुरक्षा की आवश्यकता से प्रेरित है. विदेश मंत्रालय के सचिव रणधीर जायसवाल ने पिछले हफ्ते कहा था कि ट्रंप और मोदी ने 9 अक्टूबर को बात की थी, जिस दौरान प्रधानमंत्री ने अमेरिकी राष्ट्रपति को गाजा शांति योजना की सफलता पर बधाई दी थी.

रूस और चीन के संबंधों को स्वीकारा

इस बीच, ट्रंप ने रूस के साथ चीन के जटिल संबंधों को स्वीकार किया और इसके लिए पिछली अमेरिकी नीतियों को ज़िम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि चीन थोड़ा अलग है. रूस के साथ उनके संबंध थोड़े अलग थे. यह कभी अच्छा नहीं था, लेकिन बाइडेन और ओबामा की वजह से उन्हें एक साथ आने के लिए मजबूर होना पड़ा. उन्हें कभी एक साथ आने के लिए मजबूर नहीं होना चाहिए था, लेकिन स्वभाव से, वे मित्रवत नहीं हो सकते. आपको चीन और रूस को एक साथ आने के लिए मजबूर नहीं करना चाहिए था. बाइडेन ने ऐसा किया, और ओबामा ने भी. उन्होंने ऊर्जा और तेल के कारण उन्हें एक साथ आने के लिए मजबूर किया.

क्या ट्रंप शी जिनपिंग से मिलेंगे?

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ अपनी आगामी बैठक के बारे में बात करते हुए, ट्रंप ने कहा कि वह “शायद” अपने चीनी समकक्ष के साथ रूसी आयात पर बात करेंगे, लेकिन उनका मुख्य ध्यान रूस और यूक्रेन के साथ युद्ध को कैसे समाप्त किया जाए, इस पर होगा. ट्रंप ने कहा कि मैं शायद इस बारे में बात करूंगा. मैं वास्तव में इस बारे में बात करूंगा कि हम रूस और यूक्रेन के साथ युद्ध को कैसे समाप्त करेंगे, चाहे वह ऊर्जा, तेल या किसी और माध्यम से हो. मुझे लगता है कि वह (शी जिनपिंग) बहुत ग्रहणशील होंगे. मुझे लगता है कि वह युद्ध को समाप्त होते देखना चाहेंगे.

ट्रंप ने आगे कहा कि उन्हें उम्मीद है कि चीनी राष्ट्रपति पुतिन पर “बड़ा प्रभाव” डाल सकते हैं और उन्हें युद्धविराम के लिए प्रेरित कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि पुतिन पर उनका बड़ा प्रभाव होगा. मुझे लगता है कि वह बहुत से लोगों पर बड़ा प्रभाव डाल सकते हैं. वह एक सम्मानित व्यक्ति हैं, एक बहुत मजबूत नेता हैं, बहुत बड़ा देश हैं, मुझे लगता है कि उनका बड़ा प्रभाव हो सकता है.

रूस की दो तेल कंपनियों पर बैन

डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को अपने दूसरे कार्यकाल में पहली बार रूस पर यूक्रेन से संबंधित प्रतिबंध लगाए. उन्होंने तेल कंपनियों लुकोइल और रोसनेफ्ट पर निशाना साधा. यह कदम यूरोपीय यूनियन के देशों द्वारा बुधवार को यूक्रेन के खिलाफ युद्ध के लिए मास्को पर प्रतिबंधों के 19वें पैकेज को मंजूरी देने के बाद उठाया गया है, जिसमें रूसी एलएनजी के इंपोर्ट पर प्रतिबंध भी शामिल है. ट्रंप के इन कदमों से पहले पिछले हफ्ते ब्रिटेन ने रोसनेफ्ट और लुकोइल पर प्रतिबंध लगाए थे.

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