Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Iran-Israel War Impact: ईरान युद्ध के कारण बढ़ सकते हैं पानी और कोल्ड ड्रिंक की बोतलों के दाम; भारतीय... मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का बड़ा फरमान: "मुसलमानों के लिए इस्लामी उत्तराधिकार कानून अनिवार्य"; संपत्ति... विकसित भारत 2047: हरियाणा बनेगा देश का 'ग्रोथ इंजन'! उद्योग और युवाओं के कौशल पर सरकार का बड़ा दांव;... दिल्ली-देहरादून हाईवे पर 'आपत्तिजनक नारा' लिखना पड़ा भारी! दो युवतियों समेत 3 गिरफ्तार; माहौल बिगाड़ने... सावधान! दिल्ली में 48 घंटे बाद बरसेगा पानी, यूपी-राजस्थान में 'तूफान' जैसी हवाओं का अलर्ट; IMD ने पह... आगरा में 'जहरीली गैस' का तांडव! कोल्ड स्टोरेज से रिसाव के बाद मची भगदड़, जान बचाने के लिए खेतों की त... Bus Fire News: जैसलमेर से अहमदाबाद जा रही स्लीपर बस में लगी भीषण आग, एक यात्री झुलसा; खिड़कियों से क... कश्मीर में VIP सुरक्षा पर 'सर्जिकल स्ट्राइक'! फारूक अब्दुल्ला पर हमले के बाद हिला प्रशासन; अब बुलेटप... ईरान की 'हिट लिस्ट' में Google, Apple और Microsoft? अब टेक कंपनियों को तबाह करेगा तेहरान; पूरी दुनिय... दिल्ली में 'Zero' बिजली बिल वालों की शामत! खाली पड़े घरों की सब्सिडी छीनने की तैयारी; क्या आपका भी बं...

एयर इंडिया हादसे पर सुप्रीम कोर्ट सख्त! पायलट के पिता की याचिका पर केंद्र को भेजा नोटिस, मांगी रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में न्यायिक जांच

21

अहमदाबाद एयर इंडिया हादसा मामले में जान गंवाने वाले पायलट कैप्टन सुमीत सभरवाल के 91 वर्षीय पिता ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर रखी है. उन्होंने दुर्घटना की न्यायिक जांच की मांग की है, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार सहित अन्य पक्षकारों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. सुमीत के पिता पुष्करराज सभरवाल की ओर से दायर याचिका में एयर इंडिया बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर विमान हादसे की निष्पक्ष, पारदर्शी और तकनीकी रूप से जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के एक रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में न्यायिक निगरानी वाली समिति के गठन की मांग की है. उन्होंने ये भी गुहार लगाई है कि इस समिति में विमानन क्षेत्र के स्वतंत्र विशेषज्ञ सदस्य भी हों.

गुजरात के अहमदाबाद में 12 जून को विमान उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गया था. इसमें 260 लोगों की मौत हो गई थी. सभरवाल और फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स की संयुक्त याचिका में कहा गया है कि केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय और डीजीसीए की ओर से वर्तमान में की जा रही जांच और उसके अनुसरण में पेश 15 जून की प्रारंभिक रिपोर्ट त्रुटिपूर्ण है. इसमें गंभीर खामियां हैं.

हादसे की वजह पायलट की गलती को बताया गया

याचिकाकर्ताओं का तर्क है, रिपोर्ट में हादसे की वजह पायलट की गलती को बताया गया है. जबकि अन्य स्पष्ट कारणों की अनदेखी की गई है. इनकी स्वतंत्र जांच की जरूरत है. हादसे के सटीक कारण की पहचान किए बिना अधूरी जांच भविष्य के यात्रियों के जीवन को खतरे में डालती है. व्यापक रूप से विमानन सुरक्षा को कमजोर करती है, जिससे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन होता है.

याचिका में जांच में जिन कमियों का जिक्र

याचिकाकर्ताओं ने चुनिंदा खुलासों के जरिए तथ्यात्मक दिशाभ्रम पर जोर दिया है. खासकर उन क्रू मेंबर के खिलाफ जो अपना बचाव नहीं कर सकते. याचिका में जांच में जिन कमियों का जिक्र किया गया है, उनमें क्रू इनपुट से पहले अस्पष्टीकृत आरएटी तैनाती, डिजाइन-स्तर की खामियों की जांच में विफलता, अविश्वसनीय ईंधन स्विच मूवमेंट और पायलट पर गलत आरोप और बोइंग 787 जैसी घटनाओं की अनदेखी की बात कही गई है.

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.