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केदारनाथ यात्रा में बड़ा बदलाव! गौतम अडानी ने शेयर किया रोपवे प्रोजेक्ट का शानदार वीडियो, अब दर्शन होंगे बेहद आसान

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गौतम अडानी ने हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पहले ट्विटर) पर एक वीडियो शेयर करते हुए बताया कि अब केदारनाथ की कठिन चढ़ाई को आसान बनाया जा रहा है. अडानी ग्रुप उत्तराखंड के पवित्र केदारनाथ धाम को सोनप्रयाग से जोड़ने के लिए एक अत्याधुनिक रोपवे बना रहा है. यह रोपवे श्रद्धालुओं की यात्रा को पहले से कहीं ज्यादा सरल, सुरक्षित और कम समय में पूरा करने में मदद करेगा.

36 मिनट में तय होगी 12.9 किमी की दूरी

यह नया रोपवे सोनप्रयाग से लेकर केदारनाथ तक कुल 12.9 किलोमीटर लंबा होगा. अभी तक इस यात्रा को पूरा करने में लगभग 8 से 9 घंटे लगते हैं, जिसमें पैदल चढ़ाई और मौसम की चुनौतियां शामिल होती हैं. लेकिन इस रोपवे के बनने के बाद यह दूरी केवल 36 मिनट में तय की जा सकेगी. यह विशेष रूप से बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के लिए बड़ी राहत की बात है.

हर घंटे 1800 यात्री कर सकेंगे सफर

इस परियोजना में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है. एक समय में 35 लोगों की क्षमता वाले गोंडोला (केबिन) से हर घंटे 1800 यात्री एक दिशा में यात्रा कर पाएंगे. यह भारत का पहला 3S ट्राई-कैबल रोपवे होगा, जो दुनिया की सबसे सुरक्षित और एडवांस्ड रोपवे तकनीकों में गिना जाएगा.

अडानी ग्रुप का बड़ा निवेश और वादा

IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस परियोजना पर कुल 4,081 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है. अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (AEL) के रोड्स, मेट्रो, रेल और वॉटर डिवीजन (RMRW) द्वारा इसका निर्माण किया जाएगा. कंपनी को इस प्रोजेक्ट को बनाने और उसके बाद 29 वर्षों तक इसका संचालन करने का अधिकार मिला है. निर्माण कार्य पूरा होने में लगभग 6 साल का समय लगेगा.

पर्यटन और पर्यावरण का संतुलन

IANS की एक रिपोर्ट में बताया गया कि इस प्रोजेक्ट का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि अडानी ग्रुप पर्यावरण संतुलन को भी ध्यान में रख रहा है. पहाड़ी इलाकों में निर्माण कार्य करना पर्यावरण के लिए चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन कंपनी का वादा है कि यह निर्माण कार्य स्थानीय लोगों की भागीदारी, सतत विकास और सरकारी मंजूरियों के अनुसार किया जाएगा.

पर्वतमाला परियोजना का हिस्सा

यह रोपवे केंद्र सरकार की पर्वतमाला परियोजना के तहत बनाया जा रहा है. इसका उद्देश्य पर्वतीय क्षेत्रों में रोपवे जैसे कनेक्टिविटी साधनों को बढ़ावा देना है, जिससे पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल मिले. केदारनाथ जैसे तीर्थस्थल पर यह सुविधा यात्रियों के लिए एक बड़ा वरदान साबित हो सकती है.

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