Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Maihar Golamath Temple: मैहर का वो अनोखा मंदिर जहाँ नहीं है एक भी जोड़, महाशिवरात्रि पर उमड़ा श्रद्ध... Viral Wedding: सोशल मीडिया पर परवान चढ़ा प्यार, 3.8 फीट की दुल्हन और 4.2 फीट के दूल्हे की बनी 'परफेक्... Mahashivratri 2026: दूल्हा बनकर निकले पातालेश्वर महादेव, माता पार्वती संग रचाया ब्याह; बारात में जमक... Indian Currency Update: अब भारतीय सिक्के पर दिखेगी 'वंदे भारत' ट्रेन, सरकार ने जारी किया 100 रुपये क... Mahakaleshwar Temple Decoration: 4 देशों के फूलों से महका महाकाल का दरबार, बेंगलुरु के 200 कलाकारों ... Ujjain Mahakal Darshan: महाशिवरात्रि पर 44 घंटे खुले रहेंगे बाबा महाकाल के पट, भस्म आरती में दिखा अद... Indian Navy Rescue: भारतीय नौसेना ने बीच समंदर में जापानी नाविक को किया एयरलिफ्ट, 200 किमी दूर से ऐस... Delhi EOL Vehicle News: दिल्ली में पुरानी गाड़ियों पर 'सर्जिकल स्ट्राइक', अब बिना नोटिस सीधे स्क्रैप... UP Politics: पूर्व मंत्री अनीस खान समेत 100 से ज्यादा दिग्गज आज थामेंगे सपा का दामन, अखिलेश यादव की ... Ghaziabad Crime News: गाजियाबाद में रिश्तों का कत्ल, ढाई साल की बेटी से अश्लील हरकत करते पिता को मां...

इस डिवाइस को लगाते ही रॉकेट बन जाएगा 5G इंटरनेट, IIIT-बेंगलुरु ने किया कमाल

5

मोबाइल नेटवर्क की सबसे बड़ी समस्या कवरेज गैप्स और सिग्नल ड्रॉप की है. अब इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी बेंगलुरु (IIIT-B) ने Reconfigurable Intelligent Surfaces (RIS) यानी स्मार्ट पैनल विकसित किए हैं. ये पैनल दीवारों या पोल पर लगाकर नेटवर्क सिग्नल को रीडायरेक्ट या फोकस कर सकते हैं, जिससे इंटरनेट स्पीड बढ़ेगी और कॉल ड्रॉप कम होंगे. खास बात यह है कि इन्हें मौजूदा 5G नेटवर्क में बिना बड़े बदलाव के आसानी से जोड़ा जा सकता है.

प्लग-एंड-प्ले सॉल्यूशन

RIS का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इन्हें मौजूदा 5G-Advanced नेटवर्क में आसानी से प्लग-एंड-प्ले की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है. यानी बिना नए टावर लगाए कवरेज को बेहतर किया जा सकता है. वहीं 6G नेटवर्क में इन्हें सीधे डिजाइन का हिस्सा बनाया जा सकता है, जिससे बीम मैनेजमेंट और परफॉर्मेंस और स्मार्ट हो जाएगी. इससे कंपनियों को कम टावर लगाने होंगे और लागत व ऊर्जा दोनों की बचत होगी.

रिसर्च और टेक्नोलॉजी डिजाइन

IIIT-B की टीम ने जो पैनल बनाया है, वह 3.5 GHz फ्रीक्वेंसी पर काम करता है, जो 5G के लिए अहम बैंड है. इसमें 16×16 ग्रिड में 256 यूनिट्स हैं, जिन्हें 1-बिट PIN डायोड कंट्रोल करता है. ये छोटे-छोटे स्विच सिग्नल की दिशा तय करते हैं, जिससे नेटवर्क कवरेज और मजबूत होती है. साथ ही यह तकनीक अनवांटेड सिग्नल को ब्लॉक करके इंटरफेरेंस कम करती है.

RIS टेक्नोलॉजी के सामने अभी चुनौतियां भी हैं. जैसे, तेज गति से चल रहे यूजर्स (कार, ट्रेन, ड्रोन) के लिए यह तुरंत सिग्नल एडजस्ट करने में दिक्कत कर सकती है. इसे हल करने के लिए AI-आधारित प्रेडिक्टिव बीमफॉर्मिंग और रियल-टाइम सिग्नल एडजस्टमेंट पर काम हो रहा है. IIIT-B की टीम आगे सॉफ्टवेयर-डिफाइंड RIS और मल्टी-पैनल टेस्टिंग पर रिसर्च कर रही है, जिससे आने वाले समय में 5G और 6G दोनों और बेहतर हो सकेंगे.

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.