“जैसे महाभारत का संजय अपनी आँखों से देखकर धृतराष्ट्र को कुरुक्षेत्र की ग्राउंड रिपोर्ट से परिचय कराता था ठीक वही काम राजद के संजय यादव राजद और तेजस्वी को आगामी अजर मौजूदा राजनीति का दर्शन कराने से नहीं चूक रहे। कहने को तो संजय यादव हरियाणा से आते हैं लेकिन उनकी सियासत बिहार में खूब फल -फूल रही है। उनकी रणनीति से राजद को तो लाभ मिल ही रहा है ,राजद नेता तेजस्वी यादव भी संजय यादव की मंत्रणा से राजनीति को साधने का काम कर रहे हैं। सच तो यही है कि आजकल तेजस्वी यादव ख़ुद नहीं बल्कि संजय यादव की नज़र से राजनीति को देखते हैं।
संजय यादव ने कंप्यूटर साइंस और मैनेजमैंट की पढ़ाई की है और वो एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में नौकरी करते थे। बिहार आकर उन्होंने कुछ साल तक यहाँ की राजनीति को समझा, चुनावी समीकरण और आँकड़ों पर काम किया। और फिर बिहार की राजनीति को कैसे हांका जाए ,समझ गए और राजद को मजबूती देने में जुट गए। संजय यादव ने ज़रूरत के मुताबिक़ आरजेडी में कई तरह के तकनीकी और डिजिटल दौर के बदलाव भी किए हैं।
माना जाता है कि आरजेडी को लालू प्रसाद यादव की समाजिय न्याय कि पहचान के साथ ही एक नई पहचान दिलाने की कोशिश में संजय यादव की बड़ी भूमिका है। संजय यादव और मनोज झा जैसे नेता आरजेडी की सक्रियता दिल्ली के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों तक पहुँचाने की कोशिश में लगे हैं।
राष्ट्रीय जनता दल की राजनीति को यदि पिछले एक दशक में गहराई से देखा जाए तो यह साफ दिखाई देता है कि पार्टी ने अपने पारंपरिक आधार को मज़बूत करने के साथ-साथ नए वर्गों, ख़ासकर पढ़े-लिखे और तकनीकी रूप से सक्षम युवाओं को जोड़ने की दिशा में ऐतिहासिक कदम बढ़ाया है। इस पूरी प्रक्रिया में संजय यादव जी की भूमिका सबसे अहम रही है।
संजय यादव ने आरजेडी के भीतर विभिन्न विचारधाराओं, पीढ़ियों और वर्गों को जोड़ने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनका मानना रहा कि पार्टी तभी मज़बूत होगी जब हर कार्यकर्ता अपने को संगठन से जुड़ा और सम्मानित महसूस करेगा। इसी सोच के कारण आरजेडी ने बिहार ही नहीं, बल्कि देशभर के विश्वविद्यालयों, महानगरों और गाँव-कस्बों तक अपना नेटवर्क मजबूत किया।
बिहार की सियासत में संजय यादव के बारे में आम लोग कम ही जानते हैं। कोई उन्हें तेजस्वी यादव का राजनीतिक सलाहकार कहता है तो कुछ लोग उन्हें तेजस्वी के निजी सलाहकार के तौर पर जानते हैं। कोई उन्हें तेजस्वी का मेंटर भी मानते हैं। राजद के अधिकतर नेता संजय के सियासी पैंतरे का लोहा मानते हैं।
तेजस्वी यादव और संजय यादव के बीच मित्रता इतनी गाढ़ी है संजय यादव आमतौर पर पर्दे के पीछे रहकर काम करते रहे हैं। वो तेजस्वी यादव के साथ साए की तरह नज़र आते हैं।
आज के दौर की राजनीति में सोशल मीडिया सबसे बड़ा हथियार है। संजय यादव ने इसे बहुत पहले ही समझ लिया था। उन्होंने आरजेडी को डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर मजबूती से खड़ा किया। चाहे फेसबुक हो, ट्विटर या फिर ग्राउंड लेवल पर डिजिटल अभियान—संजय यादव ने आरजेडी की छवि को तकनीकी रूप से सशक्त बनाया। इसके कारण पार्टी का संदेश सीधा जनता तक पहुँचा और युवाओं के बीच पार्टी की पहुँच बढ़ी।
आरजेडी हमेशा से सामाजिक न्याय की राजनीति करती रही है, लेकिन संजय यादव जी ने इस राजनीति में विकास का पिच जोड़ने पर विशेष बल दिया। उनका मानना है कि 21वीं सदी का बिहार केवल सामाजिक न्याय से ही नहीं, बल्कि शिक्षा, रोज़गार, स्वास्थ्य और आधारभूत संरचना के विकास से ही मज़बूत होगा। इसी कारण उन्होंने लगातार इस रणनीति पर काम किया कि आरजेडी सामाजिक न्याय और विकास—दोनों को एक साथ लेकर चले।
यादव का जन्म 24 फ़रवरी 1984 को हरियाणा के महेंद्रगढ़ के नांगल सिरोही गाँव में हुआ था । 2007 में, उन्होंने मध्य प्रदेश के भोपाल स्थित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से कंप्यूटर विज्ञान में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त करके अपनी पढ़ाई पूरी की। यादव ने 2010 तक दिल्ली में तीन बहुराष्ट्रीय निगमों के साथ काम किया। वह अपना अधिकांश समय डेटा विश्लेषण और राज्य के राजनीतिक और सामाजिक समीकरण का विश्लेषण करने में लगाते हैं।
यादव की मुलाकात तेजस्वी से तब हुई थी जब तेजस्वी दिल्ली डेयरडेविल्स टीम के लिए इंडियन प्रीमियर लीग में खेलते थे। उन्होंने समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव के साथ भी काम किया था ।
वह 2012 में राजद में शामिल हुए। उन्होंने बिहार में 2015 और 2020 के चुनावों के दौरान पार्टी को आगे बढ़ाने में मदद की और तेजस्वी के करीबी सहयोगी रहे ।
दिल्ली के उच्च शिक्षण संस्थानों में आरजेडी की मज़बूत नींव डालने और वहाँ पढ़ने वाले छात्रों-युवाओं को पार्टी से जोड़ने का काम भी संजय यादव ने किया। इससे न केवल आरजेडी का दायरा बढ़ा, बल्कि पढ़े-लिखे और सक्षम युवाओं की एक पूरी टीम पार्टी को मिली, जिसने बिहार की राजनीति में नई ऊर्जा भर दी।
संगठन की मज़बूती, तकनीकी संसाधनों का उपयोग, सोशल मीडिया की प्रभावशाली उपस्थिति और विकास की राजनीति—इन सबको रणनीति के रूप में आगे बढ़ाकर संजय यादव जी ने आरजेडी को बिहार की सबसे बड़ी पार्टी बनाने में अहम योगदान दिया।
संजय यादव जी केवल एक नेता या सलाहकार भर नहीं, बल्कि ऐसे रणनीतिकार हैं जिन्होंने यह साबित किया कि यदि राजनीतिक दल समय के साथ अपनी रणनीति बदलें और तकनीक व शिक्षा से जुड़े वर्गों को साथ लाएँ, तो उन्हें न केवल राजनीतिक सफलता मिलती है बल्कि वे आने वाली पीढ़ी के लिए भी उपयोगी साबित होते हैं।
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