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‘शादी नहीं हो रही…’ कथावाचक अनिरुद्धाचार्य ने दिया था युवक को ये सुझाव, अब हत्या पर क्या बोले कथावाचक

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मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले के पड़वार गांव निवासी 49 वर्षीय अतिथि शिक्षक इंद्र कुमार तिवारी की उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में बेरहमी से हत्या कर दी गई. इंद्रकुमार की हत्या की कहानी की शुरुआत उस वायरल वीडियो से हुई, जिसमें उन्होंने जबलपुर के रिमझा क्षेत्र में आयोजित स्वामी अनिरुद्धाचार्य की भागवत कथा के दौरान सार्वजनिक मंच से अपनी शादी की समस्या को लेकर जिक्र किया था. अब इस घटना पर कथा वाचक स्वामी अनिरुद्धाचार्य महाराज की भी प्रतिक्रिया सामने आई है.

कथावाचक स्वामी अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि अप्रैल में एक कथा के दौरान इंद्रमणि तिवारी नामक व्यक्ति उनके पास प्रश्नोत्तरी में आए थे. उन्होंने कहा “महाराज मेरी उम्र 45 साल है, 18 एकड़ जमीन है, फिर भी मेरी शादी नहीं हो रही. महाराज ने उन्हें सलाह दी थी कि शादी के बजाय भजन करो. लेकिन उन्होंने स्पष्ट कहा कि उन्हें विवाह करना है गृहस्थ जीवन जीना है. लेकिन कुछ दिन बाद यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया.

क्या बोले स्वामी अनिरुद्धाचार्य?

स्वामी अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि उस वीडियो को एक मुस्लिम महिला और अन्य युवकों ने देख लिया. महिला ने हिंदू बनकर शादी का प्रस्ताव रखा. इंद्रमणि भोले-भाले आदमी थे, विश्वास कर बैठे. लड़की पहले से किसी की पत्नी थी, दोनों पति-पत्नी ने इंद्रमणि को झांसे में लिया, शादी की रस्म करवाई, मांग भरी, और उससे वसीयतनामा लिखवा लिया कि मरने के बाद पूरी संपत्ति उसकी पत्नी की होगी. इंद्रमणि ने डेढ़ लाख रुपये और गहने भी साथ ले लिए, अपनी जमीन गिरवी रखकर लेकिन यह सब एक बड़ी साजिश थी. इंद्रमणि की हत्या कर दी गई. मार दिया गया.

अनिरुद्धाचार्य के मुताबिक, जिस महिला और उसके युवकों ने किया, क्या यह धर्म है. यदि उन लोगों के अंदर धर्म जिंदा होता, तो इस तरह की घिनौनी हरकतें नहीं करते. आज लोग भगवान को भूल चुके हैं. ईमानदारी मर चुकी है. इसलिए ऐसे अपराध हो रहे हैं. मैंने कई बार कहा है अपने बच्चों को धर्मवान बनाओ, ईमानदार बनाओ. केवल वही बेटा अपने माता पिता को सुख दे सकता है जो धर्म पर चलता हो.

अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि बहुत सारी महिलाएं अपने पति को छोड़कर किसी और के साथ भाग जाती हैं, झूठे केस करती हैं और बहुत सारे पुरुष अपनी पत्नी होते हुए भी पराई स्त्रियों के चक्कर में पड़ जाते हैं. यह धर्म है क्या, सीता के वनवास के बाद भी राम ने दूसरा विवाह नहीं किया. यह धर्म का आदर्श है. धर्म मर गया, तभी तो समाज में अधर्म फैल रहा है. इसके साथ ही उन्होंने कहा हर स्त्री चाहती है कि उसका पति केवल उसी से प्रेम करे, लेकिन जब पति धर्मवान नहीं होगा, तो प्रेम नहीं टिकेगा. आज के लड़के लिव-इन में रहते हैं, गर्लफ्रेंड को ही सबकुछ समझते हैं. उन्हें यह नहीं पता कि धर्म क्या है. तीन बार आई लव यू कहे बिना नींद नहीं आती. आजकल की पीढ़ी धर्म को समझ ही नहीं पा रही है.

‘धोखा चाहे कोई भी दे, पाप है’

अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि धोखा चाहे कोई भी दे हिंदू हो, मुसलमान हो, सिख हो या ईसाई वह पाप ही कहलाता है. क्या मुसलमान का धर्म नहीं है कि वह अपनी पत्नी को धोखा न दे? क्या उसका धर्म नहीं है कि वह अपनी मां की सेवा करे? क्या कोई भी धर्म धोखे की अनुमति देता है? नहीं! फिर ये सब क्यों हो रहा है? क्योंकि लोगों के अंदर का धर्म मर गया है. धर्म को पुनः जागृत करें. अपनी बेटियों और बेटों को धर्म का पाठ पढ़ाएं. धर्मवान संतान ही समाज और परिवार को सुख दे सकती है. हर स्त्री-पुरुष धर्म के अनुसार चले, तभी यह समाज बचेगा. वरना अधर्म बढ़ेगा और ऐसी घटनाएं बार-बार दोहराई जाएंगी.

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