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पहलगाम के बाद सामने आई थी जो कमजोरी उसे ही अमरनाथ यात्रा में ताकत बनाने का प्लान, सुरक्षाबलों की है ये रणनीति

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अमरनाथ यात्रा देश की सबसे पवित्र तीर्थयात्राओं में से एक है. भक्त हिमालय के शांत और चुनौतीपूर्ण इलाकों से होते हुए जम्मू और कश्मीर में पवित्र अमरनाथ गुफा तक जाते हैं. इस यात्रा को संपन्न कराना सुरक्षाबलों के लिए बड़ी चुनौती होती है. ये वो यात्रा है जो आतंकियों के निशाने पर रही है. इस बार भी ऐसा ही है, लेकिन जवान मुस्तैद हैं. यात्रा को सुरक्षित बनाने का प्लान तैयार हो चुका है. यात्रा को सफल बनाने के लिए लोकल लोगों को खास तवज्जो दी जा रही है.

ये वही लोकल लोग हैं जो 22 अप्रैल को पहलगाम आतंकी हमले में कमजोरी साबित हुए थे. दरअसल, इस अटैक के बाद सुरक्षाबलों ने कई स्थानीय लोगों के खिलाफ कार्रवाई की थी. हमले को अंजाम देने वाले आतंकियों के मददगारों को एजेंसियों ने निशाने पर लिया था. उनके घरों को ध्वस्त किया गया. हालांकि उन चंद लोगों की वजह से हर कश्मीरियों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है. कश्मीर के ही बहुत से ऐसे लोग भी होते हैं जो सुरक्षाबलों की मदद करते हैं. अपने आसपास रहने वाले संदिग्ध लोगों की सूचना वे एजेंसियों को देते हैं. बता दें कि इस साल अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई से शुरू होगी और 9 अगस्त तक जारी रहेगी. इस तीर्थयात्रा में लाखों श्रद्धालु आते हैं.

क्या बना प्लान?

कश्मीर पुलिस के प्रमुख वीके बिरदी ने कहा कि सुरक्षित और सुचारू तीर्थयात्रा सुनिश्चित करने के लिए बहुस्तरीय और गहन सुरक्षा व्यवस्था की गई है. उन्होंने कहा कि 38 दिवसीय तीर्थयात्रा के लिए सुरक्षा व्यवस्था को क्षेत्रीय सहित विभिन्न स्तरों पर विभाजित किया गया है. यात्रा को स्थानीय लोगों से मिल रहे समर्थन के बारे में पूछे जाने पर बिरदी ने कहा कि स्थानीय लोगों के समर्थन के बिना यात्रा नहीं हो सकती. स्थानीय लोगों की मदद और समर्थन के कारण यात्रा सफल होती है. इस बार भी लोग यात्रियों का स्वागत करने और उन्हें हर संभव मदद देने के लिए उत्साहित हैं.

यात्रा से पहले फाइनल तैयारी

यात्रा से पहले तैयारियों को फाइनल रूप दिया जा रहा है. सुरक्षाबलों ने बुधवार को दक्षिण कश्मीर के पहलगाम, अनंतनाग और काजीगुंड में मॉक ड्रिल किया गया. श्रीनगर में पंथा चौक और उत्तरी कश्मीर के बांदीपोरा जिले में भी ये प्रैक्टिस की गई. पुलिस प्रमुख ने कहा कि अभ्यास का उद्देश्य किसी भी इमरजेंसी के समय हमारी सतर्कता और हमारी कार्रवाई और प्रतिक्रिया की तैयारी को देखना था. इस तरह के अभ्यास यात्रा मार्गों के साथ शिविरों, सड़कों जैसे हर स्थान पर आयोजित किए गए ताकि सभी सुरक्षाबल सतर्क रहें और उन्हें पता हो कि किसी भी इमरजेंसी से निपटने के लिए उन्हें क्या कार्य करने हैं.

अधिकारियों ने बताया कि उधमपुर में तैनात एनडीआरएफ की 13वीं बटालियन ने मॉक ड्रिल किया. उन्होंने बताया कि अभ्यास में बचाव कार्य, चिकित्सा सहायता और तीर्थयात्रियों के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन शामिल थे. एनडीआरएफ के इंस्पेक्टर मुंशी राम शर्मा ने बताया कि मॉक ड्रिल में एनडीआरएफ के सात अधिकारी और 56 जवान शामिल थे.

उधमपुर की डिप्टी कमिश्नर सलोनी राय ने जिले में तीर्थयात्रियों के लिए ठहरने के केंद्रों और सुविधाओं का निरीक्षण किया और बताया कि सभी व्यवस्थाएं की गई हैं. उन्होंने कहा, उधमपुर जिले में 26 ठहरने के केंद्र हैं, जिनमें 6,500 तीर्थयात्रियों को ठहराने की क्षमता है. हमने मौसम संबंधी या अन्य आपात स्थितियों के मामले में तीर्थयात्रियों को ठहराने के लिए केंद्र स्थापित किए हैं.

पंजाब पुलिस के अधिकारियों ने की मीटिंग

यात्रा को सुरक्षित बनाने के लिए पंजाब पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों की बुधवार को मीटिंग हुई. बता दें कि कई श्रद्धालु जम्मू और कश्मीर स्थित पवित्र गुफा में जाने के लिए पंजाब विशेषकर पठानकोट जिले से होकर गुजरते हैं. बुधवार को पंजाब के विशेष पुलिस महानिदेशक (कानून एवं व्यवस्था) अर्पित शुक्ला ने तीर्थयात्रा के लिए सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा और उसे मजबूत करने के लिए पुलिस, सेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियों की एक उच्च स्तरीय व्यापक सुरक्षा एवं समन्वय बैठक की अध्यक्षता की.

पठानकोट में आयोजित बैठक में यात्रा की रणनीतिक तैयारियों पर ध्यान केंद्रित किया गया, जिसमें पुलिस तैनाती, सुरक्षा उपाय, यातायात प्रबंधन और आपदा प्रबंधन जैसे पहलू शामिल थे. इस बीच पुलिस ने मार्ग के किनारे स्थित पेट्रोल पंपों, ढाबों, होटलों, गेस्ट हाउसों और सड़क किनारे स्थित अन्य प्रतिष्ठानों के मालिकों और कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया है कि वे किसी भी असामान्य गतिविधि, संदिग्ध वस्तु या अज्ञात व्यक्ति के दिखने पर बिना देरी किए निकटतम पुलिस स्टेशन को सूचना दें.

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