Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
India's Fastest Metro: भारत की सबसे तेज मेट्रो की रफ्तार ने चौंकाया, अब घंटों का सफर मात्र 30 मिनट म... India AI Impact Summit 2026: बिहार में तकनीक का नया दौर, राज्य सरकार ने ₹468 करोड़ के MoU पर किए हस्... Mamata Banerjee vs EC: "चुनाव आयोग की हिम्मत कैसे हुई?" सुप्रीम कोर्ट के नियमों के उल्लंघन पर भड़कीं... Delhi Kidnapping: पहले विश्वास जीता, फिर दूध पिलाने के बहाने बच्चा लेकर फरार! दिल्ली के अंबेडकर हॉस्... Rape Case Verdict: दुष्कर्म मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट का बड़ा फैसला, दोषी को 7 साल की कड़ी सजा और ... Bhupinder Hooda on Crime: "हरियाणा में वही सुरक्षित है जिसे कोई मारना नहीं चाहता"—बढ़ते अपराध पर हुड... Haryanvi Singer Harsh Gupta Arrested: हरियाणवी सिंगर हर्ष गुप्ता गिरफ्तार, पुलिस ने इस गंभीर मामले म... High-Tech Fraud: पेमेंट का फर्जी मैसेज दिखाकर लाखों के गहने ले उड़ा ठग, शातिर की तलाश में जुटी पुलिस Rohtak Gangwar: रोहतक में सरेआम गैंगवार, गोगा की 20 से अधिक गोलियां मारकर हत्या, CCTV में कैद हुई खौ... Haryana Vivah Shagun Yojana: हरियाणा में बेटी की शादी के लिए मिलेंगे 71,000 रुपये, जानें क्या है पात...

17वीं सदी का मंदिर, राजा ने करवाया था निर्माण… रांची में तालाबों से घिरे पहाड़ पर विराजते हैं भगवान जगन्नाथ

39

झारखंड की राजधानी रांची के धुर्वा थाना क्षेत्र के नीलांचल नामक एक जीवित पर्वत पर स्थित जगन्नाथपुर मंदिर का निर्माण वर्ष 1691 में कराया गया था. इस मंदिर का निर्माण बरकागढ़ रियासत के नागवंशी राजा ठाकुर ऐनी नाथ शाहदेव ने उत्कल पुरी के जगन्नाथपुर मंदिर के तर्ज पर करवाया गया था. यह मंदिर एक जीवित पहाड़ पर स्थित है मंदिर परिसर के चारों ओर घने वृक्ष हैं. वहीं इसके तीन छोर पर तालाब भी स्थित है. इसी मंदिर से लगभग 500 मीटर की दूरी पर स्थित एक और पहाड़ पर एक छोटा मंदिर का भी निर्माण किया गया है, जिसे मौसीबाड़ी के नाम से जाना जाता है. रथ यात्रा के अवसर पर महाप्रभु भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा और भाई बलभद्र के साथ भव्य रथ पर सवार होकर मुख्य मंदिर से मौसीबाड़ी पहुंचते है.

10 दिनों तक भगवान के तीनों विग्रह मौसीबाड़ी में ही रहते हैं और वहीं पर श्रद्धालुओं को दर्शन देते हैं. पुरी रथ यात्रा के दौरान 10 दिनों तक राजधानी रांची के धुर्वा थाना क्षेत्र के मौसीबाड़ी से लेकर मुख्य मंदिर तक के बीच में स्थित लभगभ 41.27 एकड़ क्षेत्रफल में भाग्य 10 दिवसीय रथ मेला का आयोजन होता है. जिसकी भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस मेले में शामिल होने के लिए, न सिर्फ झारखंड बल्कि देश के चार से पांच अन्य राज्यों के श्रद्धालु बड़ी संख्या में आते हैं.

इस बार के जगन्नाथपुर मंदिर के परिसर में लगने वाली ऐतिहासिक रथ मेले का टेंडर 51.51 लाख रुपए की बोली लगाकर हासिल किया गया है. जबकि पिछले वर्ष यानी वर्ष 2024 में इसी मेले का टेंडर डेढ़ करोड़ के पार चला गया था.

कब निकलेगी रथ यात्रा?

27 जून 2025 से 6 जुलाई 2025 तक इस बार 10 दिवसीय रथ मेले का रांची में आयोजन होने जा रहा है. इसके लिए विशेष तौर पर 40 फीट ऊंची और 25 फीट चौड़ी भव्य रथ, जिसे खींचने के लिए 8 पहिए लगाए गए हैं. जेष्ठ मास की पूर्णिमा के अवसर पर, 108 घडों के शीतल जल से स्नान करेंगे. ऐसी मान्यता है कि महाप्रभु जगन्नाथ समेत तीनों विग्रह की तबीयत खराब हो जाती है. इसके बाद सभी 15 दिनों के एकांतवास पर चले जाते हैं. इस दौरान उनका उपचार होता है. लगभग 15 दिनों के बाद इस वर्ष 26 जून को महाप्रभु जगन्नाथ समेत तीनों विग्रहों का नेत्रदान होगा और 27 जून को भव्य रथ यात्रा रांची में निकाली जाएगी.

10 दिन में पूरी होगी रथ यात्रा

रथ यात्रा के साथ ही 10 दिवसीय मेले की भी शुरुआत हो जाती है जो 6 जुलाई 2025 को घूरती रथ यात्रा यानी मौसीबाड़ी से इस रथ पर सवार होकर पुनः महाप्रभु जगन्नाथ, भाई बालभद्र और बहन सुभद्रा के साथ मौसीबाड़ी से वापस अपने मूल स्थान को लौट जाते हैं. घूरती रथ मेले के साथ रांची में आयोजित होने वाले ऐतिहासिक रथ मेले का भी समापन हो जाता है.

रथ मेले के दौरान सभी धार्मिक कार्यों के साथ-साथ नए संबंधों के जोड़ने की भी शुरुआत हो जाती है. यानी किसी वैवाहिक जोड़े की शादी की रस्म की शुरुआत होती है. नवजात बच्चे के अन्नप्राशन कार्य किया जाता है, और ऐसी मानता है कि जो नव विवाहित जोड़े होते हैं वह शादी के पहले वर्ष में इस रथ यात्रा में पहुंचते हैं और अपनी शादी के दौरान पहनी गई पगड़ी को यहां भगवान को समर्पित करते हैं. ऐसा माना जाता है कि उनकी शादी के बाद ऐसा करने से उन लोगों का वैवाहिक जीवन सफल रहता है. दोनों के दांपत्य जीवन में कोई कठिनाई नहीं आती है.

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.