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जम्मू संभाग के वो 7 रास्ते, जहां से गुजरे आतंकी; बीते 2 साल में हमले के लिए किया इस्तेमाल; अलर्ट पर एजेंसियां

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जम्मू-कश्मीर सालों से आतंकवाद से जूझ रहा है. बीते सालों में कश्मीर में कई बड़े आतंंकवादी हमले हुए. ताजा हमला आतंकियों ने पहलगाम के बैसरन घाटी में किया. आतंकी सेना की मौजूदगी के बाद भी घुसपैठ करने में कामयाब हो रहे हैं. फिर घुसपैठ के बाद सात रास्तों का उपयोग कर रहे हैं. इनमें से कुछ आतंकयों के पारंपरिक रास्ते रहे हैं.

बताया जा रहा है कि आतंकी इन रास्तों का उपयोग 90 के दशक में भी किया करते थे. जम्मू संभाग में आतंकवादी घटनाओं में कमी आने के बाद इन रास्तों में सेना की तैनाती भी कम की गई. हालांकि अब एक बार फिर जम्मू संभाग में आतंकी गतिविधियां बढ़ी हैं. आतंकियों ने अपने ओवर ग्राउंड वर्कर्स की सहायता से पुराने रास्तों का उपयोग कर हमले किए.

सुरक्षा एजेंसियों ने रास्ते किए चिन्हित

साथ ही सेना की तैनाती कम होने के बाद ही आतंकियों की जम्मू संभाग में सक्रियता भी बढ़ी.सुरक्षा एजेंसियों ने कठुआ, सांबा, जम्मू, उधमपुर, डोडा, किश्तवाड़ के रास्ते चिन्हित किए हैं. बीते दो साल में जितने भी हमले हुए आतंकियों ने इन्हीं रास्तों में का उपयोग किया था. रक्षा से जुड़े एक्सपर्ट्स का मानना है कि जम्मू संभाग में जो आतंकी गतिविधियां बढ़ी हैं वो चिंता का विषय है.

जम्मू संभाग में बढ़ीं आतंकी गतिविधियां

90 के दशक में आतंकी घुसपैठ के बाद जिन रास्तों का उपयोग करते थे, उन्होंने फिर उन रास्तों को सक्रिय किया है. क्योंकि इन रास्तों के आसपास जो सेना के जवान तैनात थे, उनको लद्दाख में तनाव की वजह से वहां भेज दिया गया था. इसका लाभ आतंकियों ने उठाया. साल 2023 में उन्होंने जम्मू संभाग में अपनी गतिविधियां बढ़ाईं. अब लद्दाख से सेना वापस बुलाई गया है और जवानोंं को वहीं तैनात किया जा रहा है, जहां वो पहले तैनात थे.

आतंकियों के खिलाफ निर्णायक लड़ाई

इससे लोगों में भरोसा बढ़ेगा. साथ ही आतंकियों के खिलाफ की जाने कार्रवाई को और अधिक मजबूती मिलेगी. रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सेना जम्मू संभाग में आतंकियों के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ रही है. आतंकियों के खिलाफ मजबूती से घेराबंदी भी की गई है, ताकि जो आंतकी घुसपैठ कर चुके हैं वो जम्मू से कश्मीर संभाग में दाखिल न हो सकें.

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