Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Parliament Question Hour Analysis: संसद के लाखों सवालों में आम जनता के मुद्दे कहां? जानिए गरीबी और ज... Maharashtra Voter List SIR 2026: वोटर लिस्ट से नाम हटाने से पहले BLA को देनी होगी सूची, चुनाव आयोग क... RSS Chief Mohan Bhagwat: अतिवाद से परेशान है दुनिया, भारत के पास है ज्ञान का खजाना; अखिल भारतीय विहा... Tamil Nadu Language Dispute: सथानकुलम में दिशा-निर्देश बोर्ड से मिटाए गए हिंदी शब्द, भारी विरोध के ब... Ozone Urbana Scam: बेंगलुरु में होम बायर्स से 927 करोड़ की ठगी, ओजोन ग्रुप के CMD एस. वासुदेवन गिरफ्... Manori Beach News: स्पीडबोट से विदेशी जहाज में चोरी करने घुसे थे बदमाश, गैस रिसाव से 4 की मौत; हेलीक... यूपी की 11 MLC सीटों पर भाजपा का चुनावी चक्रव्यूह: 23 अक्टूबर को मतदान, सामाजिक समीकरणों पर जोर Ramnagar Road Accident: नैनीताल घूमने निकले नेशनल बास्केटबॉल प्लेयर यतीश यादव की सड़क हादसे में मौत,... दिल्ली के 736 पार्कों का सुरक्षा ऑडिट पूरा: उपराज्यपाल के निर्देश पर DDA ने 3 श्रेणियों में बांटे पा... वृंदावन आश्रम पर गहराया विवाद: शिष्य की संदिग्ध मौत के बीच हाथरस का युवक 3 महीने से लापता

यूपी BJP के OBC विधायकों ने फिर खोला सरकार के खिलाफ मोर्चा, आखिर केशव के मन में क्या है?

45

गाजियाबाद की लोनी सीट से विधायक नंदकिशोर गुर्जर एक बार फिर अपने ही सरकार पर उंगली उठा रहे हैं. श्री राम कथा यात्रा की मंजूरी को लेकर विधायक गाज़ियाबाद के पुलिस कमिश्नर और यूपी के मुख्य सचिव को सीधे चुनौती दे रहे हैं. बीजेपी ने विधायक को कारण बताओ नोटिस जारी किया है. लेकिन केशव मौर्या उनके साथ मंच साझा कर रहे हैं और मजबूती से उनके साथ खड़े हैं. गोपामऊ से विधायक श्याम प्रकाश तो सीधे सीधे केशव को सीएम बनाने की मांग कर दिए हैं.

केशव उनके साथ भी खड़े नजर आ रहे हैं और उनको भोला भाला बताकर भोलेपन में दिया गया बयान बता रहे हैं. बीजेपी में अब तक हुए महानगर और जिलाध्यक्षों की लिस्ट से भी ये जाहिर हो रहा है कि यूपी में बीजेपी एक बार फिर ओबीसी पॉलिटिक्स के ही सहारे 2027 के चुनाव में जाने के मूड में है.अब बीजेपी की मौजूदा सियासी बदलाव और राजनैतिक घटनाक्रम को देखते हुए कई सवाल खड़े हो रहे हैं.

यूपी बीजेपी ने खड़े हो रहे ये सवाल

  1. क्या ये मान लिया जाए कि अब बीजेपी में सीधे सीधे लकीर खींचने वाली सियासत शुरू हो गई है?
  2. क्या 2019 और 2024 में लोकसभा चुनाव परिणाम के बाद संगठन बनाम सरकार वाली परिस्थिति फिर से यूपी में बन रही है? और इस बार ये बहस संगठन में ओबीसी नेतृत्व और महत्व को रेखांकित करते हुए बढ़ रही है?
  3. तीसरा और सबसे अहम सवाल कि क्या संगठन और सरकार में बेहतर तालमेल के लिए प्रदेश का नेतृत्व ओबीसी लीडरशिप के हाथों में होना चाहिए?

वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र कुमार का मानना है कि ज्यादातर ओबीसी विधायकों का अभी भी मानना है कि केशव योग्य हैं और उनको जानबूझकर चुनाव हरवाया गया. बीजेपी के ओबीसी विधायकों के मन में ये बात भी है कि सरकार भले उनकी है और वो विधायक हैं लेकिन ब्यूरोक्रेसी उनको इग्नोर कर रही है. अधिकारी सुन नहीं रहे हैं और कमीशन का खेल अलग चल रहा है. ऐसे में आम लोगों का काम और दूसरे सामाजिक कार्य करा पाने में वो खुद को असमर्थ पा रहे है.

ओबीसी वोटबैंक निर्णायक तो नेतृत्व क्यों नहीं?

अब पिछड़े वर्ग के विधायकों में ये बात मजबूती से घर कर गई है कि सरकार बनाने में ओबीसी वोटबैंक निर्णायक है और पिछड़े बीजेपी के साथ मजबूती से खड़े हैं तो नेतृत्व उनके हाथों में क्यों नही है? राजेंद्र कुमार कहते हैं कि हालांकि ये कहना अभी से ठीक नहीं होगा कि केशव सीएम ही बनना चाहते हैं या नेतृत्व परिवर्तन की सुगबुगाहट सुनाई दे रही है. लेकिन इतना जरूर है कि योगी सरकार को आठ साल पूरे हो रहे हैं और बीजेपी को नया प्रदेश अध्यक्ष मिलने जा रहा है और वो भी पीडीए से ही होने की संभावना है. तो हर नेता अपनी अपनी गोटी सेट करने में लगा है.

8 साल पूरे होने पर सरकार गिना रही उपलब्धियां

केशव इन पिछड़े वर्ग के नेताओं के साथ इसलिए खड़े नजर आते हैं क्योंकि उन्हीं के प्रदेश अध्यक्ष रहते इन नेताओं की एंट्री हुई थी और इनको टिकट मिला और ये चुनाव जीते. आठ साल पूरा होने पर योगी सरकार एक तरफ अपनी उपलब्धियां बता रही है तो दूसरी तरफ बीजेपी के ही ओबीसी विधायक अधिकारियों को भ्रष्ट और आम लोगों की नहीं सुनने वाला बता रहे हैं. अब बीजेपी के लिए दोहरी चुनौती है कि यूपी बीजेपी की लीडरशिप सपा के पीडीए फॉर्मूले से या फिर अपनी ही पार्टी के पीडीए नेताओं से लड़े.

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.