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सदन में सिंघार का करिश्मा! खास रणनीति से सत्तापक्ष को बैकफुट पर धकेला, चेतावनी भी दे दी- अगर…

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भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार को घेरने के लिए ठोस रणनीति अपनाई। यह सत्र कुल 14 दिनों का था, लेकिन केवल 9 बैठकें हुईं। इसके बावजूद कांग्रेस ने प्रभावी ढंग से चर्चा के जरिए सरकार पर सवाल खड़े किए और विपक्ष की ताकत का अहसास करवाया।

चर्चा पर जोर, हंगामे से दूरी

आमतौर पर कांग्रेस विधायकों को हंगामा और विरोध प्रदर्शन करते देखा जाता है, लेकिन इस बार उनकी रणनीति बदली हुई नजर आई। उमंग सिंघार के नेतृत्व में कांग्रेस ने हंगामे की बजाय चर्चा पर ध्यान दिया और अपराध, कथित परिवहन घोटाला, निवेश के झूठे दावों, कानून-व्यवस्था जैसे अहम मुद्दों को उठाया। कांग्रेस की इस रणनीति का असर यह रहा कि कई भाजपा विधायक और मंत्री कांग्रेस के सवालों में उलझते नजर आए।

सत्र समाप्त होने के बाद नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा, “हमने प्रदेश की जनता के मुद्दे और विकास के सवाल उठाकर सरकार को जगाने का काम किया है। लेकिन सरकार जागी है या नहीं, यह कुछ महीनों में पता चलेगा। यदि सरकार अब भी जनता की समस्याओं पर ध्यान नहीं देती है, तो आगे और पुरजोर तरीके से आवाज उठाई जाएगी।” सिंघार ने सरकार के बजट प्रावधानों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बजट में राशि का प्रावधान तो कर दिया गया है, लेकिन असली सवाल यह है कि यह राशि कितनी नीचे तक पहुंचेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस आने वाले महीनों में इस पर नजर रखेगी।

विकास निधि बढ़ाने और सदन की कार्यवाही लाइव करने की मांग

उमंग सिंघार ने इस सत्र में विधायकों की विकास निधि बढ़ाने की मांग भी रखी। उन्होंने कहा कि “हर विधायक को कम से कम 5 करोड़ रुपये की राशि दी जानी चाहिए, ताकि वे अपने क्षेत्रों में विकास कार्य करवा सकें।” इस पर मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया है कि इस मांग पर विचार किया जाएगा। इसके अलावा, कांग्रेस ने सदन की कार्यवाही को लाइव प्रसारित करने की मांग भी उठाई। सिंघार ने कहा कि “जनता को यह जानने का हक है कि सदन में पक्ष और विपक्ष किस तरह से उनकी समस्याओं को उठा रहे हैं। यदि कार्यवाही का सीधा प्रसारण किया जाता है, तो जनता को सरकार और विपक्ष के कार्यों की वास्तविकता का पता चलेगा।”

कम संख्या के बावजूद कांग्रेस का दमदार प्रदर्शन

संख्याबल में कम होने के बावजूद कांग्रेस ने इस बार मजबूत रणनीति के तहत सरकार को जवाब देने पर मजबूर किया। पहले जहां कांग्रेस का ध्यान हंगामे पर रहता था, वहीं इस बार चर्चा और तर्कों के जरिए सरकार को घेरने की रणनीति अपनाई गई। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बदलाव कांग्रेस के लिए फायदेमंद हो सकता है। अब सवाल यह है कि क्या कांग्रेस इस रणनीति को आगे भी जारी रखेगी या आने वाले सत्रों में फिर से हंगामे का रास्ता अपनाएगी।

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