Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
नोएडा के 12वें विशाल कांवड़ सेवा शिविर में पहुंचे Gauri Shiksha Foundation के चेयरमैन Mukesh Sharma राहुल गांधी की पोस्ट पर किरेन रिजिजू का पलटवार, कहा— "राहुल की सोच बदली, उम्मीद है महिला आरक्षण बिल ... पेट्रोल-डीजल के ताज़ा रेट जारी: दिल्ली, मुंबई से पटना तक जानें 8 अगस्त के दाम; क्रूड ऑयल पर ईरान-ओमा... जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ CIK का बड़ा एक्शन, सिम कार्ड दुरुपयोग और UAPA मामलों में कई जिलों ... कर्नाटक के कलबुर्गी में बाढ़ से बिगड़े हालात, उफनती कमलावती नदी में ट्रैक्टर पर शव ले जाकर हुआ अंतिम... बरेली में गजब कारनामा: संदिग्ध परिस्थितियों में गायब महिला दूसरे समुदाय के युवक के घर डबल बेड के नीच... कानपुर देहात में प्रेमी जोड़े को तालिबानी सजा: रस्सी से बांधकर लाठी-डंडों से पीटा, वीडियो वायरल होने ... यूपी में सियासी घमासान: "सपा गिरगिट की तरह रंग बदलती है"— मायावती और बृजेश पाठक का अखिलेश यादव पर ती... कांवड़ यात्रा नियम: सावन शिवरात्रि पर जल चढ़ाने के बाद भी रखें इन बातों का ध्यान, न करें ये गलतियां कश्मीरी विस्थापितों की वापसी पर संसदीय पैनल की रिपोर्ट: सुरक्षा व आजीविका के आकलन का निर्देश, मिलेगा...

जानें कौन थे गागा भट्ट ब्राह्मण, जिनके वंशज कराएंगे रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा

37

इंदौर। अयोध्या में नवनिर्मित राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा 22 जनवरी 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में होगी। राम लला की प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम 16 जनवरी को शुरू हो जाएगा और इसके अगले दिन से भी भक्त रामलला के दर्शन कर सकेंगे। राम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय पहले ही ये जानकारी दे चुके हैं कि राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा का कार्य प्रकांड पंडित गागाभट्ट ब्राह्मण के वंशज कराएंगे। ऐसे में अधिकांश लोगों के मन में यह जिज्ञासा जरूर है कि आखिर पंडित गागाभट्ट कौन थे और उनके वंशजों को अयोध्या राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा की जिम्मेदारी क्यों सौंपी गई है?

गागाभट्ट ने कराया था शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक

पंडित गागाभट्ट 17वीं शताब्दी में हुए ख्यात ब्राह्मण विद्वान थे, जिन्हें विश्वेश्वर भट्ट या गंग भट्ट के नाम से भी जाना जाता है। ब्राह्मण विद्वान गागाभट्ट मूलत: वाराणसी के रहने वाले थे और उन्होंने ही मराठा साम्राज्य को मजबूत करने वाले छत्रपति शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक करवाया था। उन्हीं के वंशजों को अयोध्या के राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा का कार्य सौंपा गया है। इसके अलावा काशी के विख्यात विद्वान आचार्य लक्ष्मीकांत मथुरानाथ दीक्षित भी 121 कर्मकांडी ब्राह्मणों के साथ सभी अनुष्ठानों को संपन्न करेंगे।

 

देशस्थ ब्राह्मण थे गागाभट्ट

17वीं शताब्दी में गागाभट्ट वैदिक प्रवचन के सबसे बड़े जानकार थे। गागाभट्ट देशस्थ ऋग्वेदी ब्राह्मण थे। गागाभट्ट मूलरूप से महाराष्ट्र के पैठण के रहने वाले थे और बाद में वाराणसी में बस गए थे। उनका गोत्र विश्वामित्र था और गागाभट्ट के परदादा नारायण भाश भी एक प्रसिद्ध विद्वान थे और स्मृति ग्रंथों पर कई उल्लेखनीय कार्य किया था।

1674 में हुआ था शिवाजी का राज्याभिषेक

शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक साल 1674 में हुआ था। इसके करीब 11 साल पहले से शिवाजी महाराज और गागाभट्ट एक-दूसरे से परिचित थे। पंडित गागाभट्ट ने जब शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक कराया था, तब उन्होंने देश की 7 पवित्र नदियों का जल स्वर्ण कलश में भरकर शिवाजी महाराज के सिर पर रखा था और राज्याभिषेक मंत्रों का उच्चारण किया था। विधि-विधान से पूजा के बाद शिवाजी महाराज ने जीजा माता के पैर छुए थे।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.